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खतरनाक है मोबाइल गेम की लत, इलाज और इच्छाशक्ति से छूटेगी आदत
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राजकीय मेडिकल कॉलेज में बना मन कक्ष ।
- फोटो : SHAHJAHANPUR
खतरनाक है मोबाइल गेम की लत, इलाज और इच्छाशक्ति से छूटेगी आदत
राजकीय मेडिकल कॉलेज के मन कक्ष में अक्सर पहुंचते हैं मोबाइल गेम के लती बच्चे
संवाद न्यूज एजेंसी
शाहजहांपुर। पबजी खेलने से रोकने पर किशोर पुत्र द्वारा गोली मारकर अपनी मां की हत्या के बाद लोग सकते में हैं। अपने लाडले के लगातार मोबाइल में व्यस्त देखकर उनकी चिंता भी बढ़ गई है। मनोविश्लेषकों का मानना है कि बच्चा जब मोबाइल के सामान्य इस्तेमाल से अधिक समय मोबाइल पर व्यतीत करने लगे तब सचेत हो जाने की जरूरत है। खासतौर पर मोबाइल में हिंसक खेलों को खेल रहे बच्चों और युवाओं की लत छुड़ाने की जरूरत है। चाहें इसके लिए इलाज क्यों न कराना पड़े। राजकीय मेडिकल कॉलेज के मन कक्ष में अक्सर ऐसे बच्चों को लेकर परिजन पहुंचते हैं जिनका इलाज किया जाता है।
राजकीय मेडिकल कॉलेज के मनोवैज्ञानिक डॉ. रोहिताश ईशा ने बताया कि पबजी जैसे मोबाइल गेम बच्चों की मस्तिष्क की गतिविधि को धीमा कर देते हैं। चीजों को समझने और ध्यान केंद्रित करने की उनकी क्षमता पर भी गहरा असर पड़ता है। शोध बताते हैं कि शैक्षणिक प्रदर्शन बड़े पैमाने पर गिर रहा है। इसी तरह, जो लोग काम कर रहे हैं, वे भी इस खेल के आदी हैं। वे अपने कॅरियर पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय गेम खेलने में व्यस्त रहते हैं। उन्होंने बताया कि मोबाइल गेम की लत लोगों के रिश्तों को बर्बाद कर देती है। कई बार वैवाहिक संबंध टूटने की वजह भी मोबाइल बन जाता है।
ऐसे करें लत को नियंत्रित
-किसी भी चीज की अधिकता बुरी है, चाहे वह वीडियो गेम हो या कुछ भी। हालांकि, किसी को यह भी पता होना चाहिए कि हम किसी भी लत को उचित उपायों द्वारा नियंत्रित कर सकते हैं। इसके साथ शुरू करने के लिए, खेल पर आपके द्वारा खर्च किए गए समय को कम करने का प्रयास करें।
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-इसे अचानक छोड़ना अव्यवहारिक है इसलिए एक निश्चित समय निर्धारित करें।
-अपने दिमाग को दूसरी ओर मोड़ने की कोशिश करें। हमेशा घर के अंदर न रहें। बाहर जाएं और शारीरिक गतिविधियों में लिप्त हों।
-फोन पर स्क्रॉल करने या अपना गेम खेलने के बजाय अपने परिवार के साथ समय बिताने की कोशिश करें। जब आप अपने प्रियजनों से घिरे रहेंगे, तो आपको किसी और चीज की परवाह नहीं होगी।
केस नंबर एक- शहर की आवास एवं विकास परिषद कॉलोनी निवासी किशोर एक साल से इस गेम की लत की गिरफ्त में था। उसके परिवार के सदस्य बहुत परेशान थे क्योंकि बच्चे का मन गेम के अलावा कहीं और नहीं लगता था। मोबाइल न मिलने पर गुस्सा करना, रोना शुरू हो जाता था। यहां तक कि मरने-मारने की धमकी देने लगता था। जिला अस्पताल के मन कक्ष में ही सबसे पहले उसका मेंटल एसेसमेंट किया गया। फिर साइकोथेरेपी दी गई, कुछ दवाएं चलाई गईं। अब वह बच्चा पूर्ण रूप से स्वस्थ है।
केस नंबर दो- जलालाबाद का एक युवक नेट और मोबाइल के इस्तेमाल लती हो गया था। हर समय मोबाइल चलाता रहता था। टोकने पर परिवार वालों को दुश्मन समझता था। परिजन उसे मन कक्ष में लेकर आए। लगभग छह महीने उसकी काउंसलिंग और इलाज चलने के बाद अब वह ठीक है।
पबजी जैसे हिंसक गेम किशोरों और युवाओं में मानसिक विकार उत्पन्न कर रहा है। इसकी अधिक लत लगने से मानसिक गतिविधियां धीमी हो जाती हैं। ऐसे में मना करने पर परिवार वालों को भी दुश्मन समझने लगता है। ऐसी परिस्थितियों में विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। ऐसे लोगों का तत्काल योग्य चिकित्सक से उपचार कराएं।
डॉ रोहिताश ईशा, मनोचिकित्सक, राजकीय मेडिकल कॉलेज शाहजहांपुर।
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राजकीय मेडिकल कॉलेज के मन कक्ष में अक्सर पहुंचते हैं मोबाइल गेम के लती बच्चे
संवाद न्यूज एजेंसी
शाहजहांपुर। पबजी खेलने से रोकने पर किशोर पुत्र द्वारा गोली मारकर अपनी मां की हत्या के बाद लोग सकते में हैं। अपने लाडले के लगातार मोबाइल में व्यस्त देखकर उनकी चिंता भी बढ़ गई है। मनोविश्लेषकों का मानना है कि बच्चा जब मोबाइल के सामान्य इस्तेमाल से अधिक समय मोबाइल पर व्यतीत करने लगे तब सचेत हो जाने की जरूरत है। खासतौर पर मोबाइल में हिंसक खेलों को खेल रहे बच्चों और युवाओं की लत छुड़ाने की जरूरत है। चाहें इसके लिए इलाज क्यों न कराना पड़े। राजकीय मेडिकल कॉलेज के मन कक्ष में अक्सर ऐसे बच्चों को लेकर परिजन पहुंचते हैं जिनका इलाज किया जाता है।
राजकीय मेडिकल कॉलेज के मनोवैज्ञानिक डॉ. रोहिताश ईशा ने बताया कि पबजी जैसे मोबाइल गेम बच्चों की मस्तिष्क की गतिविधि को धीमा कर देते हैं। चीजों को समझने और ध्यान केंद्रित करने की उनकी क्षमता पर भी गहरा असर पड़ता है। शोध बताते हैं कि शैक्षणिक प्रदर्शन बड़े पैमाने पर गिर रहा है। इसी तरह, जो लोग काम कर रहे हैं, वे भी इस खेल के आदी हैं। वे अपने कॅरियर पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय गेम खेलने में व्यस्त रहते हैं। उन्होंने बताया कि मोबाइल गेम की लत लोगों के रिश्तों को बर्बाद कर देती है। कई बार वैवाहिक संबंध टूटने की वजह भी मोबाइल बन जाता है।
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ऐसे करें लत को नियंत्रित
-किसी भी चीज की अधिकता बुरी है, चाहे वह वीडियो गेम हो या कुछ भी। हालांकि, किसी को यह भी पता होना चाहिए कि हम किसी भी लत को उचित उपायों द्वारा नियंत्रित कर सकते हैं। इसके साथ शुरू करने के लिए, खेल पर आपके द्वारा खर्च किए गए समय को कम करने का प्रयास करें।
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-इसे अचानक छोड़ना अव्यवहारिक है इसलिए एक निश्चित समय निर्धारित करें।
-अपने दिमाग को दूसरी ओर मोड़ने की कोशिश करें। हमेशा घर के अंदर न रहें। बाहर जाएं और शारीरिक गतिविधियों में लिप्त हों।
-फोन पर स्क्रॉल करने या अपना गेम खेलने के बजाय अपने परिवार के साथ समय बिताने की कोशिश करें। जब आप अपने प्रियजनों से घिरे रहेंगे, तो आपको किसी और चीज की परवाह नहीं होगी।
केस नंबर एक- शहर की आवास एवं विकास परिषद कॉलोनी निवासी किशोर एक साल से इस गेम की लत की गिरफ्त में था। उसके परिवार के सदस्य बहुत परेशान थे क्योंकि बच्चे का मन गेम के अलावा कहीं और नहीं लगता था। मोबाइल न मिलने पर गुस्सा करना, रोना शुरू हो जाता था। यहां तक कि मरने-मारने की धमकी देने लगता था। जिला अस्पताल के मन कक्ष में ही सबसे पहले उसका मेंटल एसेसमेंट किया गया। फिर साइकोथेरेपी दी गई, कुछ दवाएं चलाई गईं। अब वह बच्चा पूर्ण रूप से स्वस्थ है।
केस नंबर दो- जलालाबाद का एक युवक नेट और मोबाइल के इस्तेमाल लती हो गया था। हर समय मोबाइल चलाता रहता था। टोकने पर परिवार वालों को दुश्मन समझता था। परिजन उसे मन कक्ष में लेकर आए। लगभग छह महीने उसकी काउंसलिंग और इलाज चलने के बाद अब वह ठीक है।
पबजी जैसे हिंसक गेम किशोरों और युवाओं में मानसिक विकार उत्पन्न कर रहा है। इसकी अधिक लत लगने से मानसिक गतिविधियां धीमी हो जाती हैं। ऐसे में मना करने पर परिवार वालों को भी दुश्मन समझने लगता है। ऐसी परिस्थितियों में विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। ऐसे लोगों का तत्काल योग्य चिकित्सक से उपचार कराएं।
डॉ रोहिताश ईशा, मनोचिकित्सक, राजकीय मेडिकल कॉलेज शाहजहांपुर।

डॉ. रोहिताश ।- फोटो : SHAHJAHANPUR