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हाईवे से हनुमान मंदिर हटाने के लिए प्रशासन और महंत में वार्ता, नतीजे का इंतजार
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तिलहर (शाहजहांपुर)। गांव कछियानी खेड़ा में लखनऊ-दिल्ली राष्ट्रीय राजमार्ग से प्राचीन हनुमान मंदिर को हटाने के लिए शुक्रवार को दूसरे दिन भी हरदोई क्षेत्र के रूपापुर चीनी मिल गेस्ट हाउस में मंदिर के बड़े महंत और प्रशासन के बीच वार्ता हुई। हालांकि अभी वार्ता का इंतजार है। मंदिर को दूसरी जगह स्थापित कराने के लिए कैबिनेट मंत्री सुरेश खन्ना मंदिर के महंत को मनाने में जुटे हैं। वहीं, मंदिर न हटाने को लेकर भाजपा, हिंदूवादी संगठनों के नेता और कुछ आस्थावान लोगों ने विरोध शुरू कर दिया है।
मंदिर हटाने को लेकर एनएचएआई (भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण) के अधिकारी प्रशासनिक अधिकारियों के साथ कई बार प्रयास कर चुके हैं, लेकिन हर बार विरोध का सामना करना पड़ा। वर्ष 2018 में मंदिर हटाने की पहली बार शुरू हुई कवायद के दौरान जबरदस्त आंदोलन हुआ था। इस दौरान मंदिर तोड़ने के प्रयास में कई जेसीबी मशीन खराब हो गईं थीं। अंतत: मंदिर हटाने का फैसला टालना पड़ा था। गत वर्ष भी मंदिर को हटाने को लेकर मंदिर के महंत रामलखन गिरी और उनके गुरु से वार्ता की गई, लेकिन बेनतीजा रही। इसके विपरीत, मंदिर चर्चा में आने से वहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ने लगी।
मंदिर में प्रत्येक मंगलवार को काफी संख्या में श्रद्धालु हनुमान जी को प्रसाद चढ़ाते हैं और तमाम लोग भंडारा करके आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। मंदिर के आसपास मंगलवार को तमाम दुकानें भी सजने लगी हैं। बृहस्पतिवार को मंत्री सुरेश खन्ना ने तिलहर चीनी मिल गेस्ट हाउस में महंत रामलखन गिरि और हिंदू संगठनों के पदाधिकारियों से वार्ता कर मंदिर हटाने का मसौदा प्रस्तुत किया, लेकिन अंतिम समय तक यह प्रस्ताव पारित नहीं हो सका। मंत्री के निर्देश पर शुक्रवार को दोबारा रूपापुर चीनी मिल में मंदिर के महंत और उनके वयोवृद्ध गुरु आदि के बीच वार्ता शुरू हुई, लेकिन अभी कोई निर्णय नहीं हो सका।
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मंदिर हटाने के विरोध में लगातार तेज हो रहे स्वर
भाजपा ग्रामीण मंडल की अध्यक्ष सविता वर्मा ने सोशल मीडिया पर पोस्ट की है कि मंदिर आस्था का प्रतीक है और उसे हटाना नहीं चाहिए। हिंदू युवा वाहिनी के जिला उपाध्यक्ष सिद्धार्थ गुप्ता ने कहा कि योगी सरकार में यदि मंदिर हटाया जाएगा तो हिंदू समाज की आस्था पर कुठाराघात होगा। प्राचीन मंदिर किसी भी सूरत में हटने नहीं दिया जाएगा। विश्व हिंदू परिषद के जिला सहमंत्री सुरेश शर्मा पप्पू ने कहा कि प्रशासन मंदिर हटाने की जिद पर अड़े रहने के बजाय अन्य विकल्प तलाशे। उन्होंने कहा कि हाईवे पर ओवरब्रिज बनाकर भी मंदिर को सुरक्षित किया जा सकता है। मंदिर के महंत रामलखन गिरी ने कहा कि प्राचीन मंदिर से हजारों श्रद्धालुओं की आस्था जुड़ी हुई है और उसे हटाना बिल्कुल उचित नहीं है, लेकिन अंतिम निर्णय हमारे गुरु महंत लेंगे। विधायक सलोना कुशवाहा ने कहा कि मंदिर आस्था का प्रश्न अवश्य है, लेकिन यातायात को लेकर सड़क दुर्घटना न हो इसके लिए भी सभी को ध्यान रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस मामले में पार्टी के वरिष्ठ नेता मंत्री खन्ना का जैसा निर्णय होगा, वह हम सभी को मान्य होना चाहिए।
एनएचएआई के अधिकारियों और महंत समेत मंदिर के अन्य कई समर्थकों के बीच द्विपक्षीय वार्ता शुक्रवार को दिनभर जारी रही। वार्ता सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है। उम्मीद है कि लोगों की मंदिर से जुड़ी आस्था का सम्मान करते हुए बीच को कोई रास्ता जल्द निकल आएगा, लेकिन इस बारे में अभी ज्यादा कुछ कहना अथवा बता पाना संभव नहीं है। - रामसेवक द्विवेदी, एडीएम प्रशासन।
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मंदिर हटाने को लेकर एनएचएआई (भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण) के अधिकारी प्रशासनिक अधिकारियों के साथ कई बार प्रयास कर चुके हैं, लेकिन हर बार विरोध का सामना करना पड़ा। वर्ष 2018 में मंदिर हटाने की पहली बार शुरू हुई कवायद के दौरान जबरदस्त आंदोलन हुआ था। इस दौरान मंदिर तोड़ने के प्रयास में कई जेसीबी मशीन खराब हो गईं थीं। अंतत: मंदिर हटाने का फैसला टालना पड़ा था। गत वर्ष भी मंदिर को हटाने को लेकर मंदिर के महंत रामलखन गिरी और उनके गुरु से वार्ता की गई, लेकिन बेनतीजा रही। इसके विपरीत, मंदिर चर्चा में आने से वहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ने लगी।
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मंदिर में प्रत्येक मंगलवार को काफी संख्या में श्रद्धालु हनुमान जी को प्रसाद चढ़ाते हैं और तमाम लोग भंडारा करके आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। मंदिर के आसपास मंगलवार को तमाम दुकानें भी सजने लगी हैं। बृहस्पतिवार को मंत्री सुरेश खन्ना ने तिलहर चीनी मिल गेस्ट हाउस में महंत रामलखन गिरि और हिंदू संगठनों के पदाधिकारियों से वार्ता कर मंदिर हटाने का मसौदा प्रस्तुत किया, लेकिन अंतिम समय तक यह प्रस्ताव पारित नहीं हो सका। मंत्री के निर्देश पर शुक्रवार को दोबारा रूपापुर चीनी मिल में मंदिर के महंत और उनके वयोवृद्ध गुरु आदि के बीच वार्ता शुरू हुई, लेकिन अभी कोई निर्णय नहीं हो सका।
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मंदिर हटाने के विरोध में लगातार तेज हो रहे स्वर
भाजपा ग्रामीण मंडल की अध्यक्ष सविता वर्मा ने सोशल मीडिया पर पोस्ट की है कि मंदिर आस्था का प्रतीक है और उसे हटाना नहीं चाहिए। हिंदू युवा वाहिनी के जिला उपाध्यक्ष सिद्धार्थ गुप्ता ने कहा कि योगी सरकार में यदि मंदिर हटाया जाएगा तो हिंदू समाज की आस्था पर कुठाराघात होगा। प्राचीन मंदिर किसी भी सूरत में हटने नहीं दिया जाएगा। विश्व हिंदू परिषद के जिला सहमंत्री सुरेश शर्मा पप्पू ने कहा कि प्रशासन मंदिर हटाने की जिद पर अड़े रहने के बजाय अन्य विकल्प तलाशे। उन्होंने कहा कि हाईवे पर ओवरब्रिज बनाकर भी मंदिर को सुरक्षित किया जा सकता है। मंदिर के महंत रामलखन गिरी ने कहा कि प्राचीन मंदिर से हजारों श्रद्धालुओं की आस्था जुड़ी हुई है और उसे हटाना बिल्कुल उचित नहीं है, लेकिन अंतिम निर्णय हमारे गुरु महंत लेंगे। विधायक सलोना कुशवाहा ने कहा कि मंदिर आस्था का प्रश्न अवश्य है, लेकिन यातायात को लेकर सड़क दुर्घटना न हो इसके लिए भी सभी को ध्यान रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस मामले में पार्टी के वरिष्ठ नेता मंत्री खन्ना का जैसा निर्णय होगा, वह हम सभी को मान्य होना चाहिए।
एनएचएआई के अधिकारियों और महंत समेत मंदिर के अन्य कई समर्थकों के बीच द्विपक्षीय वार्ता शुक्रवार को दिनभर जारी रही। वार्ता सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है। उम्मीद है कि लोगों की मंदिर से जुड़ी आस्था का सम्मान करते हुए बीच को कोई रास्ता जल्द निकल आएगा, लेकिन इस बारे में अभी ज्यादा कुछ कहना अथवा बता पाना संभव नहीं है। - रामसेवक द्विवेदी, एडीएम प्रशासन।