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बूंदाबांदी और बारिश के साथ चली सर्द हवा ने बढ़ाई ठिठुरन
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शाहजहांपुर में बुधवार को हुई बारिश से बचने के लिए छाता लगा कर जाती युवतियां । संवाद
- फोटो : SHAHJAHANPUR
शाहजहांपुर। वायुदाब में आई कमी के कारण मंगलवार को दिन भर धूप खिली रहने के बाद शाम से मौसम ने करवट बदल ली। आधी रात तक आसमान बादलों से ढक गया और इसी के साथ बूंदाबांदी होने लगी। बुधवार को सुबह से दोपहर बाद तक रुक-रुक कर बारिश का दौर जारी रहने के साथ ही उत्तर पश्चिम दिशा से सर्द हवा चलने से वातावरण में ठिठुरन बढ़ गई और दिन में अधिकतम तापमान 7.5 डिग्री लुढ़क कर 15 डिग्री सेल्सियस हो गया। मौसम विशेषज्ञ के अनुसार बृहस्पतिवार को भी सुबह घना कोहरा छाए रहने के साथ शीत लहर का प्रकोप जारी रहने का अनुमान है।
दो दिन से बैरोमीटर सूचकांक सामान्य से अधिक होने के कारण आसमान पर बादल छितराए रहे और इस वजह से दिन में धूप निकलती रही, लेकिन बीती शाम वायुदाब सामान्य से 22 अंक कम हो जाने के कारण हवा की गति धीमी पड़ी तो आसमान बादलों से घिरने लगा। इस वजह से रात में न्यूनतम तापमान 4.8 डिग्री बढ़कर 13 डिग्री सेल्सियस हो गया, लेकिन इसी के साथ बूंदाबांदी शुरू हो गयी और हवा चलने से सर्दी परवान चढ़ने लगी। बुधवार को सुबह आठ बजे तक छह मिमी. बारिश हो चुकी थी इसलिए हवा में आर्द्रता भी 13 प्रतिशत बढ़कर 93 प्रतिशत हो गई। यही वजह रही कि बारिश के साथ चली सर्द हवा के झोंके शीत लहर बनकर जनजीवन को परेशान करने लगे। दिनभर मौसम बिगड़ा रहने से बाजारो में रोजमर्रा की तरह भीड़ भी नही दिखी।
हालांकि शाम चार बजे हल्की धूप निकली, लेकिन ठंडी हवा सर्दी का बखूबी अहसास कराती रही। गन्ना शोध परिषद के मौसम विश्लेषक सुरेंद्र सिंह ने बताया कि सुबह आठ बजे से शाम चार बजे के बीच पांच मिमी बारिश हो गई। इस तरह 24 घंटे में 11 मिमीं बारिश रिकार्ड हो चुकी है। उनका कहना है कि बैरोमीटर सूचकांक शाम को सामान्य से 11 अंक अधिक हो गया है और इसे देखते बृहस्पतिवार को भी सुबह कोहरा छाया रहेगा और दिन में शीत लहर अपना प्रभाव दिखाती रहेगी।
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बारिश से तिलहन और दलहन की फसलों को नुकसान
पुवायां/खुटार। बुधवार को हुई बारिश से सरसों, तिल्ली, मटर, टमाटर, खरबूजा की फसल को नुकसान हुआ है। पकी हुई सरसों जमीन पर गिर गई हैं। वहीं आलू के खेत में पानी भर जाने से आलू सड़ने की आशंका पैदा हो गई है।
बुधवार को पुवायां, खुटार, बंडा क्षेत्र में सुबह से ही बारिश भी होती रही। शाम पांच बजे बारिश रुकी। बारिश के कारण खेतों में पानी भर गया है, इससे आलू की खुदाई रुक गई है और आलू के सड़ने की आशंका हो गई है। सरसों और तिल्ली की फसल को भी नुकसान पहुंचा है। इसके अलावा मटर और टमाटर की फसल में भी नुकसान की आशंका है। इससे सब्जी महंगी हो सकती है। जिन किसानों का आलू खेत में पड़ा हुआ है। वह भी खेत गीले हो जाने के कारण नहीं उठ सकेगा। इससे पूर्व तीन और चार फरवरी को भी ओलावृष्टि के साथ बारिश हुई थी। जिसमें फसलों को काफी क्षति हुई थी। किसानों का कहना है कि बारिश ने उनकी परेशानी बढ़ा दी है। आगे भी यदि बारिश हुई तो गेहूं को भी नुकसान पहुंच सकता है।
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दो दिन से बैरोमीटर सूचकांक सामान्य से अधिक होने के कारण आसमान पर बादल छितराए रहे और इस वजह से दिन में धूप निकलती रही, लेकिन बीती शाम वायुदाब सामान्य से 22 अंक कम हो जाने के कारण हवा की गति धीमी पड़ी तो आसमान बादलों से घिरने लगा। इस वजह से रात में न्यूनतम तापमान 4.8 डिग्री बढ़कर 13 डिग्री सेल्सियस हो गया, लेकिन इसी के साथ बूंदाबांदी शुरू हो गयी और हवा चलने से सर्दी परवान चढ़ने लगी। बुधवार को सुबह आठ बजे तक छह मिमी. बारिश हो चुकी थी इसलिए हवा में आर्द्रता भी 13 प्रतिशत बढ़कर 93 प्रतिशत हो गई। यही वजह रही कि बारिश के साथ चली सर्द हवा के झोंके शीत लहर बनकर जनजीवन को परेशान करने लगे। दिनभर मौसम बिगड़ा रहने से बाजारो में रोजमर्रा की तरह भीड़ भी नही दिखी।
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हालांकि शाम चार बजे हल्की धूप निकली, लेकिन ठंडी हवा सर्दी का बखूबी अहसास कराती रही। गन्ना शोध परिषद के मौसम विश्लेषक सुरेंद्र सिंह ने बताया कि सुबह आठ बजे से शाम चार बजे के बीच पांच मिमी बारिश हो गई। इस तरह 24 घंटे में 11 मिमीं बारिश रिकार्ड हो चुकी है। उनका कहना है कि बैरोमीटर सूचकांक शाम को सामान्य से 11 अंक अधिक हो गया है और इसे देखते बृहस्पतिवार को भी सुबह कोहरा छाया रहेगा और दिन में शीत लहर अपना प्रभाव दिखाती रहेगी।
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बारिश से तिलहन और दलहन की फसलों को नुकसान
पुवायां/खुटार। बुधवार को हुई बारिश से सरसों, तिल्ली, मटर, टमाटर, खरबूजा की फसल को नुकसान हुआ है। पकी हुई सरसों जमीन पर गिर गई हैं। वहीं आलू के खेत में पानी भर जाने से आलू सड़ने की आशंका पैदा हो गई है।
बुधवार को पुवायां, खुटार, बंडा क्षेत्र में सुबह से ही बारिश भी होती रही। शाम पांच बजे बारिश रुकी। बारिश के कारण खेतों में पानी भर गया है, इससे आलू की खुदाई रुक गई है और आलू के सड़ने की आशंका हो गई है। सरसों और तिल्ली की फसल को भी नुकसान पहुंचा है। इसके अलावा मटर और टमाटर की फसल में भी नुकसान की आशंका है। इससे सब्जी महंगी हो सकती है। जिन किसानों का आलू खेत में पड़ा हुआ है। वह भी खेत गीले हो जाने के कारण नहीं उठ सकेगा। इससे पूर्व तीन और चार फरवरी को भी ओलावृष्टि के साथ बारिश हुई थी। जिसमें फसलों को काफी क्षति हुई थी। किसानों का कहना है कि बारिश ने उनकी परेशानी बढ़ा दी है। आगे भी यदि बारिश हुई तो गेहूं को भी नुकसान पहुंच सकता है।