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मानसून ने किया मायूस... मुरझा रही हैं फसलें
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जैतीपुर में पंप सेट से खेतो में पानी भरता किसान । संवाद
- फोटो : SHAHJAHANPUR
शाहजहांपुर। मानसूनी बारिश के लिहाज से जुलाई के बाद अगस्त माह भी किसानों के लिए बेहद निराशाजनक साबित हुआ। जुलाई में सामान्य से 80 प्रतिशत कम वर्षा हुई। उम्मीद थी कि सावन में बारिश की कमी की भरपाई भादौं में हो जाएगी, लेकिन अगस्त में महज 60 प्रतिशत वर्षा हुई। मानसून सीजन में अभी तक सामान्य से 66 फीसदी कम वर्षा हुई है। इससे करीब 40 फीसदी से ज्यादा फसलें सूखे से प्रभावित होने की आशंका है, लेकिन अधिकारी फसली नुकसान को कमतर आंक रहे हैं। ट्यूबवेल से फसलों की सिंचाई करते किसान परेशान हो गए हैं।
वर्षा कम होने से केवल गन्ना को छोड़कर धान समेत खरीफ की सभी फसलें कुम्हला रही हैं। किसान नलकूपों से भी सिंचाई नहीं कर पा रहे हैं, क्योंकि बिजली संकट के अलावा लो वोल्टेज, लाइन फॉल्ट आदि समस्याएं आड़े आ रही हैं। पंपिंग सेट से सिंचाई करने पर उन्हें महंगा डीजल खरीदने के साथ उन किसानों की खुशामद भी करनी पड़ रही है, जिनके बोरिंग से उन्हें पानी लेना है। सबसे ज्यादा परेशान वह किसान हैं, जिन्होंने मानसून के सहारे फसलें लेने की तैयारी की थी। जिन किसानों के खेत नहरों, सरकारी नलकूपों से दूर हैं और उनके पास सिंचाई के निजी संसाधन नहीं हैं, उनकी फसलें अब मुरझाने लगी हैं।
मानसून सीजन में सामान्य वर्षा मानक (मिमी में)
माह वर्षा मानक
जून 106
जुलाई 327
अगस्त 177
सितंबर 185
गत तीन वर्ष में जनपद में हुई बारिश
वर्ष जून जुलाई अगस्त
2020 30 431 93
2021 137 285 92
2022 91 73 107
नुकसान की भरपाई नहीं होगी
सरकार बहुमत में है, इसलिए उसे सब तरफ हरा-हरा नजर आ रहा है। किसान भले मरें लेकिन सरकार को कोई मतलब नहीं है। ऐसे राज में जनपद सूखाग्रस्त हो गया तो भी किसानों को नुकसान की भरपाई नहीं हो पाएगी। क्योंकि अधिकारी सिर्फ 20 से 30 फीसदी फसलें प्रभावित होने की बात कर रहे हैं। -अजीत सिंह, चक ममरेज (कांट)
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कटौती से बंद पड़े ट्यूबवेल
सूखा से राहत दिलाने की अधिकारियों से बात तब की जाए, जब वह मानने को तैयार हों कि जिले में सूखा के हालात बन गए हैं। बिजली कटौती से रात में ट्यूबवेल बंद पड़े रहते हैं। पंपिंग सेट से फसलों की सिंचाई कर पाना कम जोत वाले छोटे किसानों के बूते की बात नहीं है। खेती में नुकसान झलक रहा है। -उमंगवीर सिंह, इनायतपुर (पुवायां)
सरकार से उम्मीद करना बेकार
सरकार से किसी तरह की मदद की उम्मीद करना बेकार है। सत्ता में बैठे लोग कहते कुछ हैं और करते कुछ हैं। किसानों की मदद करने की मंशा होती तो अब तक सूखा राहत देने की शुरुआत कर दी गई होती। केंद्र सरकार पहले दुनिया की अन्नदाता बनी और अब विदेश से गेहूं आयात की तैयारी कर रही है। -डॉ. जयेंद्र सिंह, मझिला (खुदागंज)
फसलों का उत्पादन और गुणवत्ता होगी प्रभावित
बारिश में कमी को देखते फसलों की उत्पादकता में कमी आने और उनकी गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका है। हालांकि, सितंबर मध्य तक बारिश की संभावना बनी रहेगी, लेकिन इतनी बारिश होने की उम्मीद नहीं है कि किसान मानसून के सहारे फसलें बचाए रख सकेंगे। किसानों को खेतों में नमी बनाए रखने का प्रयास करना होगा। जिन किसानों ने बारिश के इंतजार में फसलें देर से बोईं, उनका दाना छोटा पड़ सकता है और इससे उपज में भी कमी आ जाएगी। -डॉ. एनसी त्रिपाठी, वरिष्ठ शस्य वैज्ञानिक/प्रभारी अधिकारी, कृषि विज्ञान केंद्र
जनपद सूखाग्रस्त घोषित होते ही शुरू होगी मुआवजा प्रक्रिया
मानसून सीजन जून से सितंबर तक माना जाता है। इस दौरान वर्षा मानक से 50 फीसदी कम होने पर ही जनपद को शासन से सूखाग्रस्त घोषित किए जाने की संभावना है। इसके बावजूद सूखा से निपटने की तैयारी कर ली गई है। जिन किसानों ने बारिश के इंतजार में खेत खाली छोड़ दिए, उन्हें विकल्प के तौर पर मूंगफली, मक्का, ज्वार, बाजरा, उड़द, तिल, सोयाबीन आदि का बीज राजकीय बीज भंडारों को भेजा जा चुका है जो सूखा प्रभावित किसानों को निशुल्क दिया जाएगा। -डॉ. सतीश चंद्र पाठक, जिला कृषि अधिकारी
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वर्षा कम होने से केवल गन्ना को छोड़कर धान समेत खरीफ की सभी फसलें कुम्हला रही हैं। किसान नलकूपों से भी सिंचाई नहीं कर पा रहे हैं, क्योंकि बिजली संकट के अलावा लो वोल्टेज, लाइन फॉल्ट आदि समस्याएं आड़े आ रही हैं। पंपिंग सेट से सिंचाई करने पर उन्हें महंगा डीजल खरीदने के साथ उन किसानों की खुशामद भी करनी पड़ रही है, जिनके बोरिंग से उन्हें पानी लेना है। सबसे ज्यादा परेशान वह किसान हैं, जिन्होंने मानसून के सहारे फसलें लेने की तैयारी की थी। जिन किसानों के खेत नहरों, सरकारी नलकूपों से दूर हैं और उनके पास सिंचाई के निजी संसाधन नहीं हैं, उनकी फसलें अब मुरझाने लगी हैं।
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मानसून सीजन में सामान्य वर्षा मानक (मिमी में)
माह वर्षा मानक
जून 106
जुलाई 327
अगस्त 177
सितंबर 185
गत तीन वर्ष में जनपद में हुई बारिश
वर्ष जून जुलाई अगस्त
2020 30 431 93
2021 137 285 92
2022 91 73 107
नुकसान की भरपाई नहीं होगी
सरकार बहुमत में है, इसलिए उसे सब तरफ हरा-हरा नजर आ रहा है। किसान भले मरें लेकिन सरकार को कोई मतलब नहीं है। ऐसे राज में जनपद सूखाग्रस्त हो गया तो भी किसानों को नुकसान की भरपाई नहीं हो पाएगी। क्योंकि अधिकारी सिर्फ 20 से 30 फीसदी फसलें प्रभावित होने की बात कर रहे हैं। -अजीत सिंह, चक ममरेज (कांट)
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कटौती से बंद पड़े ट्यूबवेल
सूखा से राहत दिलाने की अधिकारियों से बात तब की जाए, जब वह मानने को तैयार हों कि जिले में सूखा के हालात बन गए हैं। बिजली कटौती से रात में ट्यूबवेल बंद पड़े रहते हैं। पंपिंग सेट से फसलों की सिंचाई कर पाना कम जोत वाले छोटे किसानों के बूते की बात नहीं है। खेती में नुकसान झलक रहा है। -उमंगवीर सिंह, इनायतपुर (पुवायां)
सरकार से उम्मीद करना बेकार
सरकार से किसी तरह की मदद की उम्मीद करना बेकार है। सत्ता में बैठे लोग कहते कुछ हैं और करते कुछ हैं। किसानों की मदद करने की मंशा होती तो अब तक सूखा राहत देने की शुरुआत कर दी गई होती। केंद्र सरकार पहले दुनिया की अन्नदाता बनी और अब विदेश से गेहूं आयात की तैयारी कर रही है। -डॉ. जयेंद्र सिंह, मझिला (खुदागंज)
फसलों का उत्पादन और गुणवत्ता होगी प्रभावित
बारिश में कमी को देखते फसलों की उत्पादकता में कमी आने और उनकी गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका है। हालांकि, सितंबर मध्य तक बारिश की संभावना बनी रहेगी, लेकिन इतनी बारिश होने की उम्मीद नहीं है कि किसान मानसून के सहारे फसलें बचाए रख सकेंगे। किसानों को खेतों में नमी बनाए रखने का प्रयास करना होगा। जिन किसानों ने बारिश के इंतजार में फसलें देर से बोईं, उनका दाना छोटा पड़ सकता है और इससे उपज में भी कमी आ जाएगी। -डॉ. एनसी त्रिपाठी, वरिष्ठ शस्य वैज्ञानिक/प्रभारी अधिकारी, कृषि विज्ञान केंद्र
जनपद सूखाग्रस्त घोषित होते ही शुरू होगी मुआवजा प्रक्रिया
मानसून सीजन जून से सितंबर तक माना जाता है। इस दौरान वर्षा मानक से 50 फीसदी कम होने पर ही जनपद को शासन से सूखाग्रस्त घोषित किए जाने की संभावना है। इसके बावजूद सूखा से निपटने की तैयारी कर ली गई है। जिन किसानों ने बारिश के इंतजार में खेत खाली छोड़ दिए, उन्हें विकल्प के तौर पर मूंगफली, मक्का, ज्वार, बाजरा, उड़द, तिल, सोयाबीन आदि का बीज राजकीय बीज भंडारों को भेजा जा चुका है जो सूखा प्रभावित किसानों को निशुल्क दिया जाएगा। -डॉ. सतीश चंद्र पाठक, जिला कृषि अधिकारी