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ओसीएफ ग्राउंड पर सजेगा दिवाली का आतिशबाजी मार्केट
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शाहजहांपुर। दिवाली पर आतिशबाजी की दुकानें जन सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इस बार ओसीएफ के रामलीला मैदान पर लगाई जाएंगी। बता दें कि इससे पहले दिवाली के मौके पर आतिशबाजी विक्रेता अपनी दुकानें शहर के अंदरूनी हिस्सों के मैदानों पर लगाते रहे हैं। गत वर्ष जीएफ कॉलेज के पास कैंट मैदान पर आतिशबाजी का बाजार सजा था, लेकिन वहां शहीदों का संग्रहालय निर्माणाधीन होने के कारण इस बार पटाखों का बाजार ओसीएफ के रामलीला मैदान पर लगाने का फैसला किया गया है। हालांकि, अभी तक आतिशबाजों को दुकानें लगाने के लिए प्रशासन से अधिकृत तौर पर अनुमति पत्र जारी नहीं होने से दुकानदारों मेें बाजार के स्थान को लेकर संशय है।
शहर में कई मैदानों पर लग चुकीं हैं दुकानें
दिवाली पर पटाखों की दुकानें हर साल सजती हैं, लेकिन उनके बाजार के लिए अभी तक कोई स्थायी ठिकाना नहीं है। दो दशक पहले तक बहादुरगंज के आतिशबाजी मार्केट में ही पटाखों से लेकर आतिशबाजी के अन्य आइटमों की बिक्री होती थी। करीब एक दशक पहले बहादुरगंज मार्केट के लाइसेंसी विक्रेताओं को शहर के बाहर भेजा गया है, दिवाली पर तीन दिन तक उनकी दुकानें लगने के स्थान हर साल बदल जाते हैं। पहले टाउन हाल के शहीद द्वार मैदान पर यह दुकानें सजती थीं। यह मैदान चारों ओर से मकानों-दुकानों के निर्माण से घिर जाने पर पटाखा बाजार खिरनीबाग के जीआईसी ग्राउंड पर शिफ्ट किया गया। कुछ वर्ष तक अजीजगंज और मुमुक्षु आश्रम के मैदान पर भी यह दुकानें सजीं। अगले साल वहां से पटाखा बाजार लोधीपुर के खन्नौत तट पर कर दिया गया। गत वर्ष जीएफ कॉलेज के पास कैंट मैदान पर पटाखा की दुकानें लगीं, लेकिन वहां शहीदों का संग्रहालय निर्माणाधीन होने के कारण पटाखा बाजार ओसीएफ के रामलीला मैदान पर लगाने का निर्णय किया गया।
60 से अधिक फुटकर विक्रेताओं ने किया आवेदन
जिले में दो दशक पहले तक आतिशबाजी के 48 थोक एवं फुटकर लाइसेंसी व्यापारी थे। आतिशबाजों को अपने गोदाम और दुकानें शहर से बाहर ले जाने का निर्देश दिए जाने पर तमाम लोगों ने इस धंधे से ही किनारा करके आजीविका के लिए मेहनत-मजदूरी के अन्य काम अपना लिए। कोई कालीन बुनाई और जरी-जरदोजी से जुड़ा तो कई रिक्शे चलाने लगे। अब जिले में आतिशबाजी के सात थोक और 17-18 फुटकर लाइसेंसी बचे हैं। उनके माल की बिक्री करने के लिए गत वर्ष 48 दुकानें लगाई गई थीं, लेकिन इस वर्ष सुरक्षा, पर्यावरण आदि कारणों से इन दुकानों की संख्या सीमित रखने का निर्णय किया गया है, जबकि आतिशबाजी बिक्री के लिए 60 से अधिक लोगों ने आवेदन किए हैं।
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आतिशबाजी की दुकानें लगाने के लिए अधिकारियों को ऐसे स्थान चिह्नित करने के निर्देश दिए थे, जिनके आसपास आबादी नहीं हो। इस बार पटाखा की अस्थायी दुकानों के लिए ओसीएफ के रामलीला ग्राउंड का चयन किया गया है क्योंकि वहां काफी जगह है और आसपास आवासीय क्षेत्र भी नहीं है। दुकानें लगने से पहले आतिशबाजी विक्रेताओं को अनुमति पत्र सुलभ करा दिए जाएंगे। इससे पहले नगर निगम एवं अग्निशमन विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक कर ऐसी दुकानों की संख्या घटाने पर विचार विमर्श होना है क्योंकि कई संगठनों ने पर्यावरण प्रदूषण का हवाला देकर आतिशबाजी की सीमित बिक्री कराने का अनुरोध किया है।
- वनिता सिंह, सिटी मजिस्ट्रेट
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शहर में कई मैदानों पर लग चुकीं हैं दुकानें
दिवाली पर पटाखों की दुकानें हर साल सजती हैं, लेकिन उनके बाजार के लिए अभी तक कोई स्थायी ठिकाना नहीं है। दो दशक पहले तक बहादुरगंज के आतिशबाजी मार्केट में ही पटाखों से लेकर आतिशबाजी के अन्य आइटमों की बिक्री होती थी। करीब एक दशक पहले बहादुरगंज मार्केट के लाइसेंसी विक्रेताओं को शहर के बाहर भेजा गया है, दिवाली पर तीन दिन तक उनकी दुकानें लगने के स्थान हर साल बदल जाते हैं। पहले टाउन हाल के शहीद द्वार मैदान पर यह दुकानें सजती थीं। यह मैदान चारों ओर से मकानों-दुकानों के निर्माण से घिर जाने पर पटाखा बाजार खिरनीबाग के जीआईसी ग्राउंड पर शिफ्ट किया गया। कुछ वर्ष तक अजीजगंज और मुमुक्षु आश्रम के मैदान पर भी यह दुकानें सजीं। अगले साल वहां से पटाखा बाजार लोधीपुर के खन्नौत तट पर कर दिया गया। गत वर्ष जीएफ कॉलेज के पास कैंट मैदान पर पटाखा की दुकानें लगीं, लेकिन वहां शहीदों का संग्रहालय निर्माणाधीन होने के कारण पटाखा बाजार ओसीएफ के रामलीला मैदान पर लगाने का निर्णय किया गया।
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60 से अधिक फुटकर विक्रेताओं ने किया आवेदन
जिले में दो दशक पहले तक आतिशबाजी के 48 थोक एवं फुटकर लाइसेंसी व्यापारी थे। आतिशबाजों को अपने गोदाम और दुकानें शहर से बाहर ले जाने का निर्देश दिए जाने पर तमाम लोगों ने इस धंधे से ही किनारा करके आजीविका के लिए मेहनत-मजदूरी के अन्य काम अपना लिए। कोई कालीन बुनाई और जरी-जरदोजी से जुड़ा तो कई रिक्शे चलाने लगे। अब जिले में आतिशबाजी के सात थोक और 17-18 फुटकर लाइसेंसी बचे हैं। उनके माल की बिक्री करने के लिए गत वर्ष 48 दुकानें लगाई गई थीं, लेकिन इस वर्ष सुरक्षा, पर्यावरण आदि कारणों से इन दुकानों की संख्या सीमित रखने का निर्णय किया गया है, जबकि आतिशबाजी बिक्री के लिए 60 से अधिक लोगों ने आवेदन किए हैं।
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आतिशबाजी की दुकानें लगाने के लिए अधिकारियों को ऐसे स्थान चिह्नित करने के निर्देश दिए थे, जिनके आसपास आबादी नहीं हो। इस बार पटाखा की अस्थायी दुकानों के लिए ओसीएफ के रामलीला ग्राउंड का चयन किया गया है क्योंकि वहां काफी जगह है और आसपास आवासीय क्षेत्र भी नहीं है। दुकानें लगने से पहले आतिशबाजी विक्रेताओं को अनुमति पत्र सुलभ करा दिए जाएंगे। इससे पहले नगर निगम एवं अग्निशमन विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक कर ऐसी दुकानों की संख्या घटाने पर विचार विमर्श होना है क्योंकि कई संगठनों ने पर्यावरण प्रदूषण का हवाला देकर आतिशबाजी की सीमित बिक्री कराने का अनुरोध किया है।
- वनिता सिंह, सिटी मजिस्ट्रेट