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वित्तविहीन कॉलेजों के 195 शिक्षकों को नोटिस
अमर उजाला ब्यूरो शाहजहांपुर।
Updated Sat, 06 May 2017 11:04 PM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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डीआईओएस ने प्रधानाचार्यों को दिए शिक्षकों को तत्काल कार्यमुक्त करने के निर्देश
अन्यथा की स्थिति में समस्त परिषदीय कार्यों से डिबार करने की चेतावनी
यूपी बोर्ड की उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन करने के लिए नियुक्त वित्तविहीन कॉलेजों के परीक्षकों ने दसवें दिन भी कोई रुचि नहीं दिखाई। उनकी अनुपस्थिति के कारण मूल्यांकन कार्य बाधित हो रहा है। मुख्य नियंत्रक/ डीआईओएस डॉ. केएल वर्मा ने अनुपस्थित 195 परीक्षकों को नोटिस जारी कर रविवार को मूल्यांकन केंद्रों पर पहुंचने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ उन्होंने संबंधित प्रधानाचार्याें को भी नोटिस जारी करते हुए संबंधित शिक्षकों को तत्काल कार्यमुक्त करने के निर्देश दिए। साथ ही चेतावनी दी है कि यदि उन्होंने शिक्षकों को कार्यमुक्त नहीं किया तो उनके कॉलेज को समस्त परिषदीय कार्यों से डिबार करने की संस्तुति सचिव को भेज दी जाएगी।
डीआईओएस ने वित्तविहीन कॉलेजों के जिन 195 शिक्षकों को नोटिस जारी किए हैं, उनमें सर्वाधिक 94 शिक्षक तहसील जलालाबाद के हैं। इनके अलावा तहसील सदर के 24, पुवायां के 34 और तिलहर के 43 शिक्षक शामिल हैं। डीआईओएस ने बताया कि उन्हीं शिक्षकों को नोटिस जारी किए गए हैं, जिन विषयों की उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन होना शेष रह गया है और वह बोर्ड की ओर से इन्हीं विषयों के लिए परीक्षक नियुक्त किए गए हैं। मूल्यांकन केंद्रों के उप नियंत्रकों से मिली रिपोर्ट के अनुसार हाईस्कूल में गृह विज्ञान, संस्कृत और इंटर में हिंदी, गृह विज्ञान, शिक्षाशास्त्र, नागरिकशास्त्र, समाजशास्त्र आदि विषयों की कॉपियां सर्वाधिक होने के कारण मूल्यांकन पिछड़ रहा है।
डीआईओएस ने वित्तविहीन कॉलेजों के प्रधानाचार्यों को भी नोटिस जारी करते हुए निर्देश दिए हैं कि वह संबंधित विषयों को शिक्षकों को तत्काल कार्यमुक्त करते हुए मूल्यांकन केंद्र पर भेजना सुनिश्चित करें, ताकि मूल्यांकन कार्य समय से पूरा कराया जा सके। अन्यथा संबंधित कॉलेजों को समस्त परिषदीय कार्यों से डिबार किए जाने की संस्तुति की जाएगी।
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हाईस्कूल का 67 और इंटर का 62 फीसदी मूल्यांकन
यूपी बोर्ड परीक्षा के लिए बनाए गए चार मूल्यांकन केंद्रों पर छोटे विषयों की उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन समाप्त हो चुका है, लेकिन मुख्य समस्या उन विषयों की हो रही है, जिन विषयों की कॉपियां हजारों में भेेजी गई हैं। उनके दर्जनभर परीक्षक भी नहीं जुट पाए हैं। हाईस्कूल मूल्यांकन केंद्र एसपी कॉलेज के उप नियंत्रक आरके शर्मा ने बताया कि वैसे तो उनके केंद्र पर लगभग 75 प्रतिशत मूल्यांकन पूरा हो चुका है, लेकिन हिंदी और सामाजिक विज्ञान के परीक्षक कम होने से समस्या खड़ी हो रही है। इसी तरह हाईस्कूल के दूसरे मूल्यांकन केंद्र एबी रिच इंटर कॉलेज के उपनियंत्रक मिहिर फिलिप्स बताते हैं कि उनके यहां करीब 62 प्रतिशत मूल्यांकन पूरा हो चुका है, लेकिन संस्कृत और गृह विज्ञान की उत्तर पुस्तिकाएं अधिक होने से मूल्यांकन पिछड़ रहा है।
इसी तरह इंटर के मूल्यांकन केंद्र इस्लामिया इंटर कॉलेज के उप नियंत्रक शाकिर अली ने बताया कि उनके केंद्र पर लगभग 60 प्रतिशत मूल्यांकन हो चुका है, लेकिन हिंदी, संस्कृत, समाजशास्त्र, नागरिक शास्त्र आदि विषयों का मूल्यांकन परीक्षकों के अभाव में गति नहीं पकड़ रहा है। राजकीय इंटर कॉलेज केंद्र के उप नियंत्रक रणवीर सिंह नेे बताया कि उनके केंद्र पर 65 प्रतिशत मूल्यांकन हो चुका है, लेकिन शिक्षा शास्त्र, गृह विज्ञान, हिंदी, नागरिक शास्त्र आदि विषयों के परीक्षक कम होने से स्थिति विषम बनी हुई है।
अपात्रों को परीक्षक बनाने से भी खड़ी हुई समस्या
बोर्ड द्वारा अपात्रों को परीक्षक बना देने से भी मूल्यांकन की समस्या खड़ी हुई है। जानकारी के अनुसार बोर्ड द्वारा नियुक्त जो परीक्षक मूल्यांकन केंद्र पर पहुंच रहे हैं। उनमें बड़ी संख्या में ऐसे भी हैं, जिनके पास संबंधित विषय बीए तक ही है। जबकि जिस विषय का परीक्षक नियुक्त किया गया है वह शिक्षक उस विषय में एमए होना अनिवार्य है। परीक्षक क्वालीफाइड नहीं होने से केंद्रों से बैरंग भी किए जा रहे हैं।
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अन्यथा की स्थिति में समस्त परिषदीय कार्यों से डिबार करने की चेतावनी
यूपी बोर्ड की उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन करने के लिए नियुक्त वित्तविहीन कॉलेजों के परीक्षकों ने दसवें दिन भी कोई रुचि नहीं दिखाई। उनकी अनुपस्थिति के कारण मूल्यांकन कार्य बाधित हो रहा है। मुख्य नियंत्रक/ डीआईओएस डॉ. केएल वर्मा ने अनुपस्थित 195 परीक्षकों को नोटिस जारी कर रविवार को मूल्यांकन केंद्रों पर पहुंचने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ उन्होंने संबंधित प्रधानाचार्याें को भी नोटिस जारी करते हुए संबंधित शिक्षकों को तत्काल कार्यमुक्त करने के निर्देश दिए। साथ ही चेतावनी दी है कि यदि उन्होंने शिक्षकों को कार्यमुक्त नहीं किया तो उनके कॉलेज को समस्त परिषदीय कार्यों से डिबार करने की संस्तुति सचिव को भेज दी जाएगी।
डीआईओएस ने वित्तविहीन कॉलेजों के जिन 195 शिक्षकों को नोटिस जारी किए हैं, उनमें सर्वाधिक 94 शिक्षक तहसील जलालाबाद के हैं। इनके अलावा तहसील सदर के 24, पुवायां के 34 और तिलहर के 43 शिक्षक शामिल हैं। डीआईओएस ने बताया कि उन्हीं शिक्षकों को नोटिस जारी किए गए हैं, जिन विषयों की उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन होना शेष रह गया है और वह बोर्ड की ओर से इन्हीं विषयों के लिए परीक्षक नियुक्त किए गए हैं। मूल्यांकन केंद्रों के उप नियंत्रकों से मिली रिपोर्ट के अनुसार हाईस्कूल में गृह विज्ञान, संस्कृत और इंटर में हिंदी, गृह विज्ञान, शिक्षाशास्त्र, नागरिकशास्त्र, समाजशास्त्र आदि विषयों की कॉपियां सर्वाधिक होने के कारण मूल्यांकन पिछड़ रहा है।
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डीआईओएस ने वित्तविहीन कॉलेजों के प्रधानाचार्यों को भी नोटिस जारी करते हुए निर्देश दिए हैं कि वह संबंधित विषयों को शिक्षकों को तत्काल कार्यमुक्त करते हुए मूल्यांकन केंद्र पर भेजना सुनिश्चित करें, ताकि मूल्यांकन कार्य समय से पूरा कराया जा सके। अन्यथा संबंधित कॉलेजों को समस्त परिषदीय कार्यों से डिबार किए जाने की संस्तुति की जाएगी।
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हाईस्कूल का 67 और इंटर का 62 फीसदी मूल्यांकन
यूपी बोर्ड परीक्षा के लिए बनाए गए चार मूल्यांकन केंद्रों पर छोटे विषयों की उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन समाप्त हो चुका है, लेकिन मुख्य समस्या उन विषयों की हो रही है, जिन विषयों की कॉपियां हजारों में भेेजी गई हैं। उनके दर्जनभर परीक्षक भी नहीं जुट पाए हैं। हाईस्कूल मूल्यांकन केंद्र एसपी कॉलेज के उप नियंत्रक आरके शर्मा ने बताया कि वैसे तो उनके केंद्र पर लगभग 75 प्रतिशत मूल्यांकन पूरा हो चुका है, लेकिन हिंदी और सामाजिक विज्ञान के परीक्षक कम होने से समस्या खड़ी हो रही है। इसी तरह हाईस्कूल के दूसरे मूल्यांकन केंद्र एबी रिच इंटर कॉलेज के उपनियंत्रक मिहिर फिलिप्स बताते हैं कि उनके यहां करीब 62 प्रतिशत मूल्यांकन पूरा हो चुका है, लेकिन संस्कृत और गृह विज्ञान की उत्तर पुस्तिकाएं अधिक होने से मूल्यांकन पिछड़ रहा है।
इसी तरह इंटर के मूल्यांकन केंद्र इस्लामिया इंटर कॉलेज के उप नियंत्रक शाकिर अली ने बताया कि उनके केंद्र पर लगभग 60 प्रतिशत मूल्यांकन हो चुका है, लेकिन हिंदी, संस्कृत, समाजशास्त्र, नागरिक शास्त्र आदि विषयों का मूल्यांकन परीक्षकों के अभाव में गति नहीं पकड़ रहा है। राजकीय इंटर कॉलेज केंद्र के उप नियंत्रक रणवीर सिंह नेे बताया कि उनके केंद्र पर 65 प्रतिशत मूल्यांकन हो चुका है, लेकिन शिक्षा शास्त्र, गृह विज्ञान, हिंदी, नागरिक शास्त्र आदि विषयों के परीक्षक कम होने से स्थिति विषम बनी हुई है।
अपात्रों को परीक्षक बनाने से भी खड़ी हुई समस्या
बोर्ड द्वारा अपात्रों को परीक्षक बना देने से भी मूल्यांकन की समस्या खड़ी हुई है। जानकारी के अनुसार बोर्ड द्वारा नियुक्त जो परीक्षक मूल्यांकन केंद्र पर पहुंच रहे हैं। उनमें बड़ी संख्या में ऐसे भी हैं, जिनके पास संबंधित विषय बीए तक ही है। जबकि जिस विषय का परीक्षक नियुक्त किया गया है वह शिक्षक उस विषय में एमए होना अनिवार्य है। परीक्षक क्वालीफाइड नहीं होने से केंद्रों से बैरंग भी किए जा रहे हैं।