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जिले को कुपोषण मुक्त बनाने को मांगा सहयोग
शाहजहांपुर।
Updated Tue, 20 Jan 2015 11:25 PM IST
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मुख्यमंत्री के प्राथमिकता वाले कार्यक्रम राज्य पोषण मिशन को जिले में प्रभावी बनाने को प्रयासरत डीएम शुभ्रा सक्सेना ने सोमवार को इस दिशा में एक कदम और आगे बढ़ाया। गांधी भवन में मिशन के तहत आयोजित कार्यशाला में विभिन्न विभागों के अधिकारियों को सर्वाधिक कुपोषित चिन्हित किए गए 116 गांव गोद देकर बच्चों में कुपोषण मिटाने की सभी से भावनात्मक अपील की। उन्होंने कहा कि कुपोषित बच्चों की अपनी संतानों जैसी देखभाल करके उन्हें स्वस्थ बनाने का प्रयास करें।
इस लक्ष्य को पाने के लिए डीएम ने नामित किए गए अधिकारियों को छह माह का समय देते हुए संवर्धन प्रोजेक्ट में शामिल कामों को नियत समय सीमा में करने के निर्देश दिए। उन्हाेंने कहा कि गरीबी, अज्ञानता और निरक्षरता आदि कारण कुपोषण की देन हैं। बेटियों की कम उम्र में शादी से किशोरावस्था से ही कुपोषण की शुरुआत हो जाती है। इसलिए बच्चों के स्वास्थ्य की देखरेख के साथ कुपोषण के कारण मिटाने पर भी ध्यान देना होगा।
डीएम ने अधिकारियों को 25 से 27 जनवरी तक गांव स्तर पर प्रस्तावित कुपोषित बच्चों के सर्वे में शामिल होने और उनका माप-वजन अपने सामने कराने के निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि इसके लिए विकसित किए जा रहे साफ्टवेयर में कुपोषित बच्चों का डेटा फीड होगा। बच्चे के जन्म के तुरंत बाद उससे संबंधित ब्योरा भी फीड किया जाएगा। इसी डेटा के आधार पर बच्चों के अभिभावकों को एसएमएस से पोषण संबंधी जानकारियां दी जाएंगी।
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सीएमओ डॉ. उमेश यादव ने कुपोषण के आंकड़ों का हवाला देते हुए कुपोषितों को संतुलित आहार की व्यवस्था पर जोर दिया। जिला कार्यक्रम अधिकारी बुद्घि मिश्रा ने आंगनबाड़ी केंद्रों पर पुष्टाहार वितरण की जानकारी दी। डीपीआरओ चंद्रिका प्रसाद ने स्वच्छता को पोषण से जोड़ते हुए शौचालय निर्माण और निर्मल भारत अभियान की अहमियत बताई। आईएमए के अध्यक्ष डॉ. विजय पाठक ने सहयोग का वायदा किया। कार्यशाला में एसपी आरपीएस यादव, एडीएम मुनेंद्र नाथ उपाध्याय, नोडल अफसर वंदना त्रिवेदी आदि अधिकारी आदि मौजूद रहे।
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इस लक्ष्य को पाने के लिए डीएम ने नामित किए गए अधिकारियों को छह माह का समय देते हुए संवर्धन प्रोजेक्ट में शामिल कामों को नियत समय सीमा में करने के निर्देश दिए। उन्हाेंने कहा कि गरीबी, अज्ञानता और निरक्षरता आदि कारण कुपोषण की देन हैं। बेटियों की कम उम्र में शादी से किशोरावस्था से ही कुपोषण की शुरुआत हो जाती है। इसलिए बच्चों के स्वास्थ्य की देखरेख के साथ कुपोषण के कारण मिटाने पर भी ध्यान देना होगा।
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डीएम ने अधिकारियों को 25 से 27 जनवरी तक गांव स्तर पर प्रस्तावित कुपोषित बच्चों के सर्वे में शामिल होने और उनका माप-वजन अपने सामने कराने के निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि इसके लिए विकसित किए जा रहे साफ्टवेयर में कुपोषित बच्चों का डेटा फीड होगा। बच्चे के जन्म के तुरंत बाद उससे संबंधित ब्योरा भी फीड किया जाएगा। इसी डेटा के आधार पर बच्चों के अभिभावकों को एसएमएस से पोषण संबंधी जानकारियां दी जाएंगी।
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सीएमओ डॉ. उमेश यादव ने कुपोषण के आंकड़ों का हवाला देते हुए कुपोषितों को संतुलित आहार की व्यवस्था पर जोर दिया। जिला कार्यक्रम अधिकारी बुद्घि मिश्रा ने आंगनबाड़ी केंद्रों पर पुष्टाहार वितरण की जानकारी दी। डीपीआरओ चंद्रिका प्रसाद ने स्वच्छता को पोषण से जोड़ते हुए शौचालय निर्माण और निर्मल भारत अभियान की अहमियत बताई। आईएमए के अध्यक्ष डॉ. विजय पाठक ने सहयोग का वायदा किया। कार्यशाला में एसपी आरपीएस यादव, एडीएम मुनेंद्र नाथ उपाध्याय, नोडल अफसर वंदना त्रिवेदी आदि अधिकारी आदि मौजूद रहे।