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अभय को राष्ट्रपति से मिला था विशिष्टि सेवा मेडल

Fri, 30 Jan 2015 12:11 AM IST
पुवायां (शाहजहांपुर)
पुवायां (शाहजहांपुर) Updated Fri, 30 Jan 2015 12:11 AM IST
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puwayan king
पुवायां में मंझले राजा के नाम से मशहूर रिटायर्ड विंग कमांडर अभय सिंह की प्रारंभिक शिक्षा पुवायां इंटर कॉलेज से हुई थी। वर्ष 1962 में उन्होंने एडीए ज्वाइन कर लिया। एअरफोर्स में सेवा के बाद विंग कमांडर पद से वह वर्ष 1987 में सेवानिवृत्त हुए थे। सेवाकाल के दौरान दक्षिणी ध्रुव अंटार्कटिका में गए वायुसेना के दूसरे दल के वह उपनेता चुने गए थे। वहां उन्होंने हवाई पट्टा बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। अंटार्कटिका टूर पर जाने वाले वह उत्तर प्रदेश से पहले व्यक्ति थे। उनका सेवा के लिए पूर्व राष्ट्रपति ज्ञानी जैलसिंह ने वायुसेना का विशिष्ठ सेवा मेडल प्रदान किया था। श्री सिंह के बड़े पुत्र अनिरूद्ध सिंह पूना और छोटे पुत्र अक्षय सिंह दिल्ली में रहते हैं।
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राजा साहब की आकस्मिक मौत की जानकारी मिलते ही पुवायां में शोक की लहर दौड़ गई। तमाम लोग उनके पैतृक आवास गढ़ी पहुंचे और शोक जताया। पुवायां इंटर कॉलेज में हुई शोकसभा में प्रधानाचार्य जेपी मौर्य सहित कॉलेज का स्टाफ मौजूद रहा। अशासकीय विद्यालय बेसिक शिक्षक महासभा के राजेंद्र सिंह यादव, अवधेश वर्मा आदि, भाजपा नेता गंगाराम मिश्रा, विशंभरदयाल, शिव सिंह, प्रभात मिश्रा, राघवेंद्र शुक्ला, राकेश मिश्रा, विमल श्रीवास्तव, राजीव सिंह, विजय वर्मा, केके गुप्ता आदि ने श्री सिंह के निधन पर गहरा दुख जताया है।
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गैलेंट्री अवार्ड से थे सम्मानित
लखनऊ/पुवायां। रिटायर्ड विंग कमांडर अभय सिंह को उनकी बहादुरी के लिए गैलेट्री अवार्ड से सम्मानित किया गया था। भारत चीन युद्व में भी उन्होंने अपनी बहादुरी का लोहा मनवाया। अपने सेवा काल में उनकी बहादुरी की उपलब्धियां जुड़ी है। इसी के तहत उन्हें राष्ट्रपति द्वारा गैलेट्रर अवार्ड से नवाजा गया था। बेटे अक्षय ने बताया वर्ष 1989 में उन्होंने स्वेच्छा से वीआरएस ले लिया था। जिसके बाद वह शाहजहांपुर के पुवायां स्टेट का कार्यभार संभालते थे।   
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गोली चलते ही कॉलोनी में मचा हड़कंप
लखनऊ। गोमतीनगर के विश्वास खंड में अभय सिंह के घर पर गोली चलने की सूचना के बाद हड़कंप मच गया। पुलिसकर्मियों के साथ कॉलोनी के लोग भी उनके घर पर पहुंच गए। आसपास के घरों से निकल कर सभी महिलाएं बुजुर्ग आशा को साहस बंधाती रहीं। वहीं पति की मौके के बाद उनका रो-रोकर बुरा हाल है। वह तीन बार बेहोश हुईं तो पड़ोसियों ने पानी के छींटे मारकर उन्हें होश दिलाया। वह रो-रोकर बस उस घड़ी को कोसती रहीं, जब अनिल ने खुदकुशी करने का फैसला लिया।

राजवाड़ा खानदान से थे
पुवायां। पुवायां राजवाड़ा खानदान से अभय सिंह थे। शासन व सत्ता में उनकी अच्छी पकड़ थी। इससे वह जनता की समस्याओं को झट से दूर करवा देते थे। वह नियमित मार्निंग वाक पर जाते थे। इस दौरान कालोनी के कई लोगों से उनकी मुलाकात होती थी। लोग अपने घर-परिवार व निजी समस्याओं तक का उसने जिक्र करने में हिचक नहीं करते थे। वह खुद लोगों को जिंदादिली का पाठ पढ़ाते थे। ऐसे में उनके जरिये खुदकुशी कर लेने की बात किसी के गले के नीचे नहीं उतरी।

भाई की मौत से टूट गए थे अभय
लखनऊ/ पुवायां। रिटायर्ड विंग कमांडर अभय सिंह अपने भाई जय सिंह की मौत से टूट गए थे। वह अकेले कमरे में गुमसुम बैठकर अक्सर बुदबुदाते रहते थे। पत्नी आशा के पूछने पर भाई की याद आने की बात कहकर उनकी आंखों से आशू छलक आते। पुलिस ने बताया बड़े भाई की मौत वर्ष 2012 में हुई थी। बड़े भाई को खोने बाद उनके मन पर इसका बुरा प्रभाव पड़ा था। वह तन्हाई व अकेलापन का दंश नहीं झेल पा रहे थे।


तीन साल पहले कराया था पंजीकरण
लखनऊ/ पुवायां। विंग कमांडर अभय सिंह ने 23 जनवरी 2012 को केजीएमयू के एनाटामी विभाग में देहदान का पंजीकरण कराया था। फौज में रहकर देश सेवा का जज्बा उनके अंदर कूटकूटकर भरा था। वह हमेशा देश सेवा की बातें करते थे और लोगों को देश हित में कार्य करने की सलाह देते थे। पत्नी आशा रोते हुए बोलीं, फौज में रहते हुए देश की रक्षा की मरने बाद भी शरीर बेकार न जाए। इसके लिए तीन साल पहले ही देहदान का पंजीकरण कराया था। उनकी अंतिम इच्छा थी मरने बाद छात्रों की पढ़ाई में उनका शरीर काम आ सके।
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