{"_id":"b15fe8e753189122215810ca952d7d14","slug":"national-sportsman-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"प्रतिभा तराशने में जुटे राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
प्रतिभा तराशने में जुटे राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी
रोजा।
Updated Sun, 08 Feb 2015 11:12 PM IST
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‘हम भी दरिया हैं हमें अपना हुनर मालूम है, जिस तरफ भी चल पड़ेंगे रास्ता बन जाएगा’। अपने हौसले और मेहनत के बल पर राष्ट्रीय स्तर पर वॉलीबाल के क्षेत्र में अपना सिक्का जमा चुके चंद्र प्रकाश यादव उर्फ चंदर, नत्थू, अशोक कुमार और राजेश कुमार सिंह वह शख्सियत हैं, जिन पर जनपद को गर्व करना चाहिए। इन खिलाड़ियों ने सीमित साधनों के बीच वह मुकाम हासिल किया, जो बिरले ही कर पाते हैं। आज यह सभी अपना पैसा खर्च कर गांव-गांव वॉलीबाल की अलख जगा रहे हैं। इनका काम प्रतिभाओं को तलाशना और तराशना है।
चंदर ने खेल के कारण छोड़ी नौकरी
चंद्र प्रकाश यादव ने 1982 से 2014 तक वॉलीबाल के मैदान में धमाल मचाया। इस दौरान उन्होंने अपने खेल के बल पर राष्ट्रीय स्तर टूर्नामेंटों में नौ बार हिस्सा लिया और चार बार गोल्ड मेडल जीता है। जनपद रत्न से सम्मानित हो चुके चंद्र प्रकाश ने खेल के कारण ओसीएफ की नौकरी छोड़ दी थी। इन्हें प्रदेश की युवा टीम का कोच होने के साथ राष्ट्रीय स्तर पर रेफरी की भूमिका निभा रहे हैं। यादव का कहना है कि क्रिकेट की तरह वॉलीबाल में पैसा भले ही न हो, लेकिन प्रतिभाओं की कमी नहीं है। उनका मकसद ऐसी प्रतिभाओं को तलाशना और तराशना है।
नत्थू की हर जगह जमी धाम
अपने ही जिले के ओम प्रकाश उर्फ नत्थू हैं जिन्होंने 1968 से लेकर 1991 तक जिले की वॉलीबाल टीम का प्रतिनिधित्व किया। वह स्टेट और नेशनल तक खेल चुके हैं। अपने खेल के बल पर रेलवे, पीएसी, चीनी मिलों में इनका चयन हुआ है। नत्थू 65 साल की उम्र में भी उतने ही चुस्त और दुरूस्त हैं, जितने की युवाकाल में थे, इनका भी मकसद युवाओं को तलाशकर अच्छा खिलाड़ी बनाना है।
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थानाध्यक्ष राजेश हैं दमदार खिलाड़ी
राजेश कुमार सिंह खुटार में थानाध्यक्ष हैं। पहले रेलवे में नौकरी करतेे थे। राजेश कुमार सिंह के खेल से प्रभावित होकर आईजी ने 2004 में इन्हें सीधे उप निरीक्षक पद पर प्रमोशन किया। वह राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी हैं और कई पदक जीत चुके हैं। खेल के साथ पुलिस की भूमिका में वह खरे उतर रहे हैं। खेल के प्रति समर्पित होने के कारण वह अपनी तैनाती स्थल पर भी वॉलीबाल का नियमित अभ्यास करते रहते हैं।
अशोक ने तैयार किए कई होनहार खिलाड़ी
रेलवे के मनोरंजन सदन के खेल सचिव और लोको पायलट के पद पर अशोक कुमार तैनात हैं। खेल के प्रति इतने समर्पित हैं कि उन्होंने स्वयं ग्राउंड तैयार कर कालोनी के युवाओं को आगे बढ़ाना शुरू कर दिया है। अशोक बताते हैं कि उनके द्वारा तैयार किए लड़के इस समय सेना, पुलिस और अन्य विभिन्न विभागों में नौकरी पा चुके हैं, लेकिन इनको रेलवे के स्थानीय अधिकारियों और यूनियन के नेताओं का साथ नहीं मिल रहा है।
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चंदर ने खेल के कारण छोड़ी नौकरी
चंद्र प्रकाश यादव ने 1982 से 2014 तक वॉलीबाल के मैदान में धमाल मचाया। इस दौरान उन्होंने अपने खेल के बल पर राष्ट्रीय स्तर टूर्नामेंटों में नौ बार हिस्सा लिया और चार बार गोल्ड मेडल जीता है। जनपद रत्न से सम्मानित हो चुके चंद्र प्रकाश ने खेल के कारण ओसीएफ की नौकरी छोड़ दी थी। इन्हें प्रदेश की युवा टीम का कोच होने के साथ राष्ट्रीय स्तर पर रेफरी की भूमिका निभा रहे हैं। यादव का कहना है कि क्रिकेट की तरह वॉलीबाल में पैसा भले ही न हो, लेकिन प्रतिभाओं की कमी नहीं है। उनका मकसद ऐसी प्रतिभाओं को तलाशना और तराशना है।
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नत्थू की हर जगह जमी धाम
अपने ही जिले के ओम प्रकाश उर्फ नत्थू हैं जिन्होंने 1968 से लेकर 1991 तक जिले की वॉलीबाल टीम का प्रतिनिधित्व किया। वह स्टेट और नेशनल तक खेल चुके हैं। अपने खेल के बल पर रेलवे, पीएसी, चीनी मिलों में इनका चयन हुआ है। नत्थू 65 साल की उम्र में भी उतने ही चुस्त और दुरूस्त हैं, जितने की युवाकाल में थे, इनका भी मकसद युवाओं को तलाशकर अच्छा खिलाड़ी बनाना है।
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थानाध्यक्ष राजेश हैं दमदार खिलाड़ी
राजेश कुमार सिंह खुटार में थानाध्यक्ष हैं। पहले रेलवे में नौकरी करतेे थे। राजेश कुमार सिंह के खेल से प्रभावित होकर आईजी ने 2004 में इन्हें सीधे उप निरीक्षक पद पर प्रमोशन किया। वह राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी हैं और कई पदक जीत चुके हैं। खेल के साथ पुलिस की भूमिका में वह खरे उतर रहे हैं। खेल के प्रति समर्पित होने के कारण वह अपनी तैनाती स्थल पर भी वॉलीबाल का नियमित अभ्यास करते रहते हैं।
अशोक ने तैयार किए कई होनहार खिलाड़ी
रेलवे के मनोरंजन सदन के खेल सचिव और लोको पायलट के पद पर अशोक कुमार तैनात हैं। खेल के प्रति इतने समर्पित हैं कि उन्होंने स्वयं ग्राउंड तैयार कर कालोनी के युवाओं को आगे बढ़ाना शुरू कर दिया है। अशोक बताते हैं कि उनके द्वारा तैयार किए लड़के इस समय सेना, पुलिस और अन्य विभिन्न विभागों में नौकरी पा चुके हैं, लेकिन इनको रेलवे के स्थानीय अधिकारियों और यूनियन के नेताओं का साथ नहीं मिल रहा है।