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संगठन के पूर्व और वर्तमान लोकसभा क्षेत्र अध्यक्ष भिड़े

Fri, 10 Apr 2015 07:40 PM IST
शाहजहांपुर
शाहजहांपुर Updated Fri, 10 Apr 2015 07:40 PM IST
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Organization's past and present Lok Sabha Speaker loggerheads
युवक कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव और सांगठनिक मामलों के प्रभारी मनीष ठाकुर की मौजूदगी में संगठन के अनुशासन को उस वक्त पलीता लग गया जब लोकसभा क्षेत्र अध्यक्ष अजय मिश्र रिंकू और पूर्व अध्यक्ष रोहित सिंह आपस में भिड़ गए। निष्क्रिय पदाधिकारियों को संगठन से बाहर का रास्ता दिखाने के मुद्दे पर चर्चा के दौरान दोनों में कहासुनी होने से हतप्रभ युकां प्रभारी ने जैसे-तैसे दोनों को शांत किया।
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मौका था-कांग्रेस कार्यालय में युकां प्रभारी ठाकुर और दिल्ली से उनके साथ आए जिला प्रभारी सैयद आमिर मियां की पत्रकार वार्ता का। दोनोें शीर्ष पदाधिकारियों ने भूमि अधिग्रहण बिल के विरोध में शुरू किए गए चरणबद्घ आंदोलन के पांचवें दौर में राष्ट्रपति के नाम पोस्टकार्ड भेजने का ब्यौरा दिया। संगठन प्रभारी ने बताया कि हर विधानसभा क्षेत्र से पांच-पांच सौ पोस्टकार्ड लिखवाए जा रहे हैं और 15 अप्रेल तक 50 लाख पोस्टकार्ड संगठन मुख्यालय पर जमा करने का लक्ष्य तय किया गया है।
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युकां प्रभारी ठाकुर ने मोदी सरकार के भूमि अधिग्रहण बिल की तुलना में यूपीए सरकार द्वारा वर्ष 2011 में लागू अधिग्रहण कानून को बेहतर बताया। यह बातें होने तक वहां मौजूद युकां के वर्तमान और पूर्व अध्यक्ष खामोश रहे, लेकिन जैसे ही प्रभारी ने संगठन में सुधार और बदलाव के लिए अनुशासन पर जोर देते हुए निष्क्रिय पदाधिकारियों पर कार्रवाई का संकेत दिया, स्थानीय पदाधिकारी मुखर हो उठे। पूर्व अध्यक्ष रोहित बोल पड़े कि नाकारा कार्यकर्ताओं को विधानसभा क्षेत्र अध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण पदोें से हटा दिया जाना चाहिए।
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उनकी बात पर शीर्ष पदाधिकारी आगे कुछ कहते कि वर्तमान लोकसभा क्षेत्र अध्यक्ष ने तमतमाए लहजे में रोहित के प्रस्ताव का यह कहकर विरोध किया जो लोग पार्टी के प्रति निष्ठावान होने के बावजूद किन्हीं कारणों से संगठन को समय नहीं दे पाए, उनकी व्यक्तिगत परेशानियों को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। दरअसल, जिले के छह विधानसभा क्षेत्रों में कई अध्यक्ष अजय मिश्र के समर्थक बताए जाते हैं।

लोकसभा क्षेत्र अध्यक्ष ने उनका पक्ष लिया तो रोहित ने फिर अपनी बात दोहराई। इस पर अजय ने उन्हें खामोश रहने की हिदायत दी तो रोहित भी बाहें समेटकर उठ खड़े हुए। दोनों के बीच भिड़ंत को टालने के लिए संगठन प्रभारी को हस्तक्षेप करना पड़ा। उन्होंने यह कहकर बात संभाली कि जो पदाधिकारी अस्वस्थता और परिवार की अन्य उलझनों से घिरे होने के नाते समय नहीं दे पा रहे, उन्हें संगठन से निकालने के बजाय नोटिस जारी करके जवाब तलब किया जाएगा।
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