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पीएमओ ने तलब की जांच रिपोर्ट
ब्यूरो, अमर उजाला शाहजहांपुर
Updated Wed, 14 Dec 2016 11:33 PM IST
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पुत्र के जेल में होने के कारण वृद्ध का अंतिम संस्कार करने के लिए मृतक की पुत्री और दामाद ने शाहजहांपुर से लेकर पीलीभीत के डीएम तक कुछ घंटे की पैरोल देने की गुहार की, लेकिन कहीं से भी मदद नहीं मिल सकी। नतीजतन तीन दिन तक मृतक का शव घर में पड़ा रहने के बाद अंतिम संस्कार किया गया। इसके बाद अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए प्रधानमंत्री को भेजी गई शिकायत में अब पीएमओ ने सुनवाई की है। यूपी के मुख्य सचिव को जांच करके कार्रवाई करने के बाद रिपोर्ट भेजने के आदेश दिए गए हैं।
मामला पीलीभीत के सेहरामऊ उत्तरी थाना क्षेत्र के गांव कुर्रिया कलां का है। वर्ष 1999 में गांव में हुई एक हत्या में गांव के ही रामभजन के पुत्र गुड्डू सहित पांच लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। पुलिस ने सभी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। घटना के वक्त थाना सेहरामऊ उत्तरी शाहजहांपुर जिले से जुड़ा हुआ था, बाद में शाहजहांपुर से 94 गांवों को काटकर पीलीभीत जनपद से जोड़ दिया गया तो यह थाना क्षेत्र पीलीभीत जनपद से जुड़ गया। वर्ष 2013 में गुड्डू को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई तभी से वह जेल में बंद है। तीन नबंवर 16 गुड्डू के पिता रामभजन की बीमारी के चलते मौत हो गई। गुड्डू के अकेले पुत्र होने के कारण अंतिम संस्कार के लिए मृतक की पुत्री लक्ष्मी और दामाद खुटार के गांव नवदिया नवाजपुर निवासी अशोक कुमार ने शाहजहांपुर के डीएम को प्रार्थना पत्र देकर रामभजन का अंतिम संस्कार करने के लिए गुड्डू को पैरोल देने की मांग की। इस पर डीएम ने डीपीओ से जांच कर आख्या देने का आदेश दिया। डीपीओ ने डीएम को रिपोर्ट देते हुए बताया कि मृतक पीलीभीत जनपद का रहने वाला है, इसलिए पीलीभीत के जिलाधिकारी स्तर से ही सुनवाई हो सकती है। इसके बाद दोनों लोगों ने पीलीभीत के डीएम से गुहार की तो उन्होंने कहा कि आरोपी का मामला शाहजहांपुर से जुड़ा हुआ है, इसलिए वहीं से सुनवाई हो सकती है। इतना सब करने के दौरान तीन दिन तक मृतक का शव घर में पड़ा रहा। बाद में नाती के हाथ से अंतिम संस्कार कराया गया। सात नवंबर को अशोक कुमार ने मामले की शिकायत मुख्यमंत्री, मानवाधिकार आयोग के साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से की। पीएमओ के सेक्शन ऑफीसर समीर कुमार ने पत्र का संज्ञान लेते हुए यूपी के मुख्य सचिव को मामले की जांच कराकर कार्रवाई करने के बाद रिपोर्ट देने के आदेश दिए हैं। इस आदेश की एक प्रति अशोक कुमार को भेजी गई है।
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मामला पीलीभीत के सेहरामऊ उत्तरी थाना क्षेत्र के गांव कुर्रिया कलां का है। वर्ष 1999 में गांव में हुई एक हत्या में गांव के ही रामभजन के पुत्र गुड्डू सहित पांच लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। पुलिस ने सभी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। घटना के वक्त थाना सेहरामऊ उत्तरी शाहजहांपुर जिले से जुड़ा हुआ था, बाद में शाहजहांपुर से 94 गांवों को काटकर पीलीभीत जनपद से जोड़ दिया गया तो यह थाना क्षेत्र पीलीभीत जनपद से जुड़ गया। वर्ष 2013 में गुड्डू को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई तभी से वह जेल में बंद है। तीन नबंवर 16 गुड्डू के पिता रामभजन की बीमारी के चलते मौत हो गई। गुड्डू के अकेले पुत्र होने के कारण अंतिम संस्कार के लिए मृतक की पुत्री लक्ष्मी और दामाद खुटार के गांव नवदिया नवाजपुर निवासी अशोक कुमार ने शाहजहांपुर के डीएम को प्रार्थना पत्र देकर रामभजन का अंतिम संस्कार करने के लिए गुड्डू को पैरोल देने की मांग की। इस पर डीएम ने डीपीओ से जांच कर आख्या देने का आदेश दिया। डीपीओ ने डीएम को रिपोर्ट देते हुए बताया कि मृतक पीलीभीत जनपद का रहने वाला है, इसलिए पीलीभीत के जिलाधिकारी स्तर से ही सुनवाई हो सकती है। इसके बाद दोनों लोगों ने पीलीभीत के डीएम से गुहार की तो उन्होंने कहा कि आरोपी का मामला शाहजहांपुर से जुड़ा हुआ है, इसलिए वहीं से सुनवाई हो सकती है। इतना सब करने के दौरान तीन दिन तक मृतक का शव घर में पड़ा रहा। बाद में नाती के हाथ से अंतिम संस्कार कराया गया। सात नवंबर को अशोक कुमार ने मामले की शिकायत मुख्यमंत्री, मानवाधिकार आयोग के साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से की। पीएमओ के सेक्शन ऑफीसर समीर कुमार ने पत्र का संज्ञान लेते हुए यूपी के मुख्य सचिव को मामले की जांच कराकर कार्रवाई करने के बाद रिपोर्ट देने के आदेश दिए हैं। इस आदेश की एक प्रति अशोक कुमार को भेजी गई है।
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