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सब्जियां खींच रहीं नालों का जहर
अनूप वाजपेयी, शाहजहांपुर
Updated Thu, 29 Jan 2015 11:38 PM IST
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सैकड़ों घरों और फैक्ट्रियों से निकले गंदे पानी को नदियों तक ले जाने वाले नाले आसपास के खेतों में फसलों की सिंचाई का जरिया बन गए हैं। शहर के आसपास करीब एक सौ हेक्टेयर में फैले खेतों में नालों के गंदे पानी से जहरीली सब्जियां उगाई जा रही है। पर्यावरणविदों और कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार गंदे पानी में घुले कास्टिक, सीसा, सल्फर, लेड, केडमियम, जिंक, निकिल आदि तत्व सब्जियों के जरिए शरीर मेें प्रवेश करके तमाम समस्याएं खड़ी कर सकते हैं।
इन इलाकों में इस्तेमाल हो रहा नालों का पानी
शहर के लोधीपुर, अहमदपुर रेती, नई बस्ती, बहादुरपुरा, बंका घाट, दलेलगंज, केरूगंज में खन्नौत का तटवर्ती क्षेत्र, ककरा कलां, मदराखेल, मामुड़ी, हद्दफ, सुभाषनगर, गदियाना चुंगी, जलालनगर की तराई बस्ती आदि रिहायशी इलाकों के नजदीकी खेतों में नालों का पानी रोककर पंपिंग सेट से खेतों तक पहुंचाया जा रहा है।
जल प्रदूषण के शोध नतीजे दे रहे गंभीर संकेत
विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक रिपोर्ट के अनुसार सिंचाई में इस्तेमाल होने वाले पानी में घुली भारी धातुओं और क्षारीय तत्वों के जो मानक तय किए गए हैं, पर्यावरण रक्षा को सक्रिय संस्था पृथ्वी के शोध नतीजों से काफी कम हैं। दूसरे शब्दों में सीवरेज के पानी में हैवी मेटल्स कई गुना अधिक घुली हैं। उदाहरण के लिए सिंचाई वाले पानी में कैडमियम की मात्रा 3 से 6 माइक्रो ग्राम प्रति ग्राम से अधिक नहीं होनी चाहिए, लेकिन नालों के किनारे उगी पालक में 98.92 माइक्रो ग्राम कैडमियम पाया गया है। बैंगन, टमाटर, गोभी आदि में कास्टिक, लेड, आर्सेनिक आदि तत्व मानक से अधिक मिले हैं।
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लता वर्गीय सब्जियों में मिल रहा ऑक्सीटोसिन
लता वर्गीय सब्जियों में शामिल खीरा, ककड़ी, लौकी, तोरई, कद्दू आदि का आकार और वजन बढ़ाने के लिए दुधारू जानवरों पर इस्तेमाल होने वाले हार्मोनल रसायन ऑक्सीटोसिन के घटक पाए गए हैं। ऑक्सीटोसिन को प्रतिबंधित किए जाने के बावजूद इसके एंपुल दवा स्टोरों पर आसानी से उपलब्ध हैं।
पीलिया और लीवर संबंधी रोग संभव
‘घरों से निकले मल-मूत्र जैसे अपशिष्ट को बहाने वाले नालों के पानी में घुले लेड से हड्डियां कमजोर पड़ने के साथ ज्वॉइंडिस का खतरा बढ़ जाता है, जबकि आर्सेनिक लीवर के लिए स्लो प्वॉयजन जैसा साबित होता है। कास्टिक की अधिकता किडनी को प्रभावित करती है।’
-डॉ. राजीव सिंह, जनरल फिजीशियन
सब्जियां सोख लेती हैं भारी धातुएं
‘शरीर के लिए हानिकर भारी धातुएं पालक, गोभी जैसी सब्जियों के पौधे आसानी से सोख लेते हैं। सब्जियों के जरिए लेड, क्रोमियम जैसे तत्व शरीर में जाकर कई बीमारियां पैदा कर देते हैं। कास्टिक से पौधों की बढ़वार थम जाती है और पोषक तत्व भी प्रभावित होते हैं।’
-डॉ. केएम सिंह, शस्य विज्ञानी, कृषि विज्ञान केंद्र
सिंचाई से पहले रिसाइकिल हो गंदा पानी
‘विदेशों में सीवरेज वाटर को सिंचाई के लिए इस्तेमाल करने से पहले उसे रिसाइकिल किया जाता है। अपने शहर में नगरपालिका परिषद अभी तक जलशोधन यंत्र चालू नहीं करा पाई है। यह महज भ्रांति है कि नालों के पानी में जैविक तत्वों की अधिकता होती है।’
-डॉ. विकास खुराना, पर्यावरणविद्/निदेशक, पृथ्वी
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इन इलाकों में इस्तेमाल हो रहा नालों का पानी
शहर के लोधीपुर, अहमदपुर रेती, नई बस्ती, बहादुरपुरा, बंका घाट, दलेलगंज, केरूगंज में खन्नौत का तटवर्ती क्षेत्र, ककरा कलां, मदराखेल, मामुड़ी, हद्दफ, सुभाषनगर, गदियाना चुंगी, जलालनगर की तराई बस्ती आदि रिहायशी इलाकों के नजदीकी खेतों में नालों का पानी रोककर पंपिंग सेट से खेतों तक पहुंचाया जा रहा है।
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जल प्रदूषण के शोध नतीजे दे रहे गंभीर संकेत
विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक रिपोर्ट के अनुसार सिंचाई में इस्तेमाल होने वाले पानी में घुली भारी धातुओं और क्षारीय तत्वों के जो मानक तय किए गए हैं, पर्यावरण रक्षा को सक्रिय संस्था पृथ्वी के शोध नतीजों से काफी कम हैं। दूसरे शब्दों में सीवरेज के पानी में हैवी मेटल्स कई गुना अधिक घुली हैं। उदाहरण के लिए सिंचाई वाले पानी में कैडमियम की मात्रा 3 से 6 माइक्रो ग्राम प्रति ग्राम से अधिक नहीं होनी चाहिए, लेकिन नालों के किनारे उगी पालक में 98.92 माइक्रो ग्राम कैडमियम पाया गया है। बैंगन, टमाटर, गोभी आदि में कास्टिक, लेड, आर्सेनिक आदि तत्व मानक से अधिक मिले हैं।
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लता वर्गीय सब्जियों में मिल रहा ऑक्सीटोसिन
लता वर्गीय सब्जियों में शामिल खीरा, ककड़ी, लौकी, तोरई, कद्दू आदि का आकार और वजन बढ़ाने के लिए दुधारू जानवरों पर इस्तेमाल होने वाले हार्मोनल रसायन ऑक्सीटोसिन के घटक पाए गए हैं। ऑक्सीटोसिन को प्रतिबंधित किए जाने के बावजूद इसके एंपुल दवा स्टोरों पर आसानी से उपलब्ध हैं।
पीलिया और लीवर संबंधी रोग संभव
‘घरों से निकले मल-मूत्र जैसे अपशिष्ट को बहाने वाले नालों के पानी में घुले लेड से हड्डियां कमजोर पड़ने के साथ ज्वॉइंडिस का खतरा बढ़ जाता है, जबकि आर्सेनिक लीवर के लिए स्लो प्वॉयजन जैसा साबित होता है। कास्टिक की अधिकता किडनी को प्रभावित करती है।’
-डॉ. राजीव सिंह, जनरल फिजीशियन
सब्जियां सोख लेती हैं भारी धातुएं
‘शरीर के लिए हानिकर भारी धातुएं पालक, गोभी जैसी सब्जियों के पौधे आसानी से सोख लेते हैं। सब्जियों के जरिए लेड, क्रोमियम जैसे तत्व शरीर में जाकर कई बीमारियां पैदा कर देते हैं। कास्टिक से पौधों की बढ़वार थम जाती है और पोषक तत्व भी प्रभावित होते हैं।’
-डॉ. केएम सिंह, शस्य विज्ञानी, कृषि विज्ञान केंद्र
सिंचाई से पहले रिसाइकिल हो गंदा पानी
‘विदेशों में सीवरेज वाटर को सिंचाई के लिए इस्तेमाल करने से पहले उसे रिसाइकिल किया जाता है। अपने शहर में नगरपालिका परिषद अभी तक जलशोधन यंत्र चालू नहीं करा पाई है। यह महज भ्रांति है कि नालों के पानी में जैविक तत्वों की अधिकता होती है।’
-डॉ. विकास खुराना, पर्यावरणविद्/निदेशक, पृथ्वी