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बारिश और ठंडी हवा से छह डिग्री लुढ़का पारा, फसल और स्वास्थ्य को बढ़ा खतरा
सार
बंगाल की खाड़ी में उठे नोरू चक्रवात के कारण मानसून ने आखिरी दौर में फिर तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं।धान की कटाई के समय बारिश से किसान खासे चिंतित हैं।बुधवार शाम से छाए बादलों के बाद बृहस्पतिवार सुबह से ही पुवायां, खुटार, बंडा में शुरू हुई बारिश की फुहार से किसान परेशान होने लगे हैं।
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विस्तार
शाहजहांपुर। बंगाल की खाड़ी में उठे नोरू चक्रवात के कारण मानसून ने आखिरी दौर में फिर तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। बुधवार शाम से बूंदाबांदी शुरू हुई तो अधिकतम तापमान छह डिग्री घटकर 25 डिग्री सेल्सियस रह गया। धान की कटाई के समय बारिश से किसान खासे चिंतित हैं। उधर, बच्चों व बड़ों की सेहत को भी खतरा हो सकता है।
सुबह सात बजे के बाद फुहारें गिरने लगीं। दोपहर बाद बूंदाबांदी ने रफ्तार पकड़ ली। करीब आधा घंटा तक दो मिमी पानी बरसने के बाद भी शाम तक बारिश का सिलसिला जारी रहा। तापमान में कमी से मौसम दिन भर सुहाना बना रहा लेकिन शहर में कई जगह सड़कों के किनारे फुटपाथों पर पानी भर जाने से लोगों को आवागमन में दिक्कत हो गई। उन सभी ठिकानों पर कीचड़ से निकलना मुश्किल हो गया जहां सीवर लाइन के लिए सड़कों की खोदाई कर किनारे मिट्टी के ढेर लगाए गए थे। ठंडी हवा चली तो रात में न्यूनतम तापमान दो डिग्री घटकर 22.3 डिग्री सेल्सियस हो गया।
पिछले वर्ष अक्तूबर में हुई 133 मिमी बारिश
गन्ना शोध परिषद के मौसम वैज्ञानिक डॉ. मनमोहन सिंह के अनुसार पिछले साल अक्तूबर में 133 मिमी बारिश हुई थी। हालांकि, इससे पहले वर्ष 2019 से लेकर 2017 तक अक्तूबर बारिश के लिहाज से सूखा रहा लेकिन इसी माह वर्ष 2016 में 28 मिमी और 2015 में दस मिमी वर्षा हुई थी। उनका कहना है कि वायुदाब बैरोमीटर के सामान्य सूचकांक
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के आसपास स्थिर होने से अगले 24 घंटे में भारी वर्षा के संकेत हैं और इसके बाद भी चार-पांच दिन तक बारिश होने की संभावना बनी रहेगी।
तेजी से गिरता तापमान बढ़ाएगा रक्तचाप
वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. राजीव सिंह के अनुसार बारिश के साथ वातावरण में बढ़ रही नमी और तापमान मेें अचानक भारी गिरावट विषाणु जनित बीमारियों को बढ़ावा देने के साथ रक्तचाप और हृदय रोगियों के लिए नुकसानदेह है। बारिश की नमी में ऐसे वायरस पैदा हो जाते हैं जो वायरल इंफेक्शन अर्थात शरीर में संक्रमण पैदा कर बीमार कर देते हैं। नमी ज्यादा होने से अस्थमा और एलर्जी के मरीजों को समस्या हो सकती है। इसी तरह तापमान में भारी गिरावट से रक्तचाप बढ़ने लगता है क्योंकि सर्दी होने पर पसीना निकलना बंद होने से शरीर मेें संचित नमक बाहर निकलना बंद हो जाता है। उनका कहना है कि ऐसे मौसम में जल जनित और मच्छर जनित बीमारियां बढ़ने के साथ छोटे बच्चों में सांस फूलने की समस्या पैदा हो जाती है। इसलिए बच्चों को भीगने से बचाने की जरूरत है। इसके साथ ही हृदय और रक्तचाप के रोगियों को भी तापमान में कमी से अपना बचाव करना होगा।
ज्यादा बारिश होने पर फसलों को होगा बड़ा नुकसान
पुवायां। धान और तिल्ली की फसल पक चुकी है। गन्ने की फसल भी तैयार है। 15 दिन पूर्व हुई बारिश में गन्ने और धान की फसल काफी गिर गई थी। इससे किसानों को काफी नुकसान उठाना पड़ा था। मौसम विभाग ने फिर से आसपास के जिलों में तेज बारिश का अलर्ट जारी कर रखा है। बुधवार शाम से छाए बादलों के बाद बृहस्पतिवार सुबह से ही पुवायां, खुटार, बंडा में शुरू हुई बारिश की फुहार से किसान परेशान होने लगे हैं। किसानों का कहना है कि अगर ज्यादा बारिश होती है तो धान, तिल्ली की फसल गिरने से बड़ा नुकसान होने की आशंका है। बारिश में किसानों को धान का रेट कम मिलने से भी घाटा हो सकता है। बारिश के साथ हवा चलने से गन्ने की फसल भी गिरने से बड़ा नुकसान होने की आशंका है। कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी अधिकारी एवं वरिष्ठ शस्य वैज्ञानिक डॉ. एनसी त्रिपाठी के अनुसार फुहारों जैसी हल्की वर्षा से धान की कटाई में थोड़ी देर होगी, लेकिन हवा की गति धीमी बनी रही तो फसलें सुरक्षित रहेंगी। संवाद
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सुबह सात बजे के बाद फुहारें गिरने लगीं। दोपहर बाद बूंदाबांदी ने रफ्तार पकड़ ली। करीब आधा घंटा तक दो मिमी पानी बरसने के बाद भी शाम तक बारिश का सिलसिला जारी रहा। तापमान में कमी से मौसम दिन भर सुहाना बना रहा लेकिन शहर में कई जगह सड़कों के किनारे फुटपाथों पर पानी भर जाने से लोगों को आवागमन में दिक्कत हो गई। उन सभी ठिकानों पर कीचड़ से निकलना मुश्किल हो गया जहां सीवर लाइन के लिए सड़कों की खोदाई कर किनारे मिट्टी के ढेर लगाए गए थे। ठंडी हवा चली तो रात में न्यूनतम तापमान दो डिग्री घटकर 22.3 डिग्री सेल्सियस हो गया।
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पिछले वर्ष अक्तूबर में हुई 133 मिमी बारिश
गन्ना शोध परिषद के मौसम वैज्ञानिक डॉ. मनमोहन सिंह के अनुसार पिछले साल अक्तूबर में 133 मिमी बारिश हुई थी। हालांकि, इससे पहले वर्ष 2019 से लेकर 2017 तक अक्तूबर बारिश के लिहाज से सूखा रहा लेकिन इसी माह वर्ष 2016 में 28 मिमी और 2015 में दस मिमी वर्षा हुई थी। उनका कहना है कि वायुदाब बैरोमीटर के सामान्य सूचकांक
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के आसपास स्थिर होने से अगले 24 घंटे में भारी वर्षा के संकेत हैं और इसके बाद भी चार-पांच दिन तक बारिश होने की संभावना बनी रहेगी।
तेजी से गिरता तापमान बढ़ाएगा रक्तचाप
वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. राजीव सिंह के अनुसार बारिश के साथ वातावरण में बढ़ रही नमी और तापमान मेें अचानक भारी गिरावट विषाणु जनित बीमारियों को बढ़ावा देने के साथ रक्तचाप और हृदय रोगियों के लिए नुकसानदेह है। बारिश की नमी में ऐसे वायरस पैदा हो जाते हैं जो वायरल इंफेक्शन अर्थात शरीर में संक्रमण पैदा कर बीमार कर देते हैं। नमी ज्यादा होने से अस्थमा और एलर्जी के मरीजों को समस्या हो सकती है। इसी तरह तापमान में भारी गिरावट से रक्तचाप बढ़ने लगता है क्योंकि सर्दी होने पर पसीना निकलना बंद होने से शरीर मेें संचित नमक बाहर निकलना बंद हो जाता है। उनका कहना है कि ऐसे मौसम में जल जनित और मच्छर जनित बीमारियां बढ़ने के साथ छोटे बच्चों में सांस फूलने की समस्या पैदा हो जाती है। इसलिए बच्चों को भीगने से बचाने की जरूरत है। इसके साथ ही हृदय और रक्तचाप के रोगियों को भी तापमान में कमी से अपना बचाव करना होगा।
ज्यादा बारिश होने पर फसलों को होगा बड़ा नुकसान
पुवायां। धान और तिल्ली की फसल पक चुकी है। गन्ने की फसल भी तैयार है। 15 दिन पूर्व हुई बारिश में गन्ने और धान की फसल काफी गिर गई थी। इससे किसानों को काफी नुकसान उठाना पड़ा था। मौसम विभाग ने फिर से आसपास के जिलों में तेज बारिश का अलर्ट जारी कर रखा है। बुधवार शाम से छाए बादलों के बाद बृहस्पतिवार सुबह से ही पुवायां, खुटार, बंडा में शुरू हुई बारिश की फुहार से किसान परेशान होने लगे हैं। किसानों का कहना है कि अगर ज्यादा बारिश होती है तो धान, तिल्ली की फसल गिरने से बड़ा नुकसान होने की आशंका है। बारिश में किसानों को धान का रेट कम मिलने से भी घाटा हो सकता है। बारिश के साथ हवा चलने से गन्ने की फसल भी गिरने से बड़ा नुकसान होने की आशंका है। कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी अधिकारी एवं वरिष्ठ शस्य वैज्ञानिक डॉ. एनसी त्रिपाठी के अनुसार फुहारों जैसी हल्की वर्षा से धान की कटाई में थोड़ी देर होगी, लेकिन हवा की गति धीमी बनी रही तो फसलें सुरक्षित रहेंगी। संवाद