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नदियों में प्रदूषण, खनन और वनों के कटान पर राष्ट्रीय हरित अधिकरण गंभीर

Mon, 21 Sep 2020 01:08 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Mon, 21 Sep 2020 01:08 AM IST
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National Green Tribunal serious on pollution in rivers, mining and deforestation
शाहजहांपुर। जिले की नदियों में बढ़ते प्रदूषण, रेता-बालू के खनन और जंगलों में अवैध कटान को लेकर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) गंभीर हो गया है। पर्यावरण की सुरक्षा और सामुदायिक हितों के लिए समर्पित संस्था पृथ्वी की ओर से मामले में गत वर्ष की गई शिकायत को एनजीटी के चेयरमैन ने याचिका में बदल दिया है। साथ ही इस बारे में आवश्यक कार्रवाई के लिए उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को अधिकृत किया है। बोर्ड के मुख्य पर्यावरण अधिकारी ने बरेली स्थित क्षेत्रीय अधिकारी को भेजे पत्र में एनजीटी के आदेश का उल्लेख करते हुए नदियों में प्रदूषण, खनन और वन संपदा के कटान पर रोक लगाने को जिला प्रशासन और राज्य सरकार से एक माह के अंदर कार्रवाई सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए हैं।
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गत वर्ष जिले की पर्यावरण प्रदूषण से जुड़ी समस्याओं को लेकर पृथ्वी के अध्यक्ष डॉ. विकास खुराना ने एनजीटी को पत्र भेजा था। उसमें यह भी बताया था कि गर्रा में कई स्थानों पर जेसीबी लगाकर रेता-बालू का खनन कर नदी को खोखला किया जा रहा है। पत्र मेें चीनी मिल समेत अन्य कारखानों से निर्गत विषैले जल से मछलियों के मरने के मामले का उल्लेख करने के साथ यह भी कहा गया था कि जनपद के उत्तर दिशा मेें फैले जंगलों में अवैध कटान हो रहा है। शुरुआती जांच में लीपापोती हुई, लेकिन एनजीटी के चेयरमैन ने जांच आख्या से असंतुष्टि जाहिर कर शिकायत को याचिका मेें परिवर्तित कर दिया। इस बारे में प्रदेश के मुख्य पर्यावरण अधिकारी (वृत्त-7) अमित चंद्रा के स्तर से जारी कार्रवाई संबंधी आदेश की प्रति गत बुधवार को एडीएम प्रशासन और एसडीएम सदर को भी प्राप्त करा दी गई है।
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नदियों में प्रदूषण बढ़ने के कई कारण
महानगर में छोटे-बड़े करीब दो दर्जन नालों के जरिये निकल रही गंदगी गर्रा और खन्नौत नदियों में बहाई जा रही है। लॉकडाउन खुलने के बाद महानगर के अंदर करीब 50-60 डेयरियों के दुधारू पशु भी नदी तटों पर गंदगी बिखेरने के साथ नदियों को मैला कर रहे हैं। कभी आचमन में उपयोग किया जाने वाला गर्रा का पानी अब खेतों की सिंचाई के लायक भी नहीं माना जाता। शहर मेें दोनों नदियों के किनारे गंदगी से काले पड़ गए हैं। लॉकडाउन से पहले तक नदियां इतनी निर्मल हो गईं कि उनकी तलहटी दिखने लगी, लेकिन अब मटमैले, धूसर पानी का बहाव हो रहा है।
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कन्नौज के पास गंगा में मरी थीं मछलियां
दो वर्ष पहले रोजा चीनी मिल के शीरा स्टोर की दीवार ढहने से केमिकल युक्त शीरा की बड़ी मात्रा बहकर गर्रा नदी में चली गई। बाद में यही विषाक्त शीरा रामगंगा नदी से होकर गंगा में मिला को कन्नौज के पास गंगा में हजारों मछलियां मरकर उतराने लगीं। स्नान करने वालों की शिकायत पर जांच की गई तो पता चला कि विषाक्त शीरा रोजा मिल से उत्सर्जित हुआ था। मामले मेें राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने मिल पर लाखों रुपये का जुर्माना ठोंका और उसकी समय से अदायगी नहीं होने पर मिल बंद करने का नोटिस जारी किया था। बाद में मिल प्रबंधन ने जुर्माना अदा कर मिल को बंद होने से बचाया।
नदियों में खनन के जिले में तमाम ठिकाने
न सिर्फ गर्रा बल्कि बहगुल, रामगंगा, गंगा, गोमती आदि नदियों से अवैध खनन कोई नई बात नहीं है। खनन माफिया ने नदियां खोखली करने के सदर समेत जलालाबाद, जैतीपुर, पुवायां, सिंधौली, खुटार, तिलहर, निगोही आदि स्थानों पर दो दर्जन से ज्यादा ठिकाने बना रखे हैं। उच्च न्यायालय से गत वर्ष नदियों से अवैध खनन पर रोक लगाने का आदेश भी पारित हो चुका है, लेकिन खनन माफिया पुलिस और नेताओं के गठजोड़ से सरकारी तंत्र पर हावी हैं। गत वर्ष खनन के आधा दर्जन ठेके जारी हुए, लेकिन इससे कई गुना अधिक स्थानों पर रेता-बालू की निकासी हो रही है।
पर्यावरण की रक्षा को करने होंगे कई उपाय
पर्यावरण की रक्षा केवल पौधरोपण से नहीं होगी, बल्कि इसके लिए जल संरक्षण और जैविक खेती को बढ़ावा देने के साथ अन्य उपाय भी करने होंगे। रासायनिक उर्वरकों में लेड, कॉपर सल्फेट, आर्सेनिक, कैडमियम आदि भारी तत्वों समेत जिंक, यूरिया, सायनाइड के अयस्क भी होते हैं जो फसलों के माध्यम से शरीर में पहुंचकर किडनी, लीवर, आंत, त्वचा आदि से संबंधित बीमारियां पैदा कर देते हैं। सरकार सप्ताह में एक दिन आटो ऑफ करने का कानून बना दे तो वाहन नहीं चलने से वायु प्रदूषण कम होगा और पेट्रोलियम आयात पर खर्च होने वाली विदेशी मुद्रा की बचत से अर्थ व्यवस्था भी सुधरेगी।
- डॉ. रवि मोहन, चिकित्सक
हवा में बढ़ रही कार्बन मोनोऑक्साइड
सड़कों पर वाहनों की संख्या बढ़ती संख्या और खुटार क्षेत्र में रही-बची वन संपदा के तेजी से सफाए के कारण हवा में कार्बन मोनोऑक्साइड मुख्य प्रदूषक तत्व बनकर उभरी है। एक्यूआई (वायु गुणवत्ता सूचकांक) का आदर्श मानक 0-50 है, लेकिन अब महानगर में कई स्थानों पर एक्यूआई स्तर 62 से 70 तक पहुंच गया है। नदियों में प्रदूषण से जलचरों की कई प्रजातियां विलुप्त हो रही हैं। ऐसे में पर्यावरण की रक्षा के लिए एनजीटी का कदम जनपद के लिए शुभ संकेत है। एनजीटी के आदेश पर कार्रवाई मेें भले ही थोड़ा समय लगे, लेकिन उम्मीद है प्रशासन और जागरूक नागरिकों के सामुदायिक सहयोग से जिले की नदियों और वन संपदा की रक्षा हो सकेगी।

-डॉ. विकास खुराना, अध्यक्ष, पर्यावरण को समर्पित संस्था
प्रदूषण की रोकथाम के लिए एनजीटी का एक आदेश प्राप्त हुआ है। नदियों में प्रदूषण रोकने के लिए आदेश की प्रति नगर निगम को भेजी गई है। एनजीटी के इससे पूर्व जारी आदेश भी नगर निगम को उपलब्ध कराए जा चुके हैं। अवैध खनन और वन संपदा के कटान पर रोक लगाने के लिए संबंधित विभागों के अधिकारियों को आवश्यक दिशा निर्देश दिए जा रहे हैं।
- रामसेवक द्विवेदी, एडीएम प्रशासन
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