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नैनो कार्बन ट्यूब से दूर किया जा सकता है कैंसर
अमर उजाला ब्यूरो/अजय अवस्थी
Updated Sat, 26 Nov 2016 11:44 PM IST
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टेक्नोलॉजी
- फोटो : अमर उजाला
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एमजेपी रुहेलखंड विवि के कुलपति की नैनो टेक्नोलॉजी पाठ्यक्रमों का हिस्सा बनी
एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर मुशाहिद हुसैन की नैनो टेक्नोलॉजी कैंसर जैसे घातक रोग के निवारण में उपयोगी साबित होगी। इस बात का दावा शनिवार को जीएफ कॉलेज में शुरू हुए नेशनल सेमिनार में कुलपति ने किया। बाद में उन्होंने अमर उजाला सेे बातचीत में बताया कि इस टेक्नोलॉजी को सीबीएसई बोर्ड समेत अन्य विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रम में भी शामिल किया जा चुका है।
कुलपति ने बताया कि नैनो पार्टिकल इतने सूक्ष्म होते हैं कि इनके माध्यम से कैंसर जैसे घातक रोग का भी सफल इलाज किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि जिस विधि से कैंसर का इलाज कर उसके टिश्यू को बर्न किया जाता है। उससे कैंसर टिश्यू रेडिएशन में ठीक तरह से बर्न नहीं हो पाते हैं। नैनो कार्बन ट्यूब कैंसर के टिश्यू रेडिएशन को बर्न करने में सफल होंगे, क्योंकि नैनो पार्टिकल एक मिलीमीटर के दस लाखवें भाग के बराबर छोटे होते हैं। उन्होंने बताया कि कैंसर के टिश्यू काफी बड़े होते हैं, इसलिए नैनो कार्बन ट्यूब ही इसका निदान कर सकते हैं।
कुलपति ने बताया कि नैनो टेक्नोलॉजी का उपयोग चिकित्सा के साथ कॉस्मेटिक, वस्त्र, पेंट्स आदि में भी होने लगा है। इसकी सहायता से बनने वाले उत्पाद अपेक्षाकृत टिकाऊ होते हैं। नैनो टेक्नालॉजी पर विश्व भर में रिसर्च चल रहा है। शीघ्र ही यह जीवन का हिस्सा बन जाएगी। नैनो टेक्नोलॉजी सीबीएसई बोर्ड समेत कई विश्वविद्यालयों में स्वीकार की जा चुकी है। इसे पाठ्यक्रम में शामिल कर छात्र-छात्राओं को अत्याधुनिक जानकारी दी जा रही है। विद्यार्थियों में इसके प्रति रुझान देखने को मिल रहा है।
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वनस्पति विज्ञान में भी उपयोगी है नैनो टेक्नोलॉजी
जीएफ कॉलेज में नेशनल सेमिनार के उद्घाटन पर कुलपति का उद्बोधन
अतिथियों ने स्मारिका और दो पुस्तकों का विमोचन भी किया
जीएफ कॉलेज में दो दिवसीय नेशनल सेमिनार शनिवार को शुरू हो गया। वनस्पति विज्ञान विभाग के तत्वाधान में शुरू हुए एडवांसेज इन प्लांट साइंस फ्रंटियर: डेवलपमेंट एंड इनवायरमेंट विषयक सेमिनार में मुख्य अतिथि एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर मुशाहिद हुसैन ने वनस्पति विज्ञान के क्षेत्र में नैनो टेक्नोलॉजी के उपयोग पर प्रकाश डाला।
कुलपति ने कहा कि नैनो टेक्नोलॉजी का उपयोग विभिन्न विषयों के साथ चिकित्सा क्षेत्र में भी किया जा सकता है। इतना ही नहीं इसके बेहतर परिणाम भी सामने आए हैं। इस बीच उन्होंने प्रोजेक्टर के माध्यम से नैनो टेक्नोलॉजी की खूबियों से सभी को अवगत कराते हुए इस क्षेत्र में काम करने के लिए प्रेरित किया। इस अवसर पर नेशनल बोटेनिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट लखनऊ के प्रोफेसर तारिक हुसैन, डॉ. बीआर अंबेडकर विश्वविद्यालय लखनऊ की डॉ. संगीता सक्सेना और सुनील बाबू अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के डॉ. अनवर शहजाद आदि ने भी विचार व्यक्त किए।
भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग से प्रायोजित सेमिनार का शुभारंभ वकील अहमद ने तिलावते कुरआन का पाठ और महाविद्यालय के विद्यार्थियों ने नात प्रस्तुत कर किया।
अतिथियों ने सेमिनार की स्मारिका और वनस्पति विज्ञान विभाग के डॉ. सईद अख्तर द्वारा संपादित एवं स्प्रिंगर पब्लिकेशन स्विटजरलैंड से प्रकाशित दो पुस्तकों को विमोचन किया। पूर्व में डॉ. अजहर सज्जाद ने विषय स्थापना करते की और प्राचार्य डॉ. अकील अहमद ने स्वागत भाषण प्रस्तुत किया। आयोजन सचिव डॉ. अकील अहमद ने आभार व्यक्त किया।
डॉ. अब्दुल मोमिन के संचालन में चले उद्घाटन सत्र में डॉ. दानिश, पुष्पेंद्र सिंह, निकिता शुक्ला, सैफुद्दीन, रफीउल अमीन, तायबा सईद, जीशान, अदनान, सुनील कुमार, रेनू चौधरी, डॉ. नीरज आदि ने शोधपत्रों का वाचन किया। इस अवसर पर प्रबंध समिति के अध्यक्ष मलक अब्दुल वाहिद खां, खालिद अलवी, एसएस कॉलेज प्राचार्य डॉ. अवनीश कुमार मिश्र, डॉ. प्रभात शुक्ला, डॉ. मदनलाल, डॉ. अजय तिवारी, डॉ. जमील अहमद, डॉ. नईमुद्दीन सिद्दीकी, डॉ. मुर्शिद हुसैन, डॉ. फरोग खुमार, डॉ. फैयाज अहदम, डॉ. आयशा जेबी, डॉ. दरख्शां, डॉ. युक्ति माथुर, डॉ. कहकशां, डॉ. शबाना साजिद, डॉ. आभा त्रिवेदी आदि मौजूद रहीं।
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एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर मुशाहिद हुसैन की नैनो टेक्नोलॉजी कैंसर जैसे घातक रोग के निवारण में उपयोगी साबित होगी। इस बात का दावा शनिवार को जीएफ कॉलेज में शुरू हुए नेशनल सेमिनार में कुलपति ने किया। बाद में उन्होंने अमर उजाला सेे बातचीत में बताया कि इस टेक्नोलॉजी को सीबीएसई बोर्ड समेत अन्य विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रम में भी शामिल किया जा चुका है।
कुलपति ने बताया कि नैनो पार्टिकल इतने सूक्ष्म होते हैं कि इनके माध्यम से कैंसर जैसे घातक रोग का भी सफल इलाज किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि जिस विधि से कैंसर का इलाज कर उसके टिश्यू को बर्न किया जाता है। उससे कैंसर टिश्यू रेडिएशन में ठीक तरह से बर्न नहीं हो पाते हैं। नैनो कार्बन ट्यूब कैंसर के टिश्यू रेडिएशन को बर्न करने में सफल होंगे, क्योंकि नैनो पार्टिकल एक मिलीमीटर के दस लाखवें भाग के बराबर छोटे होते हैं। उन्होंने बताया कि कैंसर के टिश्यू काफी बड़े होते हैं, इसलिए नैनो कार्बन ट्यूब ही इसका निदान कर सकते हैं।
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कुलपति ने बताया कि नैनो टेक्नोलॉजी का उपयोग चिकित्सा के साथ कॉस्मेटिक, वस्त्र, पेंट्स आदि में भी होने लगा है। इसकी सहायता से बनने वाले उत्पाद अपेक्षाकृत टिकाऊ होते हैं। नैनो टेक्नालॉजी पर विश्व भर में रिसर्च चल रहा है। शीघ्र ही यह जीवन का हिस्सा बन जाएगी। नैनो टेक्नोलॉजी सीबीएसई बोर्ड समेत कई विश्वविद्यालयों में स्वीकार की जा चुकी है। इसे पाठ्यक्रम में शामिल कर छात्र-छात्राओं को अत्याधुनिक जानकारी दी जा रही है। विद्यार्थियों में इसके प्रति रुझान देखने को मिल रहा है।
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वनस्पति विज्ञान में भी उपयोगी है नैनो टेक्नोलॉजी
जीएफ कॉलेज में नेशनल सेमिनार के उद्घाटन पर कुलपति का उद्बोधन
अतिथियों ने स्मारिका और दो पुस्तकों का विमोचन भी किया
जीएफ कॉलेज में दो दिवसीय नेशनल सेमिनार शनिवार को शुरू हो गया। वनस्पति विज्ञान विभाग के तत्वाधान में शुरू हुए एडवांसेज इन प्लांट साइंस फ्रंटियर: डेवलपमेंट एंड इनवायरमेंट विषयक सेमिनार में मुख्य अतिथि एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर मुशाहिद हुसैन ने वनस्पति विज्ञान के क्षेत्र में नैनो टेक्नोलॉजी के उपयोग पर प्रकाश डाला।
कुलपति ने कहा कि नैनो टेक्नोलॉजी का उपयोग विभिन्न विषयों के साथ चिकित्सा क्षेत्र में भी किया जा सकता है। इतना ही नहीं इसके बेहतर परिणाम भी सामने आए हैं। इस बीच उन्होंने प्रोजेक्टर के माध्यम से नैनो टेक्नोलॉजी की खूबियों से सभी को अवगत कराते हुए इस क्षेत्र में काम करने के लिए प्रेरित किया। इस अवसर पर नेशनल बोटेनिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट लखनऊ के प्रोफेसर तारिक हुसैन, डॉ. बीआर अंबेडकर विश्वविद्यालय लखनऊ की डॉ. संगीता सक्सेना और सुनील बाबू अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के डॉ. अनवर शहजाद आदि ने भी विचार व्यक्त किए।
भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग से प्रायोजित सेमिनार का शुभारंभ वकील अहमद ने तिलावते कुरआन का पाठ और महाविद्यालय के विद्यार्थियों ने नात प्रस्तुत कर किया।
अतिथियों ने सेमिनार की स्मारिका और वनस्पति विज्ञान विभाग के डॉ. सईद अख्तर द्वारा संपादित एवं स्प्रिंगर पब्लिकेशन स्विटजरलैंड से प्रकाशित दो पुस्तकों को विमोचन किया। पूर्व में डॉ. अजहर सज्जाद ने विषय स्थापना करते की और प्राचार्य डॉ. अकील अहमद ने स्वागत भाषण प्रस्तुत किया। आयोजन सचिव डॉ. अकील अहमद ने आभार व्यक्त किया।
डॉ. अब्दुल मोमिन के संचालन में चले उद्घाटन सत्र में डॉ. दानिश, पुष्पेंद्र सिंह, निकिता शुक्ला, सैफुद्दीन, रफीउल अमीन, तायबा सईद, जीशान, अदनान, सुनील कुमार, रेनू चौधरी, डॉ. नीरज आदि ने शोधपत्रों का वाचन किया। इस अवसर पर प्रबंध समिति के अध्यक्ष मलक अब्दुल वाहिद खां, खालिद अलवी, एसएस कॉलेज प्राचार्य डॉ. अवनीश कुमार मिश्र, डॉ. प्रभात शुक्ला, डॉ. मदनलाल, डॉ. अजय तिवारी, डॉ. जमील अहमद, डॉ. नईमुद्दीन सिद्दीकी, डॉ. मुर्शिद हुसैन, डॉ. फरोग खुमार, डॉ. फैयाज अहदम, डॉ. आयशा जेबी, डॉ. दरख्शां, डॉ. युक्ति माथुर, डॉ. कहकशां, डॉ. शबाना साजिद, डॉ. आभा त्रिवेदी आदि मौजूद रहीं।