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गोमती तट के मंदिरों में बेल के पौध लगाएंगे प्रोफेसर शिवप्रताप
अमर उजाला ब्यूरो, शाहजहांपुर
Updated Thu, 15 Jun 2017 11:36 PM IST
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गोमती का प्रवाह रुकने को प्रशासन और सरकार भले ही गंभीरता से न ले रही हो, लेकिन समाज हित के कार्यों से जुड़े लोगों ने अमर उजाला में प्रकाशित खबर पर गंभीरता दिखाई है। जीएफ कॉलेज में जंतु विज्ञान के प्रोफेसर डॉ. शिवप्रताप सिंह की योजना गोमती किनारे स्थित बने मंदिरों के परिसर में बेल के पौधे रोपने की है। कई अन्य संगठनों ने भी गोमती के उद्धार के लिए पैदल मार्च सहित अन्य संभव उपाय करने की बात कही है।
गौरतलब है कि सदानीरा गोमती की अविरल धारा इस वर्ष बंडा से पुवायां तक कई स्थानों पर रुक गई है। जबकि गोमती को केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी नमामि गंगे योजना में शामिल किया गया है। इस योजना के तहत गोमती की धारा को अविरल बनाए रखने के साथ ही प्रदूषण मुक्त कराना, नदी तटों का सुंदरीकरण होना है, लेकिन नदी की भूमि पर अवैध कब्जों, सहायक नदियों भैंसी, कठिना आदि के सूख जाने, नदी किनारे के पेड़ काट लिए जाने, खेतों से कीटनाशक नदी में आने से जलीय जंतु नष्ट हो जाने से गोमती की धारा का प्रवाह रुक गया है।
जीएफ कॉलेज शाहजजहांपुर में जंतु विज्ञान के प्रोफे सर डॉ. शिवप्रताप सिंह ने बताया कि उन्होंने अपने घर पर बेल की पौध तैयार की है। वह गोमती की दुर्दशा से व्यथित हैं। अमर उजाला में खबर पढ़कर उन्हें लगा कि नदी किनारे पीपल, बरगद, नीम, बेल आदि के पौधे रोपे जाने से नदी को बचाया जा सकता है। अब उनकी योजना गोमती के किनारे बने मंदिरों के परिसर में बेल के पौधे रोपने की है, लेकिन अकेले यह संभव नहीं है। जो लोग इस कार्य में सहयोग करना चाहें, उनसे जुड़ सकते हैं। उधर, भाकियू के जिला उपाध्यक्ष प्रभजोत सिंह ने कहा कि अमर उजाला में गोमती नदी का मुद्दा उठाए जाने के बाद प्रशासन को तत्काल नदी की भूमि की पैमाइश कर अवैध कब्जे हटाने का काम शुरू कर देना चाहिए और नदी की धारा बंद होने के कारणों की जांच कर कार्रवाई करनी चाहिए। पर्यावरण संरक्षण और नदी बचाओ समिति के सदस्य रामचंद्र कुशवाहा, हरिशंकर, रामभजन आदि ने बताया कि गोमती को बचाने के लिए जल्द ही पुवायां तहसील क्षेत्र में लोगों को जागरूक बनाने के लिए पदयात्रा निकाली जाएगी।
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बेलपत्र करता है हानिकारक बैक्टीरिया का नाश
गोमती के किनारे स्थित मंदिरों के परिसर सहित जिले भर में बेल के पौधे लगाने की मुहिम के संबंध में डॉ. शिवप्रताप सिंह का कहना है कि जीएफ कॉलेज के उनके साथी प्रोफेसर स्वपिनल यादव ने एक शोध किया है। इससे यह साबित हो हो चुका है कि बेलपत्र में हानिकारक बैक्टीरिया का नाश करने की शक्ति है। बारिश होने पर सावन महीने में भगवान शिव पर चढ़ाए जाने वाले बेलपत्र अंतत: गंदे पानी नदी में ही पहुंचते हैं, जो जल को शुद्ध करते हैं। डॉ. शिवप्रताप ने भी चूहों पर बेलपत्र के रस के प्रभाव पर शोध किया है। इसके जो नतीजे सामने आए हैं उनके मुताबिक, बेलपत्र मानव जीवन के लिए बेहद उपयोगी है।
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गौरतलब है कि सदानीरा गोमती की अविरल धारा इस वर्ष बंडा से पुवायां तक कई स्थानों पर रुक गई है। जबकि गोमती को केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी नमामि गंगे योजना में शामिल किया गया है। इस योजना के तहत गोमती की धारा को अविरल बनाए रखने के साथ ही प्रदूषण मुक्त कराना, नदी तटों का सुंदरीकरण होना है, लेकिन नदी की भूमि पर अवैध कब्जों, सहायक नदियों भैंसी, कठिना आदि के सूख जाने, नदी किनारे के पेड़ काट लिए जाने, खेतों से कीटनाशक नदी में आने से जलीय जंतु नष्ट हो जाने से गोमती की धारा का प्रवाह रुक गया है।
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जीएफ कॉलेज शाहजजहांपुर में जंतु विज्ञान के प्रोफे सर डॉ. शिवप्रताप सिंह ने बताया कि उन्होंने अपने घर पर बेल की पौध तैयार की है। वह गोमती की दुर्दशा से व्यथित हैं। अमर उजाला में खबर पढ़कर उन्हें लगा कि नदी किनारे पीपल, बरगद, नीम, बेल आदि के पौधे रोपे जाने से नदी को बचाया जा सकता है। अब उनकी योजना गोमती के किनारे बने मंदिरों के परिसर में बेल के पौधे रोपने की है, लेकिन अकेले यह संभव नहीं है। जो लोग इस कार्य में सहयोग करना चाहें, उनसे जुड़ सकते हैं। उधर, भाकियू के जिला उपाध्यक्ष प्रभजोत सिंह ने कहा कि अमर उजाला में गोमती नदी का मुद्दा उठाए जाने के बाद प्रशासन को तत्काल नदी की भूमि की पैमाइश कर अवैध कब्जे हटाने का काम शुरू कर देना चाहिए और नदी की धारा बंद होने के कारणों की जांच कर कार्रवाई करनी चाहिए। पर्यावरण संरक्षण और नदी बचाओ समिति के सदस्य रामचंद्र कुशवाहा, हरिशंकर, रामभजन आदि ने बताया कि गोमती को बचाने के लिए जल्द ही पुवायां तहसील क्षेत्र में लोगों को जागरूक बनाने के लिए पदयात्रा निकाली जाएगी।
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बेलपत्र करता है हानिकारक बैक्टीरिया का नाश
गोमती के किनारे स्थित मंदिरों के परिसर सहित जिले भर में बेल के पौधे लगाने की मुहिम के संबंध में डॉ. शिवप्रताप सिंह का कहना है कि जीएफ कॉलेज के उनके साथी प्रोफेसर स्वपिनल यादव ने एक शोध किया है। इससे यह साबित हो हो चुका है कि बेलपत्र में हानिकारक बैक्टीरिया का नाश करने की शक्ति है। बारिश होने पर सावन महीने में भगवान शिव पर चढ़ाए जाने वाले बेलपत्र अंतत: गंदे पानी नदी में ही पहुंचते हैं, जो जल को शुद्ध करते हैं। डॉ. शिवप्रताप ने भी चूहों पर बेलपत्र के रस के प्रभाव पर शोध किया है। इसके जो नतीजे सामने आए हैं उनके मुताबिक, बेलपत्र मानव जीवन के लिए बेहद उपयोगी है।