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मयूर नृत्य देख श्रद्धालु गदगद
शाहजहांपुर।
Updated Sun, 29 Nov 2015 11:55 PM IST
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मुमुक्षु मेला के पांचवें दिन रास लीला में भगवान श्रीकृष्ण के जीवन से जुड़ी दुर्लभ कथाओं का मंचन किया गया। इस बीच मेला में श्रद्धालुओं ने जरूरत के हिसाब से खूब खरीददारी की और मंदिरों तथा ऋषियों की दिव्य प्रतिमाओं पर प्रसाद अर्पित कर सुख-समृद्धि की कामना की। इस बीच श्रद्धालुओं ने मयूर नृत्य का आनंद लिया।
रासलीला में दिखाया गया कि एक बार एक ऋषि सूर्य भगवान को जल दे रहे थे। तभी एक चित्रसेन नाम का गंधर्व वहां से पुष्पक विमान से निकला और वह उस समय पान खा रहा था, उसने पान को ऋषि के ऊपर थूक दिया। ऋषि उसको श्राप देने वाले थे कि तभी नारद जी ने आकर ऋषि को समझाया कि आप अपने तप को नष्ट क्यों कर रहे है, पास ही द्वारिकाधीश जी रहते है उनसे इसका शीश मांग लीजिए। उन्होंने जब कृष्ण से कहा तो कृष्ण ने ऋषि को वचन दिया कि कल सूर्यास्त तक मैं इसका शीश आपके चारणों में अर्पित कर दूंगा। यह सारा वृतांत नारद ने चित्रसेन सुना दिया। तब नारद ने उपाय बताया कि तुमको अर्जुन के सिवा और कोई नहीं बचा सकता।
इसी प्रसंग को आगे बढ़ाते हुए अर्जुन ने चित्रसेन से कहा तुम गंगा जी में जाकर खड़े हो जाओ और कृष्ण नाम का जप करो। उसने वैसा ही किया जब कृष्ण ने चित्रसेन को मारने के लिये शक्ति का प्रयोग किया तो वह शक्ति चित्रसेन की परिक्रमा करके वापस आ गई, क्योंकि कृष्ण भक्त पर शक्ति काम नहीं करती थी। तब श्रीकृष्ण स्वयं उसको मारने के लिये गये। श्रीकृष्ण ने जब अर्जुन को देखा तब सब समझ गये और युद्ध करने लगे। रासलीला का शुभारंभ मुख्य यजमान सांसद कृष्णा राज रहीं।
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व्यवस्था में मेला प्रभारी चंद्रभान त्रिपाठी, सुनील चौहान, अमित सिंह, दिनेश प्रताप, मिथलेश, सुरेश, अमित सैनी, सुरेश पाल, भानु प्रताप सिंह, रावेंद्र कुमार, रामबाबू, ब्रजेश शुक्ला, शिवओम शर्मा, मिर्जा अख्तर, रमेश चन्द्र, वासू त्रिपाठी आदि का सहयोग रहा।
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रासलीला में दिखाया गया कि एक बार एक ऋषि सूर्य भगवान को जल दे रहे थे। तभी एक चित्रसेन नाम का गंधर्व वहां से पुष्पक विमान से निकला और वह उस समय पान खा रहा था, उसने पान को ऋषि के ऊपर थूक दिया। ऋषि उसको श्राप देने वाले थे कि तभी नारद जी ने आकर ऋषि को समझाया कि आप अपने तप को नष्ट क्यों कर रहे है, पास ही द्वारिकाधीश जी रहते है उनसे इसका शीश मांग लीजिए। उन्होंने जब कृष्ण से कहा तो कृष्ण ने ऋषि को वचन दिया कि कल सूर्यास्त तक मैं इसका शीश आपके चारणों में अर्पित कर दूंगा। यह सारा वृतांत नारद ने चित्रसेन सुना दिया। तब नारद ने उपाय बताया कि तुमको अर्जुन के सिवा और कोई नहीं बचा सकता।
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इसी प्रसंग को आगे बढ़ाते हुए अर्जुन ने चित्रसेन से कहा तुम गंगा जी में जाकर खड़े हो जाओ और कृष्ण नाम का जप करो। उसने वैसा ही किया जब कृष्ण ने चित्रसेन को मारने के लिये शक्ति का प्रयोग किया तो वह शक्ति चित्रसेन की परिक्रमा करके वापस आ गई, क्योंकि कृष्ण भक्त पर शक्ति काम नहीं करती थी। तब श्रीकृष्ण स्वयं उसको मारने के लिये गये। श्रीकृष्ण ने जब अर्जुन को देखा तब सब समझ गये और युद्ध करने लगे। रासलीला का शुभारंभ मुख्य यजमान सांसद कृष्णा राज रहीं।
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व्यवस्था में मेला प्रभारी चंद्रभान त्रिपाठी, सुनील चौहान, अमित सिंह, दिनेश प्रताप, मिथलेश, सुरेश, अमित सैनी, सुरेश पाल, भानु प्रताप सिंह, रावेंद्र कुमार, रामबाबू, ब्रजेश शुक्ला, शिवओम शर्मा, मिर्जा अख्तर, रमेश चन्द्र, वासू त्रिपाठी आदि का सहयोग रहा।