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Shahjahanpur News: हैदलपुर-बोझी में बने पैंटून पुल के पटले ढीले, हादसे का खतरा
Sun, 05 May 2024 02:30 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
Updated Sun, 05 May 2024 02:30 AM IST
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हैलदुपर और बोझी में बने पुल से गुजरता ओवरलोड ट्रैक्टर-ट्रॉली। संवाद
परौर। हैदलपुर और बोझी के पास रामगंगा नदी पर बनाए गए दोनों पैंटून पुल से अधिक भार क्षमता वाहन गुजरने से पटले ढीले हो गए हैं। इससे हादसे का खतरा मंडरा रहा है। कई बार इन पटलों के बीच कारों के पहिये फंस जाते हैं।
लोक निर्माण विभाग ने अक्तूबर में हैदलपुर व बोझी के पास दो पैंटून पुलों का निर्माण कराया था। दोनों पैंटून पुल के बीच आठ किलोमीटर की दूरी है। इन पुल की एप्रोच रोड को भी ठीक नहीं किया गया। मिट्टी और रेत में अक्सर वाहन फंस जाते हैं। पुलों की क्षमता पांच टन की है। इससे ज्यादा भार के वाहन रोके जाने के लिए दोनों तरफ हाइटगेज लगाए गए थे, लेकिन बड़े वाहनों के चालकों ने इनको तोड़ दिया। इसके बाद क्षमता से अधिक वाहन पैंटून पुल से गुजरने लगे। इस वजह से पुल अब खस्ताहाल हो गया है।
काफी दिनों से मरम्मत नहीं होने से दोनों पुल तिरछे भी हो गए हैं। वाहन गुजरते समय पटले तेज आवाज करते हैं। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि लोक निर्माण विभाग पुल की मरम्मत पर ध्यान नहीं दे रहा है। आए दिन वाहन पुल में फंस जाते हैं। इस वजह से राहगीरों को काफी परेशानी होती है।
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करीब पांच हजार वाहन रोज गुजरते हैं
क्षेत्र के लोगों के मुताबिक दोनों पुलों से एक दिन में पांच हजार वाहन गुजरते हैं। बदायूं से आने वाले वाहन पुलों से गुजरकर बरेली-फर्रुखाबाद स्टेट हाईवे पहुंच जाते हैं। पैंटून पुलों से मदनापुर की दूरी 19 किमी है और इतनी दूरी जलालाबाद की है। बदायूं से आने वाले वाहन भी पुल से होते हुए जलालाबाद जाते हैं।
दोनों मार्गों पर करीब 36 से अधिक गांव आते हैं। पुल के नहीं होने पर राहगीर कलान, मिर्जापुर, फर्रुखाबाद के अमृतपुर होते हुए अल्हागंज से जलालाबाद पहुंचते हैं। यह दूरी करीब 65 किमी पड़ती है। 15 जून के बाद पैंटून पुल हटा दिए जाते हैं।
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कई बार उठाई आवाज नहीं हुई सुनवाई
स्थानीय नागरिक हरिश्चंद्र सिंह ने बताया कि दोनों पैंटून पुलों की मरम्मत कराए जाने व रास्ता सही करने की मांग जिला पंचायत सदस्य हसन शाह के माध्यम से वह कई बार जिला पंचायत की बैठकों में उठा चुके हैं। इस पर ठोस कार्रवाई अमल में नहीं लाई गई।
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पैंटून पुल की क्षमता पांच टन के वाहन की है। लोगों ने हाईटगेज तोड़ दिए हैं। इससे अधिक क्षमता के वाहन भी गुजरते हैं। इसी वजह से पुल की स्थिति खराब हो जाती है। पहले भी कई बार मरम्मत कराई गई है। फिर से मरम्मत कराई जा रही है। सुरक्षा का कोई इंतजाम नहीं किया गया है।
- रथिन सिन्हा, पीडब्ल्यूडी एक्सईएन
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लोक निर्माण विभाग ने अक्तूबर में हैदलपुर व बोझी के पास दो पैंटून पुलों का निर्माण कराया था। दोनों पैंटून पुल के बीच आठ किलोमीटर की दूरी है। इन पुल की एप्रोच रोड को भी ठीक नहीं किया गया। मिट्टी और रेत में अक्सर वाहन फंस जाते हैं। पुलों की क्षमता पांच टन की है। इससे ज्यादा भार के वाहन रोके जाने के लिए दोनों तरफ हाइटगेज लगाए गए थे, लेकिन बड़े वाहनों के चालकों ने इनको तोड़ दिया। इसके बाद क्षमता से अधिक वाहन पैंटून पुल से गुजरने लगे। इस वजह से पुल अब खस्ताहाल हो गया है।
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काफी दिनों से मरम्मत नहीं होने से दोनों पुल तिरछे भी हो गए हैं। वाहन गुजरते समय पटले तेज आवाज करते हैं। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि लोक निर्माण विभाग पुल की मरम्मत पर ध्यान नहीं दे रहा है। आए दिन वाहन पुल में फंस जाते हैं। इस वजह से राहगीरों को काफी परेशानी होती है।
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करीब पांच हजार वाहन रोज गुजरते हैं
क्षेत्र के लोगों के मुताबिक दोनों पुलों से एक दिन में पांच हजार वाहन गुजरते हैं। बदायूं से आने वाले वाहन पुलों से गुजरकर बरेली-फर्रुखाबाद स्टेट हाईवे पहुंच जाते हैं। पैंटून पुलों से मदनापुर की दूरी 19 किमी है और इतनी दूरी जलालाबाद की है। बदायूं से आने वाले वाहन भी पुल से होते हुए जलालाबाद जाते हैं।
दोनों मार्गों पर करीब 36 से अधिक गांव आते हैं। पुल के नहीं होने पर राहगीर कलान, मिर्जापुर, फर्रुखाबाद के अमृतपुर होते हुए अल्हागंज से जलालाबाद पहुंचते हैं। यह दूरी करीब 65 किमी पड़ती है। 15 जून के बाद पैंटून पुल हटा दिए जाते हैं।
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कई बार उठाई आवाज नहीं हुई सुनवाई
स्थानीय नागरिक हरिश्चंद्र सिंह ने बताया कि दोनों पैंटून पुलों की मरम्मत कराए जाने व रास्ता सही करने की मांग जिला पंचायत सदस्य हसन शाह के माध्यम से वह कई बार जिला पंचायत की बैठकों में उठा चुके हैं। इस पर ठोस कार्रवाई अमल में नहीं लाई गई।
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पैंटून पुल की क्षमता पांच टन के वाहन की है। लोगों ने हाईटगेज तोड़ दिए हैं। इससे अधिक क्षमता के वाहन भी गुजरते हैं। इसी वजह से पुल की स्थिति खराब हो जाती है। पहले भी कई बार मरम्मत कराई गई है। फिर से मरम्मत कराई जा रही है। सुरक्षा का कोई इंतजाम नहीं किया गया है।
- रथिन सिन्हा, पीडब्ल्यूडी एक्सईएन