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ग्रामीण क्षेत्रों में तीसरे दिन भी पूरी रात हुई बिजली कटौती, उकताए लोग
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शाहजहांपुर। भीषण गर्मी में आठ से दस घंटे की बिजली की आपात कटौती होने से ग्रामीण जनजीवन बुरी तरह बेहाल है। कई ऐसे गांव हैं जहां कटौती के साथ लाइनों में फाल्ट होने से 24 घंटे में बमुश्किल एक-दो घंटे बिजली आपूर्ति हो रही है। तहसील स्तरीय कस्बों में भी सात से आठ घंटे की कटौती के अलावा पावर नेटवर्क की खराबियां बिजली संकट को बढ़ा रही हैं और इससे जन सामान्य में विभाग के खिलाफ रोष बढ़ रहा है। ऐसे में बिजली उपकेंद्रों पर अप्रिय हालात पैदा होने की आशंका में कर्मचारी संगठनों ने विद्युत निगम के प्रबंधन से सुरक्षा और जरूरी संसाधन उपलब्ध कराने की मांग की है।
शनिवार को भी ग्रामीण फीडरों पर सुबह से शुरू हुई आपात कटौती का सिलसिला शाम तक जारी रहा। पूरी रात ग्रामीण बिजली को तरस गए और दिन में आपूर्ति शुरू होने की नौबत आई तो हाईटेंशन लाइनें ओवरलोडिंग की चपेट में आने लगीं। आपूर्ति के दौरान पावर नेटवर्क की खराबियों से लोगों का धैर्य चुक रहा है। चूंकि, तहसील स्तरीय कस्बे भी दस से 12 घंटे की कटौती का सामना कर रहे हैं। एक्सईएन ट्रांसमिशन आरके उपाध्याय भी मानते हैं कि प्रदेश सरकार बिजली संकट से बिगड़ रहे हालात सुधारने को प्रयासशील है और इसके लिए बिजलीघरों को कोयला पहुंचाया जा रहा है, लेकिन आपूर्ति में सुधार तब तक नहीं हो सकेगा, जब तक कि मांग के अनुरूप बिजली का उत्पादन शुरू नहीं हो जाता। उनका कहना है कि फिलहाल सोलर प्लांट से मिल रही बिजली नार्थ ग्रिड को बचाए हुए है और ईद के बाद ही बिजली उत्पादन में सुधार होने की उम्मीद है।
कर्मचारी संगठनों के नेताओं की बात
एक तो कटौती और ऊपर से लाइन फाल्ट बिजली संकट बढ़ा रहे हैं। मुख्य समस्या यही है कि विभाग के भंडार से मांगा गया सामान भी समय से उपलब्ध नहीं हो पाता है। अगर 33 केवी उपकेंद्र का केबिल बॉक्स फुंक जाए तो नया केबिल बॉक्स कभी पीलीभीत तो कभी बरेली से मंगाना पड़ता है। यही नहीं, इस पर होने वाला ढुलाई खर्च भी कर्मचारियों को अपनी जेब से देना पड़ता है। ऐसे माहौल में कनेक्शन चेकिंग भी बड़ा दुरूह कार्य हो गया है, लेकिन उच्चाधिकारियों के निर्देशों का पालन करना मजबूरी है। बिजली उपकेंद्रों और चेकिंग टीमों मेें शामिल कर्मचारियों की सुरक्षा व संसाधन की उपलब्धता के बारे में पहले भी मांग की जा चुकी है क्योंकि पुलिस की वर्दी का लोगों में खौफ होता है।
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-विनोद सिंह राणा, जिला संयोजक, विद्युत अभियंता संघ
बिजली संकट के मौजूदा हालात को देखते अधीक्षण अभियंता को पत्र भेजकर बिजली उपकेंद्रों की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत बनाने की मांग की गई है। हाईटेंशन लाइनों को सामान्य और चालू हालत में रखने के लिए जिन संसाधनों और उपकरणों की आवश्यकता होती है, वह विभाग के स्टोर से बहुधा नहीं मिल पाते। हमारा संगठन बीते दिनों कार्य बहिष्कार के दौरान भी यह समस्या प्रमुखता से उठा चुका है। केंद्रीय नेतृत्व भी इस बारे में प्रबंधन को बार-बार अवगत करा रहा है। दिक्कत यह है कि निगम प्रबंधन उपभोक्ता समस्याओं को गंभीरता से लेता है, लेकिन जन सामान्य का सीधा सामना करने दवाले कर्मचारियों की दिक्कतों पर कोई ध्यान नहीं दे रहा। विषम परिस्थितियों में अधिकारिक आदेशों का पालन करना कर्मचारियों की मजबूरी है। -सुधीर शर्मा, जिलाध्यक्ष, राज्य विद्युत परिषद जूनियर इंजीनियर्स संगठन
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शनिवार को भी ग्रामीण फीडरों पर सुबह से शुरू हुई आपात कटौती का सिलसिला शाम तक जारी रहा। पूरी रात ग्रामीण बिजली को तरस गए और दिन में आपूर्ति शुरू होने की नौबत आई तो हाईटेंशन लाइनें ओवरलोडिंग की चपेट में आने लगीं। आपूर्ति के दौरान पावर नेटवर्क की खराबियों से लोगों का धैर्य चुक रहा है। चूंकि, तहसील स्तरीय कस्बे भी दस से 12 घंटे की कटौती का सामना कर रहे हैं। एक्सईएन ट्रांसमिशन आरके उपाध्याय भी मानते हैं कि प्रदेश सरकार बिजली संकट से बिगड़ रहे हालात सुधारने को प्रयासशील है और इसके लिए बिजलीघरों को कोयला पहुंचाया जा रहा है, लेकिन आपूर्ति में सुधार तब तक नहीं हो सकेगा, जब तक कि मांग के अनुरूप बिजली का उत्पादन शुरू नहीं हो जाता। उनका कहना है कि फिलहाल सोलर प्लांट से मिल रही बिजली नार्थ ग्रिड को बचाए हुए है और ईद के बाद ही बिजली उत्पादन में सुधार होने की उम्मीद है।
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कर्मचारी संगठनों के नेताओं की बात
एक तो कटौती और ऊपर से लाइन फाल्ट बिजली संकट बढ़ा रहे हैं। मुख्य समस्या यही है कि विभाग के भंडार से मांगा गया सामान भी समय से उपलब्ध नहीं हो पाता है। अगर 33 केवी उपकेंद्र का केबिल बॉक्स फुंक जाए तो नया केबिल बॉक्स कभी पीलीभीत तो कभी बरेली से मंगाना पड़ता है। यही नहीं, इस पर होने वाला ढुलाई खर्च भी कर्मचारियों को अपनी जेब से देना पड़ता है। ऐसे माहौल में कनेक्शन चेकिंग भी बड़ा दुरूह कार्य हो गया है, लेकिन उच्चाधिकारियों के निर्देशों का पालन करना मजबूरी है। बिजली उपकेंद्रों और चेकिंग टीमों मेें शामिल कर्मचारियों की सुरक्षा व संसाधन की उपलब्धता के बारे में पहले भी मांग की जा चुकी है क्योंकि पुलिस की वर्दी का लोगों में खौफ होता है।
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-विनोद सिंह राणा, जिला संयोजक, विद्युत अभियंता संघ
बिजली संकट के मौजूदा हालात को देखते अधीक्षण अभियंता को पत्र भेजकर बिजली उपकेंद्रों की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत बनाने की मांग की गई है। हाईटेंशन लाइनों को सामान्य और चालू हालत में रखने के लिए जिन संसाधनों और उपकरणों की आवश्यकता होती है, वह विभाग के स्टोर से बहुधा नहीं मिल पाते। हमारा संगठन बीते दिनों कार्य बहिष्कार के दौरान भी यह समस्या प्रमुखता से उठा चुका है। केंद्रीय नेतृत्व भी इस बारे में प्रबंधन को बार-बार अवगत करा रहा है। दिक्कत यह है कि निगम प्रबंधन उपभोक्ता समस्याओं को गंभीरता से लेता है, लेकिन जन सामान्य का सीधा सामना करने दवाले कर्मचारियों की दिक्कतों पर कोई ध्यान नहीं दे रहा। विषम परिस्थितियों में अधिकारिक आदेशों का पालन करना कर्मचारियों की मजबूरी है। -सुधीर शर्मा, जिलाध्यक्ष, राज्य विद्युत परिषद जूनियर इंजीनियर्स संगठन