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खुलासाः प्रेमिका को साथ ले जाने आया था आशीष, इनकार करने पर की हत्या, फिर खुद को मारी गोली
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शाहजहांपुर। पुलिस की गिरफ्त में आशीष की प्रेमिका बंटी का पिता। संवाद
- फोटो : SHAHJAHANPUR
जैतीपुर (शाहजहांपुर)। गढ़ियारंगीन थाना क्षेत्र के गांव नौगवां नरोत्तम में आशीष और बंटी की गोली लगने से मौत के मामले का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। पुलिस की जांच में सामने आया है कि आशीष अपनी प्रेमिका बंटी को साथ ले जाने के लिए उसके घर आया था। इनकार करने पर आशीष ने पहले बंटी को गोली मारी, फिर खुद को गोली मारकर जान दे दी। साक्ष्य मिटाने के आरोप में पुलिस ने बंटी के पिता किशनपाल को गिरफ्तार कर लिया है।
17 सितंबर की सुबह गांव में पीपल के पेड़ नीचे चबूतरे पर आशीष (25) का गोली लगा शव उसके पिता सुखपाल ने देखा था। सूचना पर पहुंची पुलिस को जानकारी हुई कि थोड़ी दूरी पर स्थित किशनपाल के मकान की दूसरी मंजिल पर उसकी बेटी बंटी (22) का शव पड़ा हुआ है। पुलिस ने दोनों शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिए थे। इस संबंध में किशनपाल सिंह उर्फ बाबा ने मृतक आशीष के खिलाफ अपनी बेटी बंटी की हत्या का आरोप लगाकर रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
वहीं आशीष के पिता सुखपाल सिंह ने किशनपाल सिंह, बंटी के भाई अमन, पवन, पूर्व प्रधान सुरेश और नरवीर सिंह के खिलाफ आशीष की हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पुलिस ने संकलित साक्ष्यों और सर्विलांस की मदद से घटना का खुलासा किया है। एसपी ग्रामीण संजीव कुमार वाजपेयी के मुताबिक किशनपाल ने बताया कि उसकी बेटी बंटी और आशीष के बीच पिछले पांच-छह साल से प्रेम प्रसंग चल रहा था।
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आशीष शादीशुदा होने के बावजूद बंटी को अपने साथ ले जाना चाहता था। इसी के चलते वह 16 सितंबर की देर रात उसके घर आ गया। उसने बंटी से अपने साथ चलने के लिए कहा, लेकिन उसने इनकार कर दिया। इससे खफा होकर आशीष ने बंटी के सीने पर तमंचे से गोली मार दी। बाद में आशीष ने भी अपने सीने पर तमंचे से गोली मारकर जान दे दी।
गोली चलने की आवाज सुनकर जब वह दूसरी मंजिल पर गया तो उसने देखा कि बंटी और आशीष के शव पड़े हुए हैं। यह देखकर वह डर गया। उसे लगा कि इस मामले में वह और उसका परिवार फंस जाएगा। दहशत में उसने बिना किसी को कुछ बताए आशीष की लाश उठाकर घर से थोड़ी दूर पीपल के पेड़ के नीचे डाल दी। वारदात में इस्तेमाल किए तमंचे को भी छुपा दिया। आशीष के शव को फेंकने में उसके कुर्ते पर भी खून लग गया था, इसलिए कुर्ते को भी छुपा दिया। उसने आशीष और बंटी की हत्या नहीं की थी।
भूसे के ढेर से बरामद किया खून लगा कुर्ता और तमंचा
पुलिस ने किशनपाल सिंह उर्फ बाबा को शुक्रवार को गांव से गिरफ्तार कर लिया। उसकी निशानदेही पर वारदात में इस्तेमाल तमंचा और उसमें फंसा गोली का खोखा बरामद कर लिया है। तमंचा और कुर्ता खेत में बने भूसे के ढेर से बरामद किया गया है। किशनपाल को पुलिस ने वास्तविक तथ्यों को छुपाकर घटनास्थल में फेरबदल करने और वास्तविक साक्ष्य का विलोपन कर मिथ्या साक्ष्य गढ़ने का आरोपी पाया गया है। बरामद कुर्ते और तमंचे को फोरेंसिक लैब, लखनऊ भेजा गया है।
पुलिस के खुलासे से संतुष्ट नहीं परिजन
आशीष की बहन काजल और कोमल ने बताया कि उनके भाई की हत्या हुई है, लेकिन पुलिस उसी को हत्यारा बताकर आत्महत्या करने की बात कह रही है। उनके घर में सिर्फ छोटा भाई अमन है। पिता सुखपाल बीमार रहते हैं। उन्हें समझ नहीं आ रहा है कि क्या किया जाए। पुलिस को सही तथ्यों की जानकारी कर जांच करनी चाहिए। बाकी न्याय ईश्वर करेगा।
युवक और युवती की मौत का खुलासा कर साक्ष्यों से छेड़छाड़ करने पर पिता किशनपाल को गिरफ्तार कर लिया गया है।
- संजीव कुमार वाजपेयी, एसपी ग्रामीण।
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17 सितंबर की सुबह गांव में पीपल के पेड़ नीचे चबूतरे पर आशीष (25) का गोली लगा शव उसके पिता सुखपाल ने देखा था। सूचना पर पहुंची पुलिस को जानकारी हुई कि थोड़ी दूरी पर स्थित किशनपाल के मकान की दूसरी मंजिल पर उसकी बेटी बंटी (22) का शव पड़ा हुआ है। पुलिस ने दोनों शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिए थे। इस संबंध में किशनपाल सिंह उर्फ बाबा ने मृतक आशीष के खिलाफ अपनी बेटी बंटी की हत्या का आरोप लगाकर रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
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वहीं आशीष के पिता सुखपाल सिंह ने किशनपाल सिंह, बंटी के भाई अमन, पवन, पूर्व प्रधान सुरेश और नरवीर सिंह के खिलाफ आशीष की हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पुलिस ने संकलित साक्ष्यों और सर्विलांस की मदद से घटना का खुलासा किया है। एसपी ग्रामीण संजीव कुमार वाजपेयी के मुताबिक किशनपाल ने बताया कि उसकी बेटी बंटी और आशीष के बीच पिछले पांच-छह साल से प्रेम प्रसंग चल रहा था।
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आशीष शादीशुदा होने के बावजूद बंटी को अपने साथ ले जाना चाहता था। इसी के चलते वह 16 सितंबर की देर रात उसके घर आ गया। उसने बंटी से अपने साथ चलने के लिए कहा, लेकिन उसने इनकार कर दिया। इससे खफा होकर आशीष ने बंटी के सीने पर तमंचे से गोली मार दी। बाद में आशीष ने भी अपने सीने पर तमंचे से गोली मारकर जान दे दी।
गोली चलने की आवाज सुनकर जब वह दूसरी मंजिल पर गया तो उसने देखा कि बंटी और आशीष के शव पड़े हुए हैं। यह देखकर वह डर गया। उसे लगा कि इस मामले में वह और उसका परिवार फंस जाएगा। दहशत में उसने बिना किसी को कुछ बताए आशीष की लाश उठाकर घर से थोड़ी दूर पीपल के पेड़ के नीचे डाल दी। वारदात में इस्तेमाल किए तमंचे को भी छुपा दिया। आशीष के शव को फेंकने में उसके कुर्ते पर भी खून लग गया था, इसलिए कुर्ते को भी छुपा दिया। उसने आशीष और बंटी की हत्या नहीं की थी।
भूसे के ढेर से बरामद किया खून लगा कुर्ता और तमंचा
पुलिस ने किशनपाल सिंह उर्फ बाबा को शुक्रवार को गांव से गिरफ्तार कर लिया। उसकी निशानदेही पर वारदात में इस्तेमाल तमंचा और उसमें फंसा गोली का खोखा बरामद कर लिया है। तमंचा और कुर्ता खेत में बने भूसे के ढेर से बरामद किया गया है। किशनपाल को पुलिस ने वास्तविक तथ्यों को छुपाकर घटनास्थल में फेरबदल करने और वास्तविक साक्ष्य का विलोपन कर मिथ्या साक्ष्य गढ़ने का आरोपी पाया गया है। बरामद कुर्ते और तमंचे को फोरेंसिक लैब, लखनऊ भेजा गया है।
पुलिस के खुलासे से संतुष्ट नहीं परिजन
आशीष की बहन काजल और कोमल ने बताया कि उनके भाई की हत्या हुई है, लेकिन पुलिस उसी को हत्यारा बताकर आत्महत्या करने की बात कह रही है। उनके घर में सिर्फ छोटा भाई अमन है। पिता सुखपाल बीमार रहते हैं। उन्हें समझ नहीं आ रहा है कि क्या किया जाए। पुलिस को सही तथ्यों की जानकारी कर जांच करनी चाहिए। बाकी न्याय ईश्वर करेगा।
युवक और युवती की मौत का खुलासा कर साक्ष्यों से छेड़छाड़ करने पर पिता किशनपाल को गिरफ्तार कर लिया गया है।
- संजीव कुमार वाजपेयी, एसपी ग्रामीण।