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मां की ममता पर भारी पड़ा नौकरी का मोह
पीयूष दुबे /शाहजहांपुर।
Updated Tue, 23 Jun 2015 09:15 PM IST
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बेरोजगारी के इस दौर मेें नौकरी की अहमियत काफी बढ़ गई है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि मां की ममता के आगे नौकरी का मोह भारी पड़ रहा है। जिले में तमाम गर्भवती महिलाएं ब्लाक संसाधन केंद्रों पर बतौर प्रशिक्षु शिक्षक नियमित प्रशिक्षण ले रही हैं। नौकरी का मोह कोख में पल रहे बच्चे की चिंता पर भारी पड़ रहा है। डॉक्टरों की मानें तो छह माह से अधिक गर्भवती के लगातार सफर करने से बच्चा और जच्चा दोनों को समस्याएं हो सकती हैं।
प्रदेश में 72,825 प्रशिक्षु शिक्षक भर्ती प्रक्रिया के तहत जिले में करीब 2550 प्रशिक्षुओं की भर्ती हो चुकी है। इनमें तमाम महिला प्रशिक्षु गर्भवती हैं। कई महिला प्रशिक्षुओं को तो छह माह से अधिक का गर्भ है। बावजूद इसके वे रोजाना प्रशिक्षण प्राप्त करने के लिए बीआरसी पहुंच रही हैं। सड़कों की खराब हालत और तेज धूप, गर्मी में सफर करने की वजह से गर्भस्थ शिशु की जान को खतरा बना रहता है। अधिकांश गर्भवती प्रशिक्षु सैद्घांतिक प्रशिक्षण से प्रसूति अवकाश नहीं ले रही हैं। इस बारे में बात की गई तो पता चला कि वे इस डर से अवकाश नहीं ले रहीं हैं कि इससे नियुक्ति मिलने में देरी हो जाएगी।
ददरौली बीआरसी में प्रशिक्षण ले रहीं प्रशिक्षु ऋतु बांगा को आठ माह का गर्भ है। उन्होंने अवकाश के लिए प्रार्थना पत्र भी दिया, लेकिन खंड शिक्षा अधिकारी ने उस पर कोई तवज्जो नहीं दी। लिहाजा वह रोजाना प्रशिक्षण लेने के लिए बीआरसी पहुंचने को मजबूर हैं। सात माह की गर्भवती बबिता कुमारी का कहना है कि डेढ़ माह का प्रशिक्षण पूरा होने को है। अब अवकाश लेंगे तो नियुक्ति के लिए इंतजार करना पड़ेगा। बोलीं, परेशानी तो होती है, लेकिन नौकरी को भी नहीं छोड़ा जा सकता है।
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Òपहले से जिन महिलाओं को बच्चे होने में परेशानी हो चुकी है। उन्हें हाई रिस्क होता है। इसलिए उन महिलाओं को रेस्ट करने की सलाह दी जाती है। साथ ही सफर करने की वजह से बच्चा जल्दी पैदा हो सकता है। सड़कें खराब होने के साथ ही वाहन में यात्रा करने की वजह से महिलाओं में पेन स्टार्ट हो सकता है। इससे मां और बच्चा दोनों की जान को खतरा हो जाता है।Ó
डॉ. प्रेरणा गुप्ता, महिला रोग विशेषज्ञ
Òगर्भवती महिला प्रशिक्षु शिक्षकों से कह दिया गया है कि वे प्रसूति अवकाश के लिए प्रार्थना पत्र दें। साथ में डॉक्टर का एडवाइज लेटर भी लगाएं। इसके बाद उन्हें प्रसूति अवकाश दे दिया जाएगा। महिला प्रशिक्षु ऐसा करना नहीं चाहती हैं। इससे ज्यादा मेरे वश में कुछ नहीं। मानवीयता के नाते गर्भवती प्रशिक्षुओं को रेस्ट करने का वक्त दे देते हैं।Ó
-प्रेमपाल गंगवार, एबीआरसी, ददरौल बीआरसी
Òप्रशिक्षु शिक्षकों के प्रसूति अवकाश का कोई भी मामला मेरे संज्ञान में नहीं आया है। गर्भवती प्रशिक्षु शिक्षकों को प्रसूति अवकाश दिया जा सकता है, लेकिन अवकाश की अवधि पूरी करने के बाद प्रशिक्षण लेने का नियम है। शेष कार्यदिवसों का प्रशिक्षण बाद में करना होगा। इसके बाद ही उन्हें नियुक्ति मिलेगी। नियुक्ति में देरी होने के डर से ही वे खुद प्रसूति अवकाश नहीं ले रही हैं।Ó
-अरुण गुप्ता, मास्टर ट्रेनर प्रशिक्षु प्रशिक्षण
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प्रदेश में 72,825 प्रशिक्षु शिक्षक भर्ती प्रक्रिया के तहत जिले में करीब 2550 प्रशिक्षुओं की भर्ती हो चुकी है। इनमें तमाम महिला प्रशिक्षु गर्भवती हैं। कई महिला प्रशिक्षुओं को तो छह माह से अधिक का गर्भ है। बावजूद इसके वे रोजाना प्रशिक्षण प्राप्त करने के लिए बीआरसी पहुंच रही हैं। सड़कों की खराब हालत और तेज धूप, गर्मी में सफर करने की वजह से गर्भस्थ शिशु की जान को खतरा बना रहता है। अधिकांश गर्भवती प्रशिक्षु सैद्घांतिक प्रशिक्षण से प्रसूति अवकाश नहीं ले रही हैं। इस बारे में बात की गई तो पता चला कि वे इस डर से अवकाश नहीं ले रहीं हैं कि इससे नियुक्ति मिलने में देरी हो जाएगी।
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ददरौली बीआरसी में प्रशिक्षण ले रहीं प्रशिक्षु ऋतु बांगा को आठ माह का गर्भ है। उन्होंने अवकाश के लिए प्रार्थना पत्र भी दिया, लेकिन खंड शिक्षा अधिकारी ने उस पर कोई तवज्जो नहीं दी। लिहाजा वह रोजाना प्रशिक्षण लेने के लिए बीआरसी पहुंचने को मजबूर हैं। सात माह की गर्भवती बबिता कुमारी का कहना है कि डेढ़ माह का प्रशिक्षण पूरा होने को है। अब अवकाश लेंगे तो नियुक्ति के लिए इंतजार करना पड़ेगा। बोलीं, परेशानी तो होती है, लेकिन नौकरी को भी नहीं छोड़ा जा सकता है।
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Òपहले से जिन महिलाओं को बच्चे होने में परेशानी हो चुकी है। उन्हें हाई रिस्क होता है। इसलिए उन महिलाओं को रेस्ट करने की सलाह दी जाती है। साथ ही सफर करने की वजह से बच्चा जल्दी पैदा हो सकता है। सड़कें खराब होने के साथ ही वाहन में यात्रा करने की वजह से महिलाओं में पेन स्टार्ट हो सकता है। इससे मां और बच्चा दोनों की जान को खतरा हो जाता है।Ó
डॉ. प्रेरणा गुप्ता, महिला रोग विशेषज्ञ
Òगर्भवती महिला प्रशिक्षु शिक्षकों से कह दिया गया है कि वे प्रसूति अवकाश के लिए प्रार्थना पत्र दें। साथ में डॉक्टर का एडवाइज लेटर भी लगाएं। इसके बाद उन्हें प्रसूति अवकाश दे दिया जाएगा। महिला प्रशिक्षु ऐसा करना नहीं चाहती हैं। इससे ज्यादा मेरे वश में कुछ नहीं। मानवीयता के नाते गर्भवती प्रशिक्षुओं को रेस्ट करने का वक्त दे देते हैं।Ó
-प्रेमपाल गंगवार, एबीआरसी, ददरौल बीआरसी
Òप्रशिक्षु शिक्षकों के प्रसूति अवकाश का कोई भी मामला मेरे संज्ञान में नहीं आया है। गर्भवती प्रशिक्षु शिक्षकों को प्रसूति अवकाश दिया जा सकता है, लेकिन अवकाश की अवधि पूरी करने के बाद प्रशिक्षण लेने का नियम है। शेष कार्यदिवसों का प्रशिक्षण बाद में करना होगा। इसके बाद ही उन्हें नियुक्ति मिलेगी। नियुक्ति में देरी होने के डर से ही वे खुद प्रसूति अवकाश नहीं ले रही हैं।Ó
-अरुण गुप्ता, मास्टर ट्रेनर प्रशिक्षु प्रशिक्षण