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बारिश और बाढ़ आपदा से सैकड़ों किसानों की 25694 हेक्टेयर फसलें हुईं तबाह

Sat, 05 Nov 2022 12:42 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sat, 05 Nov 2022 12:42 AM IST
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Only 65 farmers will get grant in the devastation caused by rain and flood
शाहजहांपुर। अक्टूबर में कई दिन तक हुई भारी वर्षा और बाद में नदियों में उफान से जलालाबाद, कलान, पुवायां और तिलहर समेत सदर तहसील के कई गांवों में फसलों को भारी क्षति हुई थी। प्रशासन स्तर से कराए सर्वे में सभी तहसीलों में 25694.72 हेक्टेयर में विभिन्न फसलें खराब पाई गईं हैं, लेकिन प्रशासन के मानक के मुताबिक अनुदान जिले भर में कुल 65 किसानों को ही मिल सकेगा। शासन से 3.90 लाख रुपये की मांग की गई है।
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खरीफ सीजन में जिले के करीब 4.50 लाख किसानों ने 2.65 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में विभिन्न फसलें बोई थीं। किसान संगठनों ने 25-30 फीसदी फसलें सूखा से खराब होने का अनुमान लगाया, लेकिन प्रशासन स्तर से हुए सर्वे में सिर्फ 9.20 प्रतिशत (347.25 हेक्टेयर) फसलें सूखा प्रभावित मानी गईं। बाद में जो फसलें बची रह गईं, वह भारी वर्षा और बाढ़ की भेंट चढ़ गईं। खराब हालत जलालाबाद और कलान तहसील में गंगा, रामगंगा, बहगुल आदि नदियों के तटवर्ती गांवों के किसानों की हो गई क्योंकि उन्हें सूखा के बाद बाढ़ और बारिश की आपदा का सामना करना पड़ा। माना जा रहा था कि सूखा राहत पाने से जो किसान वंचित रहेंगे, उन्हें बाढ़ और बारिश से हुए नुकसान की क्षतिपूर्ति मिल जाएगी।
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अब प्रशासन की बारिश से हुए नुकसान की जो सर्वे रिपोर्ट आई है, उसके मुताबिक सभी तहसीलों में लगभग दस हजार किसानों की केवल 9.67 फीसदी फसलें खराब हुई हैं। उसमें भी कृषक निवेश अनुदान के लिए बाढ़ प्रभावित जलालाबाद और कलान तहसील में केवल दस किसान और तिलहर तहसील में 50 किसान चिह्नित किए गए हैं। यह वह किसान हैं, जिनकी एक तिहाई से अधिक फसलें नष्ट हुई हैं। दूसरी ओर, तमाम ऐसे किसान हैं, जिनकी फसलें खराब हुईं, लेकिन प्रशासनिक टीम ने उनके खेतों का सर्वे नहीं किया।
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सर्वे में इन फसलों को किया गया शामिल
तहसील स्तर पर एसडीएम की अध्यक्षता में गठित सर्वे टीमों ने जांच में अरहर, उड़द, गन्ना, ज्वार, तिल, धान, बाजरा, भिंडी, मक्का, मूंग, मूंगफली और मिश्रित फसलों (सह फसली खेती) को शामिल किया गया। सर्वे में सभी तहसीलों में धान, गन्ना, तिल आदि फसलों को ज्यादा नुकसान पाया गया। उधर, जलालाबाद और कलान तहसीलों में मूंगफली, ज्वार, बाजरा आदि फसलें ज्यादा नष्ट पाई गईं हैं।
मुआवजा के नाम पर मिलेगा मामूली अनुदान
जिन किसानों ने फसली बीमा कराया है, उन्हें क्षतिपूर्ति शासन से फसलों के पूर्व घोषित वित्त मान के अनुसार की जाएगी, लेकिन गैर बीमित फसलों का अनुदान 33 फीसदी से ज्यादा नुकसान के आधार पर तय होगा। बारिश और बाढ़ आपदा की जिन किसानों को क्षतिपूर्ति होनी है, उन्हें शासन के नियमानुसार सिंचित क्षेत्र में प्रति हेक्टेयर अधिकतम 13500 रुपये और असिंचित क्षेत्र में 6800 रुपये प्रति हेक्टेयर से अधिक अनुदान नहीं दिया जाएगा। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह धनराशि मुआवजे के तौर पर नहीं बल्कि किसानों को कृषक निवेश अनुदान के तौर पर इसलिए दी जाएगी कि वह अगली फसल की तैयारी के लिए खाद, बीज आदि खरीद सकें।
किसानों की बात
आठ बीघा धान पहले भारी बारिश में डूबे और बाद में आई बाढ़ में पूरी फसल डूबकर नष्ट हो गई। हमारे खेत पर अभी तक न तो कोई कर्मचारी फसली नुकसान का सर्वे करने आया और न ही मुआवजा दिया गया है। -नूर मोहम्मद, कुतलूपुर (मिर्जापुर)
छह बीघा खेत में उर्द-तिल और तीन बीघा में बाजरा की फसल बोई थी। सूख रहीं फसलों को बचाने के लिए सिंचाई करने का प्रयास किया, लेकिन बोरिंग फेल होने से फसलें सूख गईं। मुआवजा मिलना तो दूर रहा, सर्वे तक नहीं हुआ। -रामनिवास, मिर्जापुर

बारिश और बाढ़ से करीब नौ फीसदी फसलें प्रभावित हुईं हैं। शासन के नियमानुसार फसली नुकसान की क्षतिपूर्ति केवल उन्हीं किसानों को हो सकेगी, जिनकी 33 फीसदी फसलें नष्ट पाई गई हैं। अनुदान देने लायक 65 किसान पाए गए हैं। - त्रिभुवन, एडीएम फाइनेंस/आपदा राहत प्रभारी
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