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Shahjahanpur News: औद्योगिक गलियारे के लिए जमीनें अधिग्रहण के खिलाफ किया प्रदर्शन
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जलालाबाद में उबरिया स्थित गंगा एक्सप्रेस वे के पास प्रदर्शन करते ग्रामीण। स्रोत : ग्रामीण
जलालाबाद। गंगा एक्सप्रेसवे के औद्योगिक गलियारे के विस्तारीकरण के लिए अतिरिक्त जमीन लिए जाने की चल रही प्रक्रिया के विरोध में बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने शनिवार को एक्सप्रेसवे के पास प्रदर्शन किया। जानकारी पाकर मौके पर पहुंचे नायब तहसीलदार रोहित कटियार के सामने भी ग्रामीणों ने नारेबाजी की और ज्ञापन देकर जमीनों के अधिग्रहण की प्रक्रिया तत्काल रोके जाने की मांग की।
प्रदर्शन में दुमुकापुर, मछरियाई, कुरा बंडा, लहरावर आदि गांवों से आए ग्रामीण शामिल रहे। इन सभी ने उबरिया मंदिर के पास एक्सप्रेसवे के किनारे प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शन में शामिल इन गांवों के अनूप, कन्हई, वीरपाल, अहिबरन, श्याम पाल आदि ने बताया कि वह सभी पहले एक्सप्रेसवे और बाद में औद्योगिक गलियारे के लिए जमीनें दे चुके हैं।
अब गलियारे के विस्तारीकरण के लिए उनकी शेष बची जमीन लेने की प्रक्रिया शुरू की गई है। इन सभी का कहना है कि वह खेती-किसानी पर ही निर्भर हैं। कई ऐसे लोग भी हैं, जिनके पास सीमित खेती है और उनकी जमीनें लिए जाने पर वह भूमिहीन हो जाएंगे।
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ग्रामीणों ने वहां पहुंचे नायब तहसीलदार से भी यही आशंका जताई और उन्हें ज्ञापन देकर गलियारे के विस्तार कार्य के लिए प्रशासन से कृषि योग्य जमीन के बजाय बंजर और गैर कृषि योग्य जमीन की तलाश करने की मांग की।
नायब तहसीलदार ने ग्रामीणों को उनकी बात उच्च अधिकारियों तक पहुंचाने का आश्वासन देकर शांत किया। एक्सप्रेसवे के किनारे गुलड़िया गांव में यूपीडा ने औद्योगिक गलियारे के लिए 105 हेक्टेयर जमीनों के बैनामा कराए थे। अब यूपीडा ने इस गलियारे का विस्तारीकरण करने के लिए किसानों से 250 हेक्टेयर अतिरिक्त जमीन के बैनामे की प्रक्रिया शुरू की है।
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प्रदर्शन में दुमुकापुर, मछरियाई, कुरा बंडा, लहरावर आदि गांवों से आए ग्रामीण शामिल रहे। इन सभी ने उबरिया मंदिर के पास एक्सप्रेसवे के किनारे प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शन में शामिल इन गांवों के अनूप, कन्हई, वीरपाल, अहिबरन, श्याम पाल आदि ने बताया कि वह सभी पहले एक्सप्रेसवे और बाद में औद्योगिक गलियारे के लिए जमीनें दे चुके हैं।
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अब गलियारे के विस्तारीकरण के लिए उनकी शेष बची जमीन लेने की प्रक्रिया शुरू की गई है। इन सभी का कहना है कि वह खेती-किसानी पर ही निर्भर हैं। कई ऐसे लोग भी हैं, जिनके पास सीमित खेती है और उनकी जमीनें लिए जाने पर वह भूमिहीन हो जाएंगे।
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ग्रामीणों ने वहां पहुंचे नायब तहसीलदार से भी यही आशंका जताई और उन्हें ज्ञापन देकर गलियारे के विस्तार कार्य के लिए प्रशासन से कृषि योग्य जमीन के बजाय बंजर और गैर कृषि योग्य जमीन की तलाश करने की मांग की।
नायब तहसीलदार ने ग्रामीणों को उनकी बात उच्च अधिकारियों तक पहुंचाने का आश्वासन देकर शांत किया। एक्सप्रेसवे के किनारे गुलड़िया गांव में यूपीडा ने औद्योगिक गलियारे के लिए 105 हेक्टेयर जमीनों के बैनामा कराए थे। अब यूपीडा ने इस गलियारे का विस्तारीकरण करने के लिए किसानों से 250 हेक्टेयर अतिरिक्त जमीन के बैनामे की प्रक्रिया शुरू की है।