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Shahjahanpur News: बच्चों को घेर रहा निमोनिया... 15 में सिर्फ एक सीएचसी पर विशेषज्ञ

Thu, 14 Dec 2023 01:09 AM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर Updated Thu, 14 Dec 2023 01:09 AM IST
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Pneumonia is engulfing children... only one in 15 is an expert at CHC
राजकीय मेडिकल कॉलेज के बच्चा वार्ड में भर्ती बच्चे। संवाद
शाहजहांपुर। सर्दी बढ़ने के साथ ही जिलेभर में निमोनिया से पीड़ित बच्चों की संख्या में अचानक इजाफा हो गया। राजकीय मेडिकल कॉलेज में ही रोजाना 12 पीड़ित बच्चे पहुंच रहे हैं लेकिन जिलेभर की 15 सीएचसी में मात्र एक पुवायां में ही बाल रोग विशेषज्ञ की तैनाती है। बाकी जगह विशेषज्ञों के पद रिक्त हैं। ऐसे में सरकारी अस्पतालों में बेहतर इलाज का दावा हवा-हवाई साबित हो रहा है।
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स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक निमोनिया बैक्टीरियल इंफेक्शन से होता है। नाक और मुंह के जरिये वायु मार्ग से बैक्टीरिया फेफड़ों तक पहुंचते हैं जो शरीर पर असर डालने लगते हैं। ऐसे में सर्दी के मौसम में बच्चों का खास ख्याल रखने की जरूरत होती है। राजकीय मेडिकल कॉलेज में बुधवार को दो बच्चों की हालत गंभीर होने पर उन्हें भर्ती किया गया। इसी तरह निजी अस्पतालों में बाल रोग विशेषज्ञों के पास भी निमोनिया से पीड़ित बच्चों की संख्या बढ़ी हैं। वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. गौरव मिश्रा बताते हैं कि रोजाना ही आठ से दस बच्चे निमाेनिया से पीड़ित आ रहे हैं।
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बोल नहीं सकते नवजात, ऐसे करें पहचान
-विशेषज्ञ डॉ. गौरव मिश्रा के मुताबिक, सर्दी, खांसी, जुकाम और बुखार होने के साथ ही नवजात बच्चे की सांस तेज चलने लगती है। बच्चे की छाती पर गड्ढे पड़ने और कराहने के साथ सांस लेना, नाक के नथुने अधिक फूलना भी निमोनिया के लक्षण हैं। इसके अतिरिक्त अगर एक साल तक का बच्चा एक मिनट में 50 बार तक सांस ले तो सचेत होने की जरूरत है।
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हर सीएचसी पर होने चाहिए बाल रोग विशेषज्ञ
-जिले में 15 सीएचसी और 39 पीएचसी हैं। सिर्फ पुवायां सीएचसी में बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. एमके सिंह तैनात हैं। शेष स्वास्थ्य इकाइयों पर विशेषज्ञ तैनात नहीं है। जबकि, हर सीएचसी में एक बाल रोग विशेषज्ञ की नियुक्ति होनी चाहिए। ऐसे में मेडिकल कॉलेज में ही बच्चों को बेहतर इलाज मिल सकता है। यहां असिस्टेंट प्रोफेसर के साथ तीन वरिष्ठ डॉक्टरों की तैनाती है। सीएमओ डॉ. आरके गौतम ने बताया कि दो बाल रोग विशेषज्ञों का पिछले साल दूसरे जिले में तबादला कर दिया गया था।

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ये होते हैं लक्षण

-तेज बुखार, छाती में दर्द, मितली या उल्टी, दस्त, सांस लेने में कठिनाई, थकान और कमजोरी, खांसी आना।
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ये बरतें सावधानी
-घर के बड़े अगर वायरल संक्रमण से ग्रसित हैं तो बच्चों से दूरी बनाकर रखें।

-पहले बच्चे को जुकाम होता है फिर निमोनिया में तब्दील हो जाता है। इसलिए लक्षण प्रकट होते ही इलाज कराएं।
-सुबह और शाम की ठंडी हवा से बचें। रात में सोते समय बच्चों को रजाई ओढ़ाकर रखें।

-धूल, धुआं और परागकण से बच्चों को बचाएं, ये भी निमोनिया के कारक हैं।

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राजकीय मेडिकल कॉलेज में बढ़ने लगे मरीज
तिथि ओपीडी संख्या

09 दिसंबर 1109

11 दिसंबर 1211
12 दिसंबर 1340

13 दिसंबर 1250
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-सर्दी में निमोनिया के मरीज बढ़ने लगे हैं। बच्चों को लेकर विशेष सावधानी बरतनी आवश्यक है। लक्षण प्रकट होते ही समुचित इलाज कराएं। लापरवाही से स्थिति बिगड़ सकती है।
डॉ. गौरव मिश्रा, बाल रोग विशेषज्ञ
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