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‘बसपा को सत्ता की चाबी दिलाएगा ब्राह्मणों और अनुसूचित जाति के लोगों का भाईचारा’
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शाहजहांपुर में बुधवार को बहुजन समाज पार्टी की ओर से आयोजित विचार गोष्ठी को मुख्य अतिथि पद से संबो
- फोटो : SHAHJAHANPUR
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शाहजहांपुर। बहुजन समाज पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव एवं राज्यसभा सदस्य सतीश चंद्र मिश्रा ने कहा है कि वर्ष 2007 की तरह एक बार फिर ब्राह्मणों और अनुसूचित जाति के लोगों का भाईचारा अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव में बसपा को सत्ता की चाबी दिलाएगा। वह बुधवार को गर्रा फाटक स्थित एक मैरिज लॉन के सभागार मेें पार्टी की ओर से प्रबुद्ध वर्ग के सम्मान, सुरक्षा और तरक्की के लिए आयोजित विचार गोष्ठी को संबोधित कर रहे थे।
सतीश चंद्र मिश्रा ने सूबे की सत्ता पर काबिज वर्तमान भाजपा सरकार और पूर्ववर्ती सपा सरकार पर तीखे प्रहार करते हुए कहा कि इन दोनों पार्टियों के शासन काल में ब्राह्मणों और अनुसूचित जाति के लोगों की न केवल घोर उपेक्षा हुई, उनका कदम-कदम पर शोषण और उत्पीड़न किया गया। सपा की तरह भाजपा भी इन दोनों वर्गों का अहित करने पर तुली है। प्रदेश में पिछले साढ़े चार साल से शासन नहीं, कुशासन चल रहा है। हर दो घंटे में रेप की घटनाएं हो रही हैं। ब्राह्मणों और अनुसूचित जाति के लोगों की बेटियों को ठीक उसी तरह भयभीत किया जा रहा है, जैसे सपा सरकार ब्राह्मणों और अनुसूचित जाति के लोगों को अपना दुश्मन मानकर उत्पीड़न करती थी।
बसपा नेता ने कहा कि सपा की सरकार को वर्ष 2007 में ब्राह्मणों ने पार्टी के साथ एकजुट होकर उखाड़ फेंका था, लेकिन बाद में ब्राह्मण अन्य पार्टियों में बंट गए। खुद को धर्म का ठेकेदार मानने वाली भाजपा को गुमान है कि ब्राह्मणों के पास उसका अन्य कोई विकल्प नहीं है, लेकिन अपने अपमान का बदला लेने के लिए ब्राह्मणों को फिर से एकजुट होकर भाईचारा को मजबूत बनाना होगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश में सरकार बनाने के लिए 20 प्रतिशत से अधिक वोट मिलना जरूरी है। इसलिए 16 फीसदी ब्राह्मण और 23 प्रतिशत अनुसूचित जाति के लोग एकजुट हो जाएं तो एक बार फिर बसपा के सत्ता में आने से प्रदेश में सुशासन कायम हो जाएगा और दोनों वर्ग भाजपा से अपमान का राजनीतिक बदला ले सकेंगे।
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सभा के बाद बसपा के राष्ट्रीय महासचिव लखनऊ चले गए।
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बसपाइयों को सोशल इंजीनियरिंग के फायदे गिना गए मिश्रा
शाहजहांपुर। ब्राह्मण वोटों के सहारे अगले साल विधानसभा चुनाव की वैतरणी पार करने की कोशिश में जुटी बसपा के राष्ट्रीय महासचिव सतीश चंद्र मिश्रा बुधवार को यहां आकर कार्यकर्ताओं को सोशल इंजीयिरिंग वाले फार्मूले के तहत बसपाइयों को ब्राह्मणों के साथ गठजोड़ करने के तमाम राजनीतिक फायदे गिना गए।
कहने को वह गर्रा फाटक स्थित मैरिज लान परिसर में शहर विधानसभा क्षेत्र से पार्टी टिकट के दावेदार सर्वेश चंद्र मिश्र धांधू की ओर से आयोजित ब्राह्मणों के सम्मेलन को संबोधित करने आए थे, लेकिन आयोजन को जातिवादी ठप्पे से बचाने के लिए उसे बसपा नेतृत्व ने प्रबुद्ध जनों के हितार्थ आयोजित विचार गोष्ठी का कलेवर दिया।
करीब 45 मिनट के संबोधन में उन्होंने सपा और भाजपा राज में ब्राह्मणों और अनुसूचित जाति के लोगों को हुए कटु अनुभवों से जुड़ी कई घटनाओं का उल्लेख करते हुए दोनों वर्गों की दुखती रगों को छुआ। कई बार उनका तीर निशाने पर लगा और हर बार सभागार हाथी नहीं गणेश है, ब्रह्मा विष्णु महेश है और ब्राह्मण शंख बजाएगा, हाथी बढ़ता जाएगा जैसे 14 साल पुराने नारों से गूंज उठा।
कार्यक्रम में बसपाइयों समेत काफी संख्या में ब्राह्मणों और पांडित्य कर्मकांड कराने वाले पुजारियों-पुरोहितों का जमावड़ा देख गदगद हुए बसपा महासचिव ने कहा कि आप सभी ब्राह्मणों के बूते 2007 में सरकार बनी और पुराने इतिहास को फिर से दोहराने के लिए जरूरी है कि इस समाज के लोग कान्यकुब्ज, सनाढ्य, सरयूपारीण जैसे खानों में बंटने के बजाय एकजुट हों।
ब्राह्मण समाज के लोगों ने हर बार उनकी बात का समर्थन करने के लिए शंख और घंटे बजाए। राज्यसभा सदस्य ने कहा कि ब्राह्मण बंटने के बजाय एकजुट होकर संख्या के आधार पर टिकट मांगेगें तो फिर से वर्ष 2007 की तरह शक्ति बनकर उभरेंगे। उन्होंने पार्टी की भाईचारा कमेटियों के पदाधिकारियों को भी ब्राह्मणों को आगे लाकर चुनाव की तैयारी में जुटने के निर्देश दिए। बाद में पत्रकारों से वार्ता करते हुए उन्होंने कहा कि ब्राह्मणों के सहयोग से अगले साल फिर बसपा प्रदेश की जनता को स्वच्छ प्रशासन देने जा रही है।
सेंट्रल बार एसोसिएशन के पूर्व जिलाध्यक्ष बांके बिहारी मिश्र की अध्यक्षता और जिला महासचिव रामरक्ष पाल व पूर्व लोकसभा प्रत्याशी अमर चंद्र जौहरी के संयुक्त संचालन में हुए कार्यक्रम मेें प्रदेश के पूर्व कैबिनेट मंत्री नकुल दुबे, बसपा जिलाध्यक्ष जदुवीर गौतम, बरेली मंडल के सेक्टर प्रभारी रामलड़ैते कनौजिया, विनय पांडेय, सर्वेश मिश्रा धांधू, भानु प्रताप मिश्रा, अखिलेश मिश्रा, रामकुमार मौर्य, राधेश्याम भारती, अमित वाल्मीकि, तिलहर के पूर्व ब्लाक प्रमुख अभिनव शर्मा वीरू, गौरव सागर, विशेष गौतम आदि मौजूद रहे।
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सभागार के बाहर कुर्सियां डालकर लगानी पड़ी एलईडी
सभागार दोपहर दो बजे तक खचाखच भर गया। गैलरी को छोड़कर पीछे तक और बालकनी की सीटें भर जाने पर आयोजकों को सभागार के बाहर हाल जैसे बरामदे मेें सैकड़ों कुर्सियां डालकर वहां बड़ी एलईडी स्क्रीन लगानी पड़ी। संवाद
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सतीश चंद्र मिश्रा ने सूबे की सत्ता पर काबिज वर्तमान भाजपा सरकार और पूर्ववर्ती सपा सरकार पर तीखे प्रहार करते हुए कहा कि इन दोनों पार्टियों के शासन काल में ब्राह्मणों और अनुसूचित जाति के लोगों की न केवल घोर उपेक्षा हुई, उनका कदम-कदम पर शोषण और उत्पीड़न किया गया। सपा की तरह भाजपा भी इन दोनों वर्गों का अहित करने पर तुली है। प्रदेश में पिछले साढ़े चार साल से शासन नहीं, कुशासन चल रहा है। हर दो घंटे में रेप की घटनाएं हो रही हैं। ब्राह्मणों और अनुसूचित जाति के लोगों की बेटियों को ठीक उसी तरह भयभीत किया जा रहा है, जैसे सपा सरकार ब्राह्मणों और अनुसूचित जाति के लोगों को अपना दुश्मन मानकर उत्पीड़न करती थी।
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बसपा नेता ने कहा कि सपा की सरकार को वर्ष 2007 में ब्राह्मणों ने पार्टी के साथ एकजुट होकर उखाड़ फेंका था, लेकिन बाद में ब्राह्मण अन्य पार्टियों में बंट गए। खुद को धर्म का ठेकेदार मानने वाली भाजपा को गुमान है कि ब्राह्मणों के पास उसका अन्य कोई विकल्प नहीं है, लेकिन अपने अपमान का बदला लेने के लिए ब्राह्मणों को फिर से एकजुट होकर भाईचारा को मजबूत बनाना होगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश में सरकार बनाने के लिए 20 प्रतिशत से अधिक वोट मिलना जरूरी है। इसलिए 16 फीसदी ब्राह्मण और 23 प्रतिशत अनुसूचित जाति के लोग एकजुट हो जाएं तो एक बार फिर बसपा के सत्ता में आने से प्रदेश में सुशासन कायम हो जाएगा और दोनों वर्ग भाजपा से अपमान का राजनीतिक बदला ले सकेंगे।
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सभा के बाद बसपा के राष्ट्रीय महासचिव लखनऊ चले गए।
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बसपाइयों को सोशल इंजीनियरिंग के फायदे गिना गए मिश्रा
शाहजहांपुर। ब्राह्मण वोटों के सहारे अगले साल विधानसभा चुनाव की वैतरणी पार करने की कोशिश में जुटी बसपा के राष्ट्रीय महासचिव सतीश चंद्र मिश्रा बुधवार को यहां आकर कार्यकर्ताओं को सोशल इंजीयिरिंग वाले फार्मूले के तहत बसपाइयों को ब्राह्मणों के साथ गठजोड़ करने के तमाम राजनीतिक फायदे गिना गए।
कहने को वह गर्रा फाटक स्थित मैरिज लान परिसर में शहर विधानसभा क्षेत्र से पार्टी टिकट के दावेदार सर्वेश चंद्र मिश्र धांधू की ओर से आयोजित ब्राह्मणों के सम्मेलन को संबोधित करने आए थे, लेकिन आयोजन को जातिवादी ठप्पे से बचाने के लिए उसे बसपा नेतृत्व ने प्रबुद्ध जनों के हितार्थ आयोजित विचार गोष्ठी का कलेवर दिया।
करीब 45 मिनट के संबोधन में उन्होंने सपा और भाजपा राज में ब्राह्मणों और अनुसूचित जाति के लोगों को हुए कटु अनुभवों से जुड़ी कई घटनाओं का उल्लेख करते हुए दोनों वर्गों की दुखती रगों को छुआ। कई बार उनका तीर निशाने पर लगा और हर बार सभागार हाथी नहीं गणेश है, ब्रह्मा विष्णु महेश है और ब्राह्मण शंख बजाएगा, हाथी बढ़ता जाएगा जैसे 14 साल पुराने नारों से गूंज उठा।
कार्यक्रम में बसपाइयों समेत काफी संख्या में ब्राह्मणों और पांडित्य कर्मकांड कराने वाले पुजारियों-पुरोहितों का जमावड़ा देख गदगद हुए बसपा महासचिव ने कहा कि आप सभी ब्राह्मणों के बूते 2007 में सरकार बनी और पुराने इतिहास को फिर से दोहराने के लिए जरूरी है कि इस समाज के लोग कान्यकुब्ज, सनाढ्य, सरयूपारीण जैसे खानों में बंटने के बजाय एकजुट हों।
ब्राह्मण समाज के लोगों ने हर बार उनकी बात का समर्थन करने के लिए शंख और घंटे बजाए। राज्यसभा सदस्य ने कहा कि ब्राह्मण बंटने के बजाय एकजुट होकर संख्या के आधार पर टिकट मांगेगें तो फिर से वर्ष 2007 की तरह शक्ति बनकर उभरेंगे। उन्होंने पार्टी की भाईचारा कमेटियों के पदाधिकारियों को भी ब्राह्मणों को आगे लाकर चुनाव की तैयारी में जुटने के निर्देश दिए। बाद में पत्रकारों से वार्ता करते हुए उन्होंने कहा कि ब्राह्मणों के सहयोग से अगले साल फिर बसपा प्रदेश की जनता को स्वच्छ प्रशासन देने जा रही है।
सेंट्रल बार एसोसिएशन के पूर्व जिलाध्यक्ष बांके बिहारी मिश्र की अध्यक्षता और जिला महासचिव रामरक्ष पाल व पूर्व लोकसभा प्रत्याशी अमर चंद्र जौहरी के संयुक्त संचालन में हुए कार्यक्रम मेें प्रदेश के पूर्व कैबिनेट मंत्री नकुल दुबे, बसपा जिलाध्यक्ष जदुवीर गौतम, बरेली मंडल के सेक्टर प्रभारी रामलड़ैते कनौजिया, विनय पांडेय, सर्वेश मिश्रा धांधू, भानु प्रताप मिश्रा, अखिलेश मिश्रा, रामकुमार मौर्य, राधेश्याम भारती, अमित वाल्मीकि, तिलहर के पूर्व ब्लाक प्रमुख अभिनव शर्मा वीरू, गौरव सागर, विशेष गौतम आदि मौजूद रहे।
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सभागार के बाहर कुर्सियां डालकर लगानी पड़ी एलईडी
सभागार दोपहर दो बजे तक खचाखच भर गया। गैलरी को छोड़कर पीछे तक और बालकनी की सीटें भर जाने पर आयोजकों को सभागार के बाहर हाल जैसे बरामदे मेें सैकड़ों कुर्सियां डालकर वहां बड़ी एलईडी स्क्रीन लगानी पड़ी। संवाद

विचार गोष्ठी में मौजूद श्रोता। संवाद- फोटो : SHAHJAHANPUR