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मंगलगीत की जगह मिल्किया में छाया मातम
अमर उजाला ब्यूरो शाहजहांपुर।
Updated Mon, 06 Mar 2017 11:52 PM IST
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सड़क हादसा
- फोटो : अमर उजाला
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सुनाई दे रहीं थी मृतक के घर वालों के रोने-बिलखने की आवाजें
मृतक महेश सिसौदिया बेटे का नामकरण संस्कार भी नहीं कर पाया
मिर्जापुर के गांव मिल्किया में महेश कुमार के घर बहू आने की खुशी में मंगलगीत की जगह सन्नाटा पसरा था। मदनापुर में अतिबरा मोड़ के पास हुए हादसे में मिल्किया गांव के दो और पड़ोसी गांव हरसीपुर के एक व्यक्ति की मौत से हर किसी की आंखें नम थीं। पोस्टमार्टम के बाद जब शव गांव ले जाए गए तो घर वालों में कोहराम मच गया। सन्नाटे के बीच केवल मृतकों के घर वालों के रोने-बिलखने की आवाजें ही सुनाई दे रहीं थीं।
हादसे में मरे मिल्किया निवासी 35 वर्षीय महेश सिसौदिया पुत्र धनपाल की पत्नी मोनी का रो-रोकर सबसे ज्यादा ही बुरा हाल था, क्योंकि उसके सामने दो मासूम बच्चों की परवरिश की जिम्मेदारी अकेले आ गई है। बड़ी बेटी कोमिल अभी दो साल की है और बेटे का जन्म बीस दिन पहले हुआ। 11 फरवरी को उसके नामकरण की तिथि निश्चित की गई थी, लेकिन इससे पहले ही हादसे में महेश की मौत हो गई। पत्नी मोना को संभालना मुश्किल हो रहा था। महेश चार भाइयों में बड़ा था, इसलिए उस पर परिवार की अधिक जिम्मेदारी थी। मां सुदामा और भाइयों के आंसू भी थम नहीं रहे थे।
इसी गांव के 45 वर्षीय अमरपाल की मौत ने परिवार को झकझोर कर रख दिया। दस वर्ष की बेटी मंजीता और आठ वर्षीय बेटा सोनू का रो-रोकर बुरा हाल है। अमरपाल के तीन बेटों और दो बेटियों की शादी हो चुकी है। बिलख रहे बच्चों और पत्नी नन्ही देवी को लोग समझाने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन उनके आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। पड़ोस के गांव हरसीपुर निवासी 42 वर्षीय नरेंद्रपाल सिंह उर्फ भूरे की शादी नहीं हुई थी। उसकी दो बहनों की शादी हो चुकी है। परिवार में अब छोटा भाई धर्मेंद्र ही माता उर्मिला देवी-पिता छेदा सिंह की देखभाल के लिए बचा है।
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मृतक महेश सिसौदिया बेटे का नामकरण संस्कार भी नहीं कर पाया
मिर्जापुर के गांव मिल्किया में महेश कुमार के घर बहू आने की खुशी में मंगलगीत की जगह सन्नाटा पसरा था। मदनापुर में अतिबरा मोड़ के पास हुए हादसे में मिल्किया गांव के दो और पड़ोसी गांव हरसीपुर के एक व्यक्ति की मौत से हर किसी की आंखें नम थीं। पोस्टमार्टम के बाद जब शव गांव ले जाए गए तो घर वालों में कोहराम मच गया। सन्नाटे के बीच केवल मृतकों के घर वालों के रोने-बिलखने की आवाजें ही सुनाई दे रहीं थीं।
हादसे में मरे मिल्किया निवासी 35 वर्षीय महेश सिसौदिया पुत्र धनपाल की पत्नी मोनी का रो-रोकर सबसे ज्यादा ही बुरा हाल था, क्योंकि उसके सामने दो मासूम बच्चों की परवरिश की जिम्मेदारी अकेले आ गई है। बड़ी बेटी कोमिल अभी दो साल की है और बेटे का जन्म बीस दिन पहले हुआ। 11 फरवरी को उसके नामकरण की तिथि निश्चित की गई थी, लेकिन इससे पहले ही हादसे में महेश की मौत हो गई। पत्नी मोना को संभालना मुश्किल हो रहा था। महेश चार भाइयों में बड़ा था, इसलिए उस पर परिवार की अधिक जिम्मेदारी थी। मां सुदामा और भाइयों के आंसू भी थम नहीं रहे थे।
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इसी गांव के 45 वर्षीय अमरपाल की मौत ने परिवार को झकझोर कर रख दिया। दस वर्ष की बेटी मंजीता और आठ वर्षीय बेटा सोनू का रो-रोकर बुरा हाल है। अमरपाल के तीन बेटों और दो बेटियों की शादी हो चुकी है। बिलख रहे बच्चों और पत्नी नन्ही देवी को लोग समझाने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन उनके आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। पड़ोस के गांव हरसीपुर निवासी 42 वर्षीय नरेंद्रपाल सिंह उर्फ भूरे की शादी नहीं हुई थी। उसकी दो बहनों की शादी हो चुकी है। परिवार में अब छोटा भाई धर्मेंद्र ही माता उर्मिला देवी-पिता छेदा सिंह की देखभाल के लिए बचा है।
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