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टिकट कटने से आहत शरदवीर ने सपा से दिया इस्तीफा

Wed, 19 Jan 2022 12:48 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Wed, 19 Jan 2022 12:48 AM IST
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MLA Sharadveer resigns from SP after ticket cut
जलालाबाद के सपा विधायक शरदवीर सिंह - फोटो : SHAHJAHANPUR
जलालाबाद (शाहजहांपुर)। जिले में सपा के एकमात्र मौजूदा विधायक शरदवीर सिंह ने टिकट कटने से आहत होकर पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने जलालाबाद सीट से नीरज मौर्य कुशवाहा को सपा का टिकट दिए जाने पर खुद को और जनता को आहत बताते हुए राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को अपना त्यागपत्र भेज दिया। शरदवीर सिंह का अगला कदम क्या होगा, इसको लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है। माना जा रहा है कि वह भाजपा में शामिल हो सकते हैं।
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राष्ट्रीय अध्यक्ष को भेजे पत्र में सपा विधायक शरदवीर सिंह ने लिखा कि उन्होंने नेताजी मुलायम सिंह यादव की नीतियों से प्रभावित होकर सपा की सदस्यता ग्रहण की थी। 1996 से लगातार जलालाबाद की जनता की सेवा कर रहे हैं। अब सपा नेताजी की नीतियों से भटक गई है। इसीलिए उनका टिकट काट दिया गया। सपा से इस्तीफा देने के बाद शरदवीर अपने समर्थकों से रायशुमारी कर अगला कदम उठाने की बात कह रहे हैं।
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शरदवीर सिंह के अनुसार 26 सालों से वह पार्टी के साथ हैं। वह न केवल पार्टी के प्रति पूरी तरह निष्ठावान रहे, बल्कि कभी भी उन पर किसी प्रकार का कोई आरोप नहीं लगा। पार्टी ने उन्हें इस बार दोबारा धोखा दिया है। शरदवीर सिंह ने बताया कि उन्हें नहीं पता कि पार्टी ने उनका टिकट क्यों और किस लालच में काटा। भाजपा में जाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि वह अपने समर्थकों से विचार-विमर्श के बाद ही अगला फैसला लेंगे।
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पहले भी कट चुका है शरदवीर का टिकट
विधायक रहते हुए पार्टी द्वारा शरदवीर सिंह का टिकट काट देने का यह मामला पहला नहीं है। इससे पहले वर्ष 2007 में भी पार्टी ने उनका टिकट काटकर राममूर्ति सिंह वर्मा को दे दिया था। जबकि शरदवीर 1996 के बाद 2002 में लगातार दो बार पार्टी के टिकट पर चुनाव जीते थे। टिकट कटने के बाद शरदवीर सिंह कांग्रेस के सिंबल पर चुनाव लड़े।

हालांकि शरदवीर सिंह को सफलता नहीं मिली, परंतु सपा का भी यह प्रयोग सफल नहीं रहा और राममूर्ति भी चुनाव हार गए। 2007 के चुनाव के कुछ समय के बाद ही शरदवीर सिंह ने पुन: सपा का दामन थाम लिया और वर्ष 2012 के चुनाव में चुनाव लड़ा। हालांकि इस चुनाव में भी उन्हें सफलता नहीं मिली। 2017 के चुनाव में भाजपा की लहर के बाद भी वह सीट जीतने में कामयाब रहे। पूरे मंडल में पार्टी की इकलौती सीट निकालने वाले शरदवीर सिंह को यह उम्मीद नहीं थी कि उनके टिकट पर भी खतरा हो सकता है।
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