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हुलासनगरा क्रॉसिंगः 11 सालों के दर्द का इलाज नहीं, ओवरब्रिज न बनने के कारण जाम से जूझ रही जनता
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लखनऊ-दिल्ली राष्ट्रीय राजमार्ग पर हुलासनगरा क्रासिंग पर अधूरा पड़ा निर्माणाधीन ओवरब्रिज। संवा
- फोटो : SHAHJAHANPUR
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शाहजहांपुर। लखनऊ-दिल्ली राष्ट्रीय राजमार्ग के बरेली से सीतापुर तक फोरलेन निर्माण का कार्य 11 सालों में भी पूरा नहीं हो सका है। निर्माण का ठेका लेने वाली एरा इंफ्रा फर्म के दिवालिया होने के बाद नई फर्म को काम दिया गया है लेकिन अपेक्षाकृत परिणाम अब तक सामने नहीं आ सके है। हुलासनगरा क्रॉसिंग पर ओवरब्रिज न बनने से वाहन घंटों जाम में फंसे रहते हैं। यहां पर वाहनों के अत्यधिक दबाव से बने गड्ढों के कारण आए दिन हादसे हो रहे हैं।
उत्तर प्रदेश में बसपा सरकार के दौरान सन 2010 में लखनऊ-दिल्ली नेशनल हाईवे पर बरेली से लेकर सीतापुर तक लगभग157 किलोमीटर फोरलेन के निर्माण कार्य का ठेका हुआ था। ठेका लेने वाली एरा इन्फ्रा फर्म को हाईवे के निर्माण के साथ ही हुलासनगरा क्रॉसिंग पर ओवरब्रिज को भी बनाना था। सड़क बनाने और मरम्मत के साथ ही दो टोल प्लाजा भी बनाए जाने हैं। ये टोल प्लाजा फरीदपुर से पहले और मैगलगंज में बनने हैं। एरा इंफ्रा फर्म ने निर्माण शुरू कराया, लेकिन बाद में काम छोड़ दिया। अगस्त 2018 में एनएचएआई ने एरा इंफ्रा फर्म के साथ हुए अनुबंध को रद्द कर दिया था।
एनएचएआई का कहना था कि फर्म ने बगैर सूचित किए काम रोक दिया। इसके अलावा नोटिस का जवाब भी नहीं दिया। अक्टूबर 2019 में नए सिरे से राष्ट्रीय राजमार्ग और ओवरब्रिज को बनाने के लिए टेंडर हुए। गाजियाबाद की निर्माणदायी फर्म पीआरएल को हुलासनगरा ओवरब्रिज और क्रॉसिंग के पास साइड रोड बनाने का ठेका दिया गया। इस फर्म को 31 मार्च 2020 तक ओवरब्रिज बनाना था। कोरोना संक्रमण बढ़ने के कारण लॉकडाउन लगने से नौ महीने का अतिरिक्त समय फर्म को दिया गया।
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31 दिसंबर को यह मियाद पूरी हो गई, लेकिन निर्माण नहीं हो सका। इसी बीच मई-जून 2021 को हुलासनगरा ओवरब्रिज के लिए बने पुराने गार्डरों को रेलवे विभाग के इंजीनियरों ने फेल कर दिया। इससे फिर से ओवरब्रिज निर्माण की प्रक्रिया को धक्का लगा। अब नए गार्डर का निर्माण किया जाना है, जिसमें छह महीने का समय लगेगा। इसके बाद ही ओवरब्रिज का निर्माण हो सकेगा। मीरानपुर कटरा क्षेत्र में स्थित हुलासनगरा क्रॉसिंग पर ओवरब्रिज न होने से रोजाना घंटों जाम लगता है। यहां पर गड्ढों के कारण यातायात अनियंत्रित होने के कारण आए दिन लोग हादसों का शिकार होते हैं।
ट्रेन की टक्कर से चली गई थी पांच लोगों की जान
हुलासनगरा रेलवे क्रॉसिंग पर 22 अप्रैल की सुबह बड़ा हादसा हो गया था। फाटक खुला होने के चलते लखनऊ-चंडीगढ़ एक्सप्रेस ट्रक और बाइक को टक्कर मारने के बाद पटरी से उतर गई थी। हादसे में पांच लोगों की मौत हो गई थी। क्रॉसिंग पर अगर ओवरब्रिज बना होता तो शायद इतना बड़ा हादसा न होता। इसके अलावा भी क्रॉसिंग के पास गड्ढों और जाम से बचने के लिए रफ्तार भरते वाहनों की चपेट में आकर कई लोग जान गवां चुके हैं।
हुलासनगरा रेलवे क्रॉसिंग पर ओवरब्रिज का करीब दो-तिहाई का काम पूरा हो चुका है। सिर्फ रेलवे लाइन के ऊपर ओवरब्रिज पर गार्डर रखने का काम बाकी बचा है। रेलवे से अनुमति का कार्य चल रहा है। गार्डर बनाने वाली कंपनी को नए गार्डर बनाने का आर्डर दे दिया गया है। नए गार्डर आते ही बहुत ही जल्द काम पूरा कर लिया जाएगा।
- पुष्पेंद्र पराशर, डिप्टी प्रोजेक्ट मैनेजर, पीआरएल।
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उत्तर प्रदेश में बसपा सरकार के दौरान सन 2010 में लखनऊ-दिल्ली नेशनल हाईवे पर बरेली से लेकर सीतापुर तक लगभग157 किलोमीटर फोरलेन के निर्माण कार्य का ठेका हुआ था। ठेका लेने वाली एरा इन्फ्रा फर्म को हाईवे के निर्माण के साथ ही हुलासनगरा क्रॉसिंग पर ओवरब्रिज को भी बनाना था। सड़क बनाने और मरम्मत के साथ ही दो टोल प्लाजा भी बनाए जाने हैं। ये टोल प्लाजा फरीदपुर से पहले और मैगलगंज में बनने हैं। एरा इंफ्रा फर्म ने निर्माण शुरू कराया, लेकिन बाद में काम छोड़ दिया। अगस्त 2018 में एनएचएआई ने एरा इंफ्रा फर्म के साथ हुए अनुबंध को रद्द कर दिया था।
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एनएचएआई का कहना था कि फर्म ने बगैर सूचित किए काम रोक दिया। इसके अलावा नोटिस का जवाब भी नहीं दिया। अक्टूबर 2019 में नए सिरे से राष्ट्रीय राजमार्ग और ओवरब्रिज को बनाने के लिए टेंडर हुए। गाजियाबाद की निर्माणदायी फर्म पीआरएल को हुलासनगरा ओवरब्रिज और क्रॉसिंग के पास साइड रोड बनाने का ठेका दिया गया। इस फर्म को 31 मार्च 2020 तक ओवरब्रिज बनाना था। कोरोना संक्रमण बढ़ने के कारण लॉकडाउन लगने से नौ महीने का अतिरिक्त समय फर्म को दिया गया।
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31 दिसंबर को यह मियाद पूरी हो गई, लेकिन निर्माण नहीं हो सका। इसी बीच मई-जून 2021 को हुलासनगरा ओवरब्रिज के लिए बने पुराने गार्डरों को रेलवे विभाग के इंजीनियरों ने फेल कर दिया। इससे फिर से ओवरब्रिज निर्माण की प्रक्रिया को धक्का लगा। अब नए गार्डर का निर्माण किया जाना है, जिसमें छह महीने का समय लगेगा। इसके बाद ही ओवरब्रिज का निर्माण हो सकेगा। मीरानपुर कटरा क्षेत्र में स्थित हुलासनगरा क्रॉसिंग पर ओवरब्रिज न होने से रोजाना घंटों जाम लगता है। यहां पर गड्ढों के कारण यातायात अनियंत्रित होने के कारण आए दिन लोग हादसों का शिकार होते हैं।
ट्रेन की टक्कर से चली गई थी पांच लोगों की जान
हुलासनगरा रेलवे क्रॉसिंग पर 22 अप्रैल की सुबह बड़ा हादसा हो गया था। फाटक खुला होने के चलते लखनऊ-चंडीगढ़ एक्सप्रेस ट्रक और बाइक को टक्कर मारने के बाद पटरी से उतर गई थी। हादसे में पांच लोगों की मौत हो गई थी। क्रॉसिंग पर अगर ओवरब्रिज बना होता तो शायद इतना बड़ा हादसा न होता। इसके अलावा भी क्रॉसिंग के पास गड्ढों और जाम से बचने के लिए रफ्तार भरते वाहनों की चपेट में आकर कई लोग जान गवां चुके हैं।
हुलासनगरा रेलवे क्रॉसिंग पर ओवरब्रिज का करीब दो-तिहाई का काम पूरा हो चुका है। सिर्फ रेलवे लाइन के ऊपर ओवरब्रिज पर गार्डर रखने का काम बाकी बचा है। रेलवे से अनुमति का कार्य चल रहा है। गार्डर बनाने वाली कंपनी को नए गार्डर बनाने का आर्डर दे दिया गया है। नए गार्डर आते ही बहुत ही जल्द काम पूरा कर लिया जाएगा।
- पुष्पेंद्र पराशर, डिप्टी प्रोजेक्ट मैनेजर, पीआरएल।