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‘हमारी भावनाओं की जुबान है हिंदी’
शाहजहांपुर।
Updated Mon, 21 Sep 2015 11:16 PM IST
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हिंदी पखवाड़े के अंतर्गत जीएफ कॉलेज के हिंदी विभाग में विभिन्न प्रतियोगिताओं और गोष्ठी का आयोजन किया गया। समापन पर प्राचार्य डॉ. अकील अहमद ने विजेताओं को पुरस्कृत किया।
काव्य पाठ प्रतियोगिता में ऋषिकांत ने प्रथम, स्वर्णिमा श्रीवास्तव ने द्वितीय और आफताब आलम ने तृतीय स्थान पाया। रियाज अहमद और श्वेता अवस्थी को सांत्वना पुरस्कार दिया गया। इस अवसर पर वर्तनी, सुलेख, लघु निबंध लेखन आदि प्रतियोगिताएं भी हुईं। इससे पूर्व हुई गोष्ठी में प्राचार्य डॉ. अकील अहमद ने कहा कि सिर्फ सभाओं और सम्मेलनों में हिंदी की जय-जयकार से इसका भला नहीं होगा। हिंदी के विकास के लिए व्यवहारिक कदम उठाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि हिंदी हमारी भावनाओं की जुबान है, इसलिए सभी को इसके विकास के लिए सच्ची लगन से कोशिश करनी चाहिए। विभागाध्यक्ष डॉ. फैयाज अहमद ने कहा कि हिंदी जितनी सशक्त होगी, उतनी मजबूती से समाज आगे बढ़ेगा। हिंदी के विकास में ही राष्ट्र की उन्नति छिपी है।
डॉ. मोहम्मद साजिद खान के संचालन में हुए कार्यक्रम में डॉ. राकेश वाजपेयी, डॉ. अरशद खान, डॉ. फरोग खुमार, डॉ. मुशर्रत अली, डॉ. नसीम अख्तर, डॉ. तारिक खान आदि मौजूद रहे। व्यवस्था में मो. आसिफ, समरीन, उम्मे, कुलसुम, पंकज, सचिन, अरुण, शैलेंद्र, रवींद्र आदि विद्यार्थियों का योगदान रहा।
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काव्य पाठ प्रतियोगिता में ऋषिकांत ने प्रथम, स्वर्णिमा श्रीवास्तव ने द्वितीय और आफताब आलम ने तृतीय स्थान पाया। रियाज अहमद और श्वेता अवस्थी को सांत्वना पुरस्कार दिया गया। इस अवसर पर वर्तनी, सुलेख, लघु निबंध लेखन आदि प्रतियोगिताएं भी हुईं। इससे पूर्व हुई गोष्ठी में प्राचार्य डॉ. अकील अहमद ने कहा कि सिर्फ सभाओं और सम्मेलनों में हिंदी की जय-जयकार से इसका भला नहीं होगा। हिंदी के विकास के लिए व्यवहारिक कदम उठाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि हिंदी हमारी भावनाओं की जुबान है, इसलिए सभी को इसके विकास के लिए सच्ची लगन से कोशिश करनी चाहिए। विभागाध्यक्ष डॉ. फैयाज अहमद ने कहा कि हिंदी जितनी सशक्त होगी, उतनी मजबूती से समाज आगे बढ़ेगा। हिंदी के विकास में ही राष्ट्र की उन्नति छिपी है।
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डॉ. मोहम्मद साजिद खान के संचालन में हुए कार्यक्रम में डॉ. राकेश वाजपेयी, डॉ. अरशद खान, डॉ. फरोग खुमार, डॉ. मुशर्रत अली, डॉ. नसीम अख्तर, डॉ. तारिक खान आदि मौजूद रहे। व्यवस्था में मो. आसिफ, समरीन, उम्मे, कुलसुम, पंकज, सचिन, अरुण, शैलेंद्र, रवींद्र आदि विद्यार्थियों का योगदान रहा।
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