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अब मान जाइए...कोरोना संक्रमण को रोकने में सहयोग कीजिए
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शाहजहांपुर में बृहस्पतिवार को कोरोना संक्रमण से बेपरवाह होकर बाजार में मास्क लगाए बगैर पहुंचे ल
- फोटो : SHAHJAHANPUR
शाहजहांपुर। कोरोना का जनपद में भी तेजी से प्रसार हो रहा है। जिले में बुधवार तक 32 सक्रिय केस सामने आ चुके हैं। फिर भी लोग मानने को तैयार नजर नहीं आ रहे हैं। बाजार में भीड़ उमड़ रही है, लेकिन अधिकतर लोग कोविड गाइडलाइन का पालन नहीं कर रहे हैं। बाजारों में भीड़ के बीच न तो सामाजिक दूरी का पालन हो रहा है और न ही लोग मास्क लगा रहे हैं।
कोविड नियमों के प्रति बरती जा रही लापरवाही भविष्य में हम सभी के लिए जानलेवा साबित हो सकती है। इसे लेकर पुलिस भी सख्ती नहीं दिखा रही। इसलिए समझदारी इसी में है कि हम सभी गाइड लाइन के पालन को खुद सचेत होकर अपनी सुरक्षा स्वयं करने को तत्पर हो जाएं। दो वर्ष पहले कोरोना फैलने की शुरुआत होने पर प्रधानमंत्री की अपील पर हम सभी ने जनता कर्फ्यू को अभूतपूर्व तरीके से सफल बनाकर महामारी को हराने में अपनी एकजुटता का जैसा प्रदर्शन किया था, कमोबेश उसी जागरूकता के साथ कोरोना की तीसरी लहर का सामना करने की जरूरत है।
गत वर्ष मार्च में डेल्टा वैरिएंट की दूसरी लहर ने भयावह रूप दिखाया तो एक बार फिर वायरस को हराने के लिए पुलिस-प्रशासन के साथ जन सामान्य ने कमर कसी। अब तीसरी लहर की दस्तक और प्रशासन द्वारा बार-बार आगाह किए जाने के बावजूद लोगों की उदासीनता भविष्य के लिए खतरनाक संकेत दे रही है। बाजारों में एक ही प्रतिष्ठान के काउंटर पर सामाजिक दूरी से बेपरवाह होकर लोग कंधे से कंधा मिलाकर खड़े दिख रहे हैं। उनके चेहरे पर मास्क भी नजर नहीं आ रहे हैं। इसलिए बेहतर होगा कि मास्क लगाए बगैर घर से बाहर नहीं निकलें और कहीं पर भी भीड़ का हिस्सा बनने से गुरेज करें।
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जान जोखिम में डालकर इलाज पर बड़ी रकम खर्च करने के बजाय मास्क लगाकर और भीड़ से दूर रहकर अपना बचाव करना ज्यादा अच्छा है। महामारी किसी का जाति-धर्म पूछकर हमला नहीं करती। अपनी कालोनी के लोगों को यही समझाता हूं। -कन्नू लाल, कांशीराम कालोनी
महामारी से बचने के लिए दो गज की दूरी के पालन, मास्क लगाने जैसे उपाय सरल और सस्ते हैं। जिन्होंने महामारी में अपनों को खोया है, लोग उनका दर्द समझने का प्रयास करें तो समझ आएगा कि गाइडलाइन अपनाना कितना जरूरी है। -विशाल कुमार, तारीन बहादुरगंज
महामारी को हराने में व्यापार जगत का त्याग समाज के अन्य सभी वर्गों के लिए अनुकरणीय होना चाहिए। जान है तो जहान है। यही मानकर गत दो वर्ष से लॉकडाउन में व्यापारी वर्ग अपने प्रतिष्ठान बंद रखकर पूरे समाज को ऐसा करे को प्रेरित कर रहा है। -तनु अग्रवाल, चौक
कोई जरूरी नहीं हमारे जीवन की सुरक्षा के लिए पुलिस कड़े कदम उठाए। सरकारी तंत्र केवल समझा सकता है। पिछले लॉकडाउन की तरह मास्क नहीं लगाने वालों पर जुर्माना लगाया जाएगा, तो लोग पुलिस की सख्ती का रोना रोने लगेंगे। -अजय कुमार, छाया कुआं
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कोविड नियमों के प्रति बरती जा रही लापरवाही भविष्य में हम सभी के लिए जानलेवा साबित हो सकती है। इसे लेकर पुलिस भी सख्ती नहीं दिखा रही। इसलिए समझदारी इसी में है कि हम सभी गाइड लाइन के पालन को खुद सचेत होकर अपनी सुरक्षा स्वयं करने को तत्पर हो जाएं। दो वर्ष पहले कोरोना फैलने की शुरुआत होने पर प्रधानमंत्री की अपील पर हम सभी ने जनता कर्फ्यू को अभूतपूर्व तरीके से सफल बनाकर महामारी को हराने में अपनी एकजुटता का जैसा प्रदर्शन किया था, कमोबेश उसी जागरूकता के साथ कोरोना की तीसरी लहर का सामना करने की जरूरत है।
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गत वर्ष मार्च में डेल्टा वैरिएंट की दूसरी लहर ने भयावह रूप दिखाया तो एक बार फिर वायरस को हराने के लिए पुलिस-प्रशासन के साथ जन सामान्य ने कमर कसी। अब तीसरी लहर की दस्तक और प्रशासन द्वारा बार-बार आगाह किए जाने के बावजूद लोगों की उदासीनता भविष्य के लिए खतरनाक संकेत दे रही है। बाजारों में एक ही प्रतिष्ठान के काउंटर पर सामाजिक दूरी से बेपरवाह होकर लोग कंधे से कंधा मिलाकर खड़े दिख रहे हैं। उनके चेहरे पर मास्क भी नजर नहीं आ रहे हैं। इसलिए बेहतर होगा कि मास्क लगाए बगैर घर से बाहर नहीं निकलें और कहीं पर भी भीड़ का हिस्सा बनने से गुरेज करें।
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जान जोखिम में डालकर इलाज पर बड़ी रकम खर्च करने के बजाय मास्क लगाकर और भीड़ से दूर रहकर अपना बचाव करना ज्यादा अच्छा है। महामारी किसी का जाति-धर्म पूछकर हमला नहीं करती। अपनी कालोनी के लोगों को यही समझाता हूं। -कन्नू लाल, कांशीराम कालोनी
महामारी से बचने के लिए दो गज की दूरी के पालन, मास्क लगाने जैसे उपाय सरल और सस्ते हैं। जिन्होंने महामारी में अपनों को खोया है, लोग उनका दर्द समझने का प्रयास करें तो समझ आएगा कि गाइडलाइन अपनाना कितना जरूरी है। -विशाल कुमार, तारीन बहादुरगंज
महामारी को हराने में व्यापार जगत का त्याग समाज के अन्य सभी वर्गों के लिए अनुकरणीय होना चाहिए। जान है तो जहान है। यही मानकर गत दो वर्ष से लॉकडाउन में व्यापारी वर्ग अपने प्रतिष्ठान बंद रखकर पूरे समाज को ऐसा करे को प्रेरित कर रहा है। -तनु अग्रवाल, चौक
कोई जरूरी नहीं हमारे जीवन की सुरक्षा के लिए पुलिस कड़े कदम उठाए। सरकारी तंत्र केवल समझा सकता है। पिछले लॉकडाउन की तरह मास्क नहीं लगाने वालों पर जुर्माना लगाया जाएगा, तो लोग पुलिस की सख्ती का रोना रोने लगेंगे। -अजय कुमार, छाया कुआं