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Shahjahanpur News: बंदर पकड़ने वाले आ रहे नहीं, एबीसी सेंटर का काम भी अटका
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कैंट क्षेत्र में झुंड लगाकर बैठे बंदर। संवाद
शाहजहांपुर। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी नगर निगम एनिमल बर्थ कंट्रोल (एबीसी) सेंटर शुरू नहीं करा पाया है। विद्युत कनेक्शन का पेंच फंसने से सारी प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद कुत्तों की नसबंदी शुरू नहीं हो सकी है। वहीं, खतरनाक हो चुके बंदरों को पकड़ने की निविदा प्रक्रिया भी किसी एजेंसी के आवेदन न करने से पूरी नहीं हो सकी है। लोग कुत्तों व बंदरों के हमलों में घायल हो रहे हैं लेकिन अधिकारियों की सुस्ती दूर नहीं हो रही।
शहर में रोजाना सौ से 120 लोग एंटी रैबीज वैक्सीन लगवाने के लिए पुराने जिला अस्पताल पहुंचते हैं। अजीजगंज क्षेत्र में स्थित एनिमल बर्थ कंट्रोल (एबीसी) सेंटर डेढ़ माह से अधिक समय बीत जाने के बाद अब तक शुरू नहीं हो पाया है। एक माह पहले बिजली कनेक्शन के आवेदन करने के बाद अब तक कनेक्शन नहीं हो पाया है। चहारदीवारी का निर्माण अटका हुआ है। मुख्य गेट भी नहीं लग पाया है।
सुप्रीमकोर्ट के आदेश के बाद शासन ने 30 सितंबर तक एबीसी सेंटर शुरू करने के निर्देश दिए थे। करीब डेढ़ माह पहले औरैया की एजेंसी काे टेंडर हो गया। सेंटर में कुत्तों की नसबंदी के लिए उपकरण लगा दिए गए। 15 दिन पहले एजेंसी की ओर से स्टाफ यहां आ गया था। बिजली का कनेक्शन नहीं होने पर जनरेटर की व्यवस्था की गई थी।
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कुछ दिन जनरेटर चलता रहा। इसके बाद बंद करा दिया गया। व्यवस्था पूरी नहीं होने पर टीम लौट गई है। निगम के अधिकारियों का कहना है कि काम पूरा होने के बाद भी एबीसी सेंटर को संचालित किया जाएगा।
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बंदरों को पकड़ने का निकाला टेंडर, कोई नहीं आया
शहर में बंदरों का आतंक है। लगभग सभी मोहल्लों में बंदरों के कारण लोगों का छत पर जाना मुश्किल है। भगाए जाने पर बंदर हमलावर हो जाते हैं। नगर निगम ने पकड़ने की टेंडर प्रक्रिया शुरू की थी। बृहस्पतिवार को टेंडर खोले जाने थे लेकिन किसी एजेंसी ने निविदा नहीं डाली। इस वजह से अब भी किसी एजेंसी का इंतजार किया जा रहा है। निगम क्षेत्र में 10 हजार बंदरों को पकड़ने का लक्ष्य रखा गया है।
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बंदरों के हमले की घटनाएं
पांच नवंबर 2025 : रोजा गांव देवरास में पांच वर्षीय कार्तिक की बंदरों के उत्पात से गिरे छज्जे के मलबे से दबकर मौत हो गई थी।
26 नवंबर 2025 : मीरानपुर कटरा क्षेत्र में बंदरों ने तीन बच्चों को काटकर घायल कर दिया, एक महिला छत से गिरकर घायल हो गई थी।
31 दिसंबर 2024 : निगोही क्षेत्र के डेलखेड़ा गांव निवासी अय्यूब खां की बंदरों के झुंड के हमले से छत से गिरकर मौत हो गई थी।
25 सितंबर 2023 : मीरानपुर कटरा क्षेत्र के खंडसार गांव की रहने वाली बुजुर्ग महिला द्रोपदी की बंदरों के हमले में छत गिरकर मौत हो गई थी।
21 सितंबर 2025 : गांव औधापुर में बंदरों के हमले में छत से गिरकर सफाईकर्मी आशाराम की मौत हो गई थी।
17 जुलाई 2020 : चौक कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला वाजिद खेल में बंदरों ने छत की चहारदीवारी गिरा दी। इससे पड़ोस के घर में आंगन में सो रहीं शबनम व उनके चार बच्चों की मौत हो गई थी।
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एनिमल बर्थ सेंटर में व्यवस्थाएं पूर्ण की जा रहीं हैं। बिजली कनेक्शन के लिए विद्युत निगम के अधिकारियों से संपर्क किया गया है। जल्द कनेक्शन हो जाएगा। इसके बाद एबीसी सेंटर शुरू हो जाएगा। बंदरों को पकड़ने के लिए भी टेंडर प्रक्रिया चल रही है। अभी किसी एजेंसी ने संपर्क नहीं किया है।
- डॉ. बिपिन कुमार यादव, नगर आयुक्त
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ये बरतें सावधानी
- कुत्ता या बंदर काटने के बाद साबुन से नल के नीचे दस से 15 मिनट तक घाव को धोएं।
- कुत्ता या बंदर काटने वाले जख्म पर मिर्च नहीं लगाएं। चिकित्सक को दिखाएं।
- घाव पर एंटीसेप्टिक मलहम लगाएं।
- टिटनेस का इंजेक्शन और एआरवी लगवाएं।
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हर स्वास्थ्य केंद्र पर एआरवी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। स्टोर में भी एआरवी उपलब्ध हैं। कुत्ते-बंदर और बिल्ली के काटने पर अनिवार्य तौर पर एआरवी लगवाएं। शरीर में रैबीज फैलने पर जान बचाना मुश्किल होता है।
-डॉ.पीपी श्रीवास्तव, एसीएमओ
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शहर में रोजाना सौ से 120 लोग एंटी रैबीज वैक्सीन लगवाने के लिए पुराने जिला अस्पताल पहुंचते हैं। अजीजगंज क्षेत्र में स्थित एनिमल बर्थ कंट्रोल (एबीसी) सेंटर डेढ़ माह से अधिक समय बीत जाने के बाद अब तक शुरू नहीं हो पाया है। एक माह पहले बिजली कनेक्शन के आवेदन करने के बाद अब तक कनेक्शन नहीं हो पाया है। चहारदीवारी का निर्माण अटका हुआ है। मुख्य गेट भी नहीं लग पाया है।
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सुप्रीमकोर्ट के आदेश के बाद शासन ने 30 सितंबर तक एबीसी सेंटर शुरू करने के निर्देश दिए थे। करीब डेढ़ माह पहले औरैया की एजेंसी काे टेंडर हो गया। सेंटर में कुत्तों की नसबंदी के लिए उपकरण लगा दिए गए। 15 दिन पहले एजेंसी की ओर से स्टाफ यहां आ गया था। बिजली का कनेक्शन नहीं होने पर जनरेटर की व्यवस्था की गई थी।
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कुछ दिन जनरेटर चलता रहा। इसके बाद बंद करा दिया गया। व्यवस्था पूरी नहीं होने पर टीम लौट गई है। निगम के अधिकारियों का कहना है कि काम पूरा होने के बाद भी एबीसी सेंटर को संचालित किया जाएगा।
बंदरों को पकड़ने का निकाला टेंडर, कोई नहीं आया
शहर में बंदरों का आतंक है। लगभग सभी मोहल्लों में बंदरों के कारण लोगों का छत पर जाना मुश्किल है। भगाए जाने पर बंदर हमलावर हो जाते हैं। नगर निगम ने पकड़ने की टेंडर प्रक्रिया शुरू की थी। बृहस्पतिवार को टेंडर खोले जाने थे लेकिन किसी एजेंसी ने निविदा नहीं डाली। इस वजह से अब भी किसी एजेंसी का इंतजार किया जा रहा है। निगम क्षेत्र में 10 हजार बंदरों को पकड़ने का लक्ष्य रखा गया है।
बंदरों के हमले की घटनाएं
पांच नवंबर 2025 : रोजा गांव देवरास में पांच वर्षीय कार्तिक की बंदरों के उत्पात से गिरे छज्जे के मलबे से दबकर मौत हो गई थी।
26 नवंबर 2025 : मीरानपुर कटरा क्षेत्र में बंदरों ने तीन बच्चों को काटकर घायल कर दिया, एक महिला छत से गिरकर घायल हो गई थी।
31 दिसंबर 2024 : निगोही क्षेत्र के डेलखेड़ा गांव निवासी अय्यूब खां की बंदरों के झुंड के हमले से छत से गिरकर मौत हो गई थी।
25 सितंबर 2023 : मीरानपुर कटरा क्षेत्र के खंडसार गांव की रहने वाली बुजुर्ग महिला द्रोपदी की बंदरों के हमले में छत गिरकर मौत हो गई थी।
21 सितंबर 2025 : गांव औधापुर में बंदरों के हमले में छत से गिरकर सफाईकर्मी आशाराम की मौत हो गई थी।
17 जुलाई 2020 : चौक कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला वाजिद खेल में बंदरों ने छत की चहारदीवारी गिरा दी। इससे पड़ोस के घर में आंगन में सो रहीं शबनम व उनके चार बच्चों की मौत हो गई थी।
एनिमल बर्थ सेंटर में व्यवस्थाएं पूर्ण की जा रहीं हैं। बिजली कनेक्शन के लिए विद्युत निगम के अधिकारियों से संपर्क किया गया है। जल्द कनेक्शन हो जाएगा। इसके बाद एबीसी सेंटर शुरू हो जाएगा। बंदरों को पकड़ने के लिए भी टेंडर प्रक्रिया चल रही है। अभी किसी एजेंसी ने संपर्क नहीं किया है।
- डॉ. बिपिन कुमार यादव, नगर आयुक्त
ये बरतें सावधानी
- कुत्ता या बंदर काटने के बाद साबुन से नल के नीचे दस से 15 मिनट तक घाव को धोएं।
- कुत्ता या बंदर काटने वाले जख्म पर मिर्च नहीं लगाएं। चिकित्सक को दिखाएं।
- घाव पर एंटीसेप्टिक मलहम लगाएं।
- टिटनेस का इंजेक्शन और एआरवी लगवाएं।
हर स्वास्थ्य केंद्र पर एआरवी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। स्टोर में भी एआरवी उपलब्ध हैं। कुत्ते-बंदर और बिल्ली के काटने पर अनिवार्य तौर पर एआरवी लगवाएं। शरीर में रैबीज फैलने पर जान बचाना मुश्किल होता है।
-डॉ.पीपी श्रीवास्तव, एसीएमओ

कैंट क्षेत्र में झुंड लगाकर बैठे बंदर। संवाद