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बिजली कर्मचारियों ने निजीकरण के विरोध में दिया धरना
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शाहजहांपुर। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के सदस्यों ने शुक्रवार को कृष्णा नगर स्थित एक्सईएन कार्यालय पर धरना प्रदर्शन किया। इस दौरान पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के प्रस्ताव का विरोध किया। इससे पहले जलालाबाद विधायक शरदवीर सिंह को ज्ञापन भी सौंपा गया।
ज्ञापन में कहा गया कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम का निजीकरण किसी भी प्रकार से प्रदेश व आम जनता के हित में नहीं है। निजी कंपनी मुनाफे के लिए काम करती हैं जबकि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम बिना किसी भेदभाव के किसानों और गरीबों उपभोक्ताओं को निर्बाध बिजली आपूर्ति कर रहा है। निजी कंपनी अधिक राजस्व वाले वाणिज्य के औद्योगिक उपभोक्ताओं को प्राथमिकता पर बिजली देंगी, जो ग्रेटर नोएडा और आगरा में हो रहा है। निजी कंपनी लागत से कम मूल्य पर किसी भी उपभोक्ता को बिजली उपलब्ध नहीं कराएंगी। अभी किसानों, गरीबी रेखा के नीचे जीवनयापन करने वालों और 500 यूनिट प्रतिमाह बिजली खर्च करने पर उपभोक्ताओं को पावर कॉरपोरेशन घाटा उठाकर बिजली देता है। इसके चलते इन उपभोक्ताओं को लागत से कम मूल्य पर बिजली मिल रही है। निजीकरण के बाद स्वाभाविक रूप से उपभोक्ताओं के लिए बिजली महंगी हो जाएगी। पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम में निजीकरण का प्रयोग दोहराने से बिजली कर्मियों में नाराजगी है। मांग की गई कि निजीकरण के फैसले को वापस लिया जाए।
संघर्ष समिति के संयोजक विनोद सिंह राणा ने बताया कि निजीकरण के विरोध में बिजली कर्मचारी 29 सितंबर से कार्य बहिष्कार करेंगे। इससे पहले 28 सितंबर को मशाल जुलूस निकाला जाएगा। दो अक्टूबर तक ज्ञापन दिए जाएंगे और पांच अक्टूबर से बिजली कर्मी पूरे दिन का कार्य बहिष्कार करेंगे। धरना प्रदर्शन व ज्ञापन देने वालों में सह संयोजक शिवचरण प्रसाद, अध्यक्ष प्रशांत गुप्ता, सचिव तेजराम कठेरिया, अतुल कुमार, गौरव कुमार शामिल रहे।
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विधायक ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र
शाहजहांपुर। बिजली कर्मचारियों समर्थन में जलालाबाद विधायक शरदवीर सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखा है। उन्होंने पत्र में कहा कि विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति द्वारा अवगत कराया गया है कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम का विघटन व निजीकरण किया जाना प्रस्तावित है। जिससे आम जनमानस पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा। उनकी मांग है कि जनहित, उपभोक्ता व कर्मचारी हितों को ध्यान में रखते हुए प्रस्तावित विघटन/निजीकरण प्रक्रिया को निरस्त किया जाए।
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ज्ञापन में कहा गया कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम का निजीकरण किसी भी प्रकार से प्रदेश व आम जनता के हित में नहीं है। निजी कंपनी मुनाफे के लिए काम करती हैं जबकि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम बिना किसी भेदभाव के किसानों और गरीबों उपभोक्ताओं को निर्बाध बिजली आपूर्ति कर रहा है। निजी कंपनी अधिक राजस्व वाले वाणिज्य के औद्योगिक उपभोक्ताओं को प्राथमिकता पर बिजली देंगी, जो ग्रेटर नोएडा और आगरा में हो रहा है। निजी कंपनी लागत से कम मूल्य पर किसी भी उपभोक्ता को बिजली उपलब्ध नहीं कराएंगी। अभी किसानों, गरीबी रेखा के नीचे जीवनयापन करने वालों और 500 यूनिट प्रतिमाह बिजली खर्च करने पर उपभोक्ताओं को पावर कॉरपोरेशन घाटा उठाकर बिजली देता है। इसके चलते इन उपभोक्ताओं को लागत से कम मूल्य पर बिजली मिल रही है। निजीकरण के बाद स्वाभाविक रूप से उपभोक्ताओं के लिए बिजली महंगी हो जाएगी। पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम में निजीकरण का प्रयोग दोहराने से बिजली कर्मियों में नाराजगी है। मांग की गई कि निजीकरण के फैसले को वापस लिया जाए।
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संघर्ष समिति के संयोजक विनोद सिंह राणा ने बताया कि निजीकरण के विरोध में बिजली कर्मचारी 29 सितंबर से कार्य बहिष्कार करेंगे। इससे पहले 28 सितंबर को मशाल जुलूस निकाला जाएगा। दो अक्टूबर तक ज्ञापन दिए जाएंगे और पांच अक्टूबर से बिजली कर्मी पूरे दिन का कार्य बहिष्कार करेंगे। धरना प्रदर्शन व ज्ञापन देने वालों में सह संयोजक शिवचरण प्रसाद, अध्यक्ष प्रशांत गुप्ता, सचिव तेजराम कठेरिया, अतुल कुमार, गौरव कुमार शामिल रहे।
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विधायक ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र
शाहजहांपुर। बिजली कर्मचारियों समर्थन में जलालाबाद विधायक शरदवीर सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखा है। उन्होंने पत्र में कहा कि विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति द्वारा अवगत कराया गया है कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम का विघटन व निजीकरण किया जाना प्रस्तावित है। जिससे आम जनमानस पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा। उनकी मांग है कि जनहित, उपभोक्ता व कर्मचारी हितों को ध्यान में रखते हुए प्रस्तावित विघटन/निजीकरण प्रक्रिया को निरस्त किया जाए।