Shahjahanpur: मुंबई की सड़कों पर भटक रही राजश्री 25 साल बाद अपने गांव पहुंची, मृत मान चुके थे घरवाले
श्रद्धा संस्था से जुड़े बरेली के मनोवैज्ञानिक शैलेश शर्मा ने बताया कि अगस्त 2022 में राजश्री पुलिस को भटकती हुई मिली थी। मुंबई महानगर दंडाधिकारी ने राजश्री को शासकीय महिला भिक्षेकरी गृह, चेंबूर भेज दिया। श्रद्धा रिहैबिलिटेशन फाउंडेशन के फाउंडर ट्रस्टी और मनोचिकित्सक डॉ. भरत वाटवानी के अंडर में राजश्री का मानसिक इलाज हुआ।
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लगभग 25 सालों से मुंबई की सड़कों पर भटक रही राजश्री को आखिरकार अपना घर मिल गया। मंदबुद्धि राजश्री मिर्जापुर के गांव मिलकिया से अचानक गायब हो गई थी। परिजन उसकी तलाश करते रहे लेकिन वह नहीं मिली। उसकी मानसिक स्थिति ठीक होने पर श्रद्धा रिहैबिलिटेशन फाउंडेशन के सदस्यों ने उसके परिजनों की तलाश कर उनके सुपुर्द कर दिया।
श्रद्धा संस्था से जुड़े बरेली के मनोवैज्ञानिक शैलेश शर्मा ने बताया कि अगस्त 2022 में राजश्री पुलिस को भटकती हुई मिली थी। मुंबई महानगर दंडाधिकारी ने राजश्री को शासकीय महिला भिक्षेकरी गृह, चेंबूर भेज दिया। श्रद्धा रिहैबिलिटेशन फाउंडेशन के फाउंडर ट्रस्टी और मनोचिकित्सक डॉ. भरत वाटवानी के अंडर में राजश्री का मानसिक इलाज हुआ। सोशल वर्कर रीना ने राजश्री की काउंसलिंग की। ठीक होने पर राजश्री ने बताया कि वह उत्तर प्रदेश की रहने वाली है। उसे यह भी नहीं याद था कि वह मुंबई कैसे पहुंची। फाउंडेशन की टीम की रीना और अंजनी राजश्री को लेकर लखनऊ पहुंचे। उसके परिवार के बारे में जानकारी जुटाने लगीं। राजश्री को सिर्फ जलालाबाद और फर्रुखाबाद याद था।
राजश्री के परिजनों को पीलीभीत, फर्रुखाबाद व शाहजहांपुर में खोजा गया। काफी मशक्कत के बाद मिलकिया गांव में उनका परिवार मिल गया। परिवार समेत पूरे गांव के लोग राजश्री को देखकर अचंभित रह गए। भाई राजेंद्र ने बताया कि उसे बहुत तलाश किया लेकिन वह नहीं मिली। वह तो उसे मृत मान चुके थे। यकीन नहीं हो रहा कि उसकी बहन जिंदा है। राजश्री के माता-पिता गुजर चुके हैं। एक भाई की भी मौत हो चुकी है। राजश्री अब अपने भाई राजेंद्र के साथ रहेगी।