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पाटे जा रहे तालाब...शिकायतों पर नहीं दिया जा रहा ध्यान
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पुवायां में तालाब पर अवैध कब्जे
- फोटो : POWAYAN
पुवायां। नगर पालिका क्षेत्र में तालाबों पर अवैध कब्जे किए जा रहे हैं और प्रशासन सुनवाई नहीं कर रहा है। यह आरोप लगाते हुए तमाम लोगों ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर तालाबों की पैमाइश कर कब्जे हटवाने की मांग की है।
मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में बताया है कि नगर के तालाबों को भू-माफिया पाट रहे हैं। कस्बे के बीच एक तालाब में में कई मोहल्लों का गंदा पानी जाता है। इस पर अवैध कब्जे हैं। कई बार शिकायत करने पर भी किसी अधिकारी ने मुआयना करने की जरूरत नहीं समझी है। एक तालाब पर निर्माण कार्य चल रहा है। राजभवन के प्रबंधक गंगाराम मिश्रा ने 11 मई को मामले की शिकायत एसडीएम से की, लेकिन संज्ञान नहीं लिया।
तालाबों पर अवैध कब्जों से लोगों में रोष है। लोगों ने अमृत सरोवर योजना के तहत गाटा संख्या 735 पर तालाब की पैमाइश कर सौंदर्यीकरण कराने की मांग भी की है। पत्र पर नगर पालिका के पूर्व सदस्य आलोक मिश्रा, सतीश सारस्वत, शिवम मिश्रा, जयकृष्ण वाजपेयी, अमर शुक्ला, अतुल कुमार, राजेंद्र कुमार, धीरज मिश्रा, शरदचंद्र मिश्रा आदि के हस्ताक्षर हैं।
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नोटिस देकर चुप बैठ गई नगर पालिका
एक तालाब पर अवैध कब्जे के मामले में आलोक कुमार की शिकायत पर नगर पालिका ने 30 जून 2021 को अवैध कब्जेदार को नोटिस देकर तालाब भूमि पर कार्य को बंद करने और तालाब पर अवैध को 15 दिन में हटाने का नोटिस दिया था। लेकिन आज तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
आयुर्वेदिक चिकित्सालय परिसर में बांध रहे जानवर, डाल रहे कूड़ा
ददरौल। गांव चांदपुर के आयुर्वेदिक चिकित्सालय परिसर में कुछ लोग कूड़ा डाल रहे हैं और जानवर बांध रहे हैं। अस्पताल के चिकित्सक सत्येंद्र कुमार ने जिलाधिकारी समेत अन्य अधिकारियों को पत्र भेजकर परिसर को कब्जामुक्त कराने की मांग की है। चांदापुर में आयुर्वेदिक चिकित्सालय में रोजाना 30-40 लोग इलाज कराने आते हैं। परिसर में गांव के कुछ लोग अपने जानवर बांध रहे हैं। वहीं पर गोबर और कूड़ा फेंक देते हैं।
डॉ. सत्येंद्र कुमार ने बताया कि कब्जेदारों को मना करने पर वे लोग विवाद करने पर उतारू हो जाते हैं। परिसर में बंधे जानवरों के कारण वहां पर आने वाले मरीजों को दिक्कत का सामना करना पड़ता है। इससे पहले भी उच्च अधिकारियों को पत्र के माध्यम से अवगत कराया जा चुका है मगर किसी वजह से कार्रवाई नहीं हो सकी। इस वजह से कब्जा करने वालों के हौसले बुलंद हैं। चिकित्सालय की ओर से उच्च अधिकारियों को पत्र लिखकर कार्रवाई करने की मांग की गई है ताकि आने-जाने वाले मरीजों को दिक्कत का सामना न करना पड़े।
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मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में बताया है कि नगर के तालाबों को भू-माफिया पाट रहे हैं। कस्बे के बीच एक तालाब में में कई मोहल्लों का गंदा पानी जाता है। इस पर अवैध कब्जे हैं। कई बार शिकायत करने पर भी किसी अधिकारी ने मुआयना करने की जरूरत नहीं समझी है। एक तालाब पर निर्माण कार्य चल रहा है। राजभवन के प्रबंधक गंगाराम मिश्रा ने 11 मई को मामले की शिकायत एसडीएम से की, लेकिन संज्ञान नहीं लिया।
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तालाबों पर अवैध कब्जों से लोगों में रोष है। लोगों ने अमृत सरोवर योजना के तहत गाटा संख्या 735 पर तालाब की पैमाइश कर सौंदर्यीकरण कराने की मांग भी की है। पत्र पर नगर पालिका के पूर्व सदस्य आलोक मिश्रा, सतीश सारस्वत, शिवम मिश्रा, जयकृष्ण वाजपेयी, अमर शुक्ला, अतुल कुमार, राजेंद्र कुमार, धीरज मिश्रा, शरदचंद्र मिश्रा आदि के हस्ताक्षर हैं।
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नोटिस देकर चुप बैठ गई नगर पालिका
एक तालाब पर अवैध कब्जे के मामले में आलोक कुमार की शिकायत पर नगर पालिका ने 30 जून 2021 को अवैध कब्जेदार को नोटिस देकर तालाब भूमि पर कार्य को बंद करने और तालाब पर अवैध को 15 दिन में हटाने का नोटिस दिया था। लेकिन आज तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
आयुर्वेदिक चिकित्सालय परिसर में बांध रहे जानवर, डाल रहे कूड़ा
ददरौल। गांव चांदपुर के आयुर्वेदिक चिकित्सालय परिसर में कुछ लोग कूड़ा डाल रहे हैं और जानवर बांध रहे हैं। अस्पताल के चिकित्सक सत्येंद्र कुमार ने जिलाधिकारी समेत अन्य अधिकारियों को पत्र भेजकर परिसर को कब्जामुक्त कराने की मांग की है। चांदापुर में आयुर्वेदिक चिकित्सालय में रोजाना 30-40 लोग इलाज कराने आते हैं। परिसर में गांव के कुछ लोग अपने जानवर बांध रहे हैं। वहीं पर गोबर और कूड़ा फेंक देते हैं।
डॉ. सत्येंद्र कुमार ने बताया कि कब्जेदारों को मना करने पर वे लोग विवाद करने पर उतारू हो जाते हैं। परिसर में बंधे जानवरों के कारण वहां पर आने वाले मरीजों को दिक्कत का सामना करना पड़ता है। इससे पहले भी उच्च अधिकारियों को पत्र के माध्यम से अवगत कराया जा चुका है मगर किसी वजह से कार्रवाई नहीं हो सकी। इस वजह से कब्जा करने वालों के हौसले बुलंद हैं। चिकित्सालय की ओर से उच्च अधिकारियों को पत्र लिखकर कार्रवाई करने की मांग की गई है ताकि आने-जाने वाले मरीजों को दिक्कत का सामना न करना पड़े।