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Shahjahanpur News: ‘मिट्ठू ने चाकू लाकर दिया, मम्मी ने काट दिया डैडी का गला’

Sun, 08 Oct 2023 12:55 AM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर Updated Sun, 08 Oct 2023 12:55 AM IST
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'Mittu brought a knife, mother cut daddy's throat'

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शाहजहांपुर। सुखजीत हत्याकांड में वैसे तो 16 गवाह पेश किए गए लेकिन घटना के चश्मदीद रमनदीप कौर के बेटे अर्जुन सिंह की गवाही सबसे महत्वपूर्ण रही।


अर्जुन ने अदालत को बताया कि घटना की रात वह भी उसी कमरे में था, जिसमें डैडी सोए थे। आहट सुनकर उसकी आंख खुली तो उसने देखा कि डैडी के सीने पर उसकी मम्मी बैठी थीं। तकिये से उनका मुंह दबाया हुआ था। पास में खड़े मिट्ठू ने हथौड़े से डैडी के सिर पर दो वार किए। डैडी बहुत हिल रहे थे तो मम्मी ने मिट्ठू से कहा कि इसे फिनिश कर दो। मिट्ठू ने कहीं से चाकू लाकर मम्मी को दिया और मम्मी ने डैडी की गर्दन चाकू से काट दी। डर के कारण वह चादर के अंदर बिना हिले-डुले पड़ा रहा। बयानों में अर्जुन ने यह भी कहा था कि डैडी की हत्या में शामिल मम्मी अब उसके लिए केवल रमनदीप कौर है। घटना के समय अर्जुन की आयु दस वर्ष थी।
वर्तमान में 17 वर्षीय अर्जुन और उनका छोटा भाई 14 वर्षीय एमन इंग्लैंड में अपनी बुआ के पास रहकर पढ़ रहे हैं। सुखजीत के फार्म हाउस पर काम करने वाले रामदास ने भी बयान दिए थे कि उसने मिट्ठू और रमनदीप को खेत व घर में आपत्तिजनक हालत में देखा है। इसके बारे में उसने वादिनी यानी सुखजीत की मां वंश कौर को भी बताया था।
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दिल्ली एयरपोर्ट से दबोचा गया था मिट्ठू: दो सितंबर 2016 को सुखजीत की हत्या से पहले और बाद में मिट्ठू और रमनदीप कौर की मोबाइल फोन पर लगातार बातचीत होती रही। सर्विलांस पर मिट्ठू की लोकेशन दिल्ली एयरपोर्ट और थोड़ी देर बाद टर्मिनल थ्री पर मिली।
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सूचना मिलते ही तत्कालीन शाहजहांपुर एसपी डॉ. मनोज कुमार ने दिल्ली पुलिस के तीन उपायुक्तों से संपर्क किया। एयरपोर्ट के सुरक्षा अधिकारियों को घटना की जानकारी देने के साथ कॉल डिटेल का हवाला देकर मदद मांगी। तुरंत ही शाहजहांपुर से पत्रक बनाकर दिल्ली में संबंधित अधिकारियों को फैक्स किया गया तब तक दो सितंबर 2016 की रात के सवा आठ बज गए थे। एयरपोर्ट पर अधिकारियों ने जांच की तो पाया कि दुबई जाने वाली फ्लाइट रात 8:30 बजे है। इसके लिए चेक-इन शुरू हो चुका था। पड़ताल की तो मिट्ठू बोर्डिंग पास ओके कराकर फ्लाइट की ओर रवाना हो गया था। अधिकारियों ने उसे रोककर हिरासत में ले लिया। बाद में दिल्ली जाकर शाहजहांपुर पुलिस उसे गिरफ्तार कर ले आई थी। संवाद


खुलासे में पंजाब के डीएसपी की रही थी महत्वपूर्ण भूमिका: पुवायां। हत्याकांड के खुलासे में पंजाब के सुल्तानपुर लोधी के तत्कालीन डीएसपी प्यारा सिंह ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। वे सुखजीत के पिता बल्देव सिंह की बुआ के पुत्र हैं। दो सितंबर 2016 की सुबह उन्हें हत्या का पता चला। उन्हें मिट्ठू पर ही शक था। इसलिए मिट्ठू के मोबाइल फोन की कॉल डिटेल निकलवाई जिससे पता चला कि वह दुबई नहीं गया है। एक सितंबर को उसके मोबाइल की लोकेशन शाहजहांपुर, बसंतापुर आदि जगह थी। एक सितंबर की रात दस बजे मिट्ठू सिंह की रमनदीप कौर से बात भी हुई थी।इसके बाद रात में डेढ़ बजे फिर बात हुई। उन्होंने पूरे मामले से शाहजहांपुर के तत्कालीन एसपी डॉ. मनोज कुमार को अवगत कराया और मिट्ठू का फोटो भी पुलिस को भेजा था। इससे पुलिस की राह काफी आसान हो गई थी।




करोड़ों की थी मालकिन, अब जेल में जमीन पर कटेगी रातें: पुवायां। इंग्लैंड में सुखजीत उर्फ सोनू के पास दो बीएमडब्ल्यू कार, दो कोठियां और करोड़ों की संपत्ति थी। बसंतापुर में उनके पास 23 एकड़ बेशकीमती भूमि भी है। इंग्लैड के डर्बी निवासी रमनदीप कौर एक मॉल में मैनेजर थी। सुखजीत और रमनदीप ने प्रेम विवाह किया था। अब उसकी रातें जेल की पथरीली जमीन पर कटेंगी। संवाद






बीएमडब्ल्यू से कोर्ट आती थी रमनदीप कौर: कोर्ट ने अपने फैसले में जिक्र किया है कि एनआरआई रमनदीप कौर काफी अमीर महिला है। कोर्ट में पेशी पर बीएमडब्ल्यू कार से आती थी। चार अक्तूबर को सुनवाई के दौरान उसने अपनी सास वंश कौर को काफी भला-बुरा कहा था। सजा में कोर्ट ने इस बात का भी संज्ञान लिया है।




विवेचक ने चश्मदीद का बयान दर्ज नहीं किया, रमनदीप से लिए रुपये: संगीन वारदात के बावजूद विवेचक और तत्कालीन बंडा के थाना प्रभारी ने घोर लापरवाही की। कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में लिखा है कि राजेश कुमार सिंह ने जिस तरह लापरवाही पूर्वक विवेचना की, वह समझ से परे है। उसने चश्मदीद साक्ष्य सुखजीत के बेटे अर्जुन के बयान दर्ज नहीं किए। राजेश सिंह ने कहा कि चूंकि अर्जुन विदेश में पढ़ता है और मानवता के आधार पर उसका बयान नहीं दर्ज किया। वहीं सुखजीत सिंह के फार्म हाउस पर काम करने वाले रामदास ने अदालत में बयान दिया था कि घटना के बाद रमनदीप ने उससे लिफाफा मंगाया था और उसमें कई नोट डालकर दरोगा को दिए थे। ऐसे में साफ है कि केस कमजोर करने और दोषियों को बचाने के लिए चश्मदीद साक्षी का बयान दरोगा ने दर्ज नहीं किया था।

कोर्ट ने कहा कि सुखजीत की मां वंश कौर ने एसपी से मिलकर प्रार्थना पत्र दिया जिसके बाद दोबारा विवेचना हुई। कोर्ट ने पुलिस महानिदेशक को आदेश दिए हैं कि वह पुलिस की छवि को सुधारने के लिए विवेचक राजेश कुमार सिंह के खिलाफ कड़ी से कड़ी विभागीय कार्रवाई करें। वह आम लोगों को यह विश्वास दिलाएं कि पुलिस पैसे लेकर काम नहीं करती और न ही पैसे लेकर केस बनाती और बिगाड़ती है। दो माह के अंदर यह अवगत कराएं कि क्या विभागीय कार्रवाई विवेचक के खिलाफ की गई?






हाईकोर्ट में अपील करेंगे अधिवक्ता: रमनदीप कौर के पक्ष में उसके अधिवक्ता ने अदालत के सामने यह तर्क प्रस्तुत किया कि उसका भरा-पूरा परिवार है जिसके देखभाल की जिम्मेदारी उसके कंधों पर है। उसका यह पहला अपराध है। उसकी सास ने पति की हत्या में उसे ही फंसा दिया है। वहीं गुरुप्रीत उर्फ मिट्ठू के अधिवक्ता ने अदालत में कहा कि उसके परिवार की जिम्मेदारी वह उठाता है। उसका कोई आपराधिक इतिहास नहीं है। उसे कम से कम सजा दी जाए। हालांकि अदालत ने सारे तर्क मानने से इन्कार कर दिया। रमनदीप और मिट्ठू के अधिवक्ता और सेंट्रल बार एसोसिएशन के अध्यक्ष ब्रजेश वैश्य ने कहा कि वह अब उच्च न्यायालय में अपील करेंगे।

पिता की मौत के बाद डर्बी चले गए थे सुखजीत: सुखजीत के पिता बल्देव सिंह की वर्ष 1990 में बरेली के पास एक सड़क दुर्घटना में मौत हो गई थी। उनके साथ एक दोस्त की भी इसी हादसे में जान चली गई थी। वहीं, मां वंश कौर भी घायल हुई थीं। उस दिन सभी लोग सुखजीत का स्कूल में एडमिशन कराने जालंधर जा रहे थे। उस वक्त सुखजीत नौ साल के थे। कुछ दिन तक सुखजीत ने जालंधर में पढ़ाई की। इसी दौरान मिट्ठू से उसकी दोस्ती हुई थी। इसके बाद बहन कुलविंदर कौर ने पति कुलदीप सिंह के कहने पर इकलौते भाई को अपने पास डर्बी बुला लिया। सुखजीत की दो अन्य बहनें मंजीत कौर जालंधर और कोमल कौर बंडा के ही गांव गदाईसांडा में रहती हैं।
इंग्लैंड में बहन-बहनोई ने सुखजीत को बेटे की तरह पाला और उच्च शिक्षा दिलाई। पढ़ाई पूरी करने के बाद सुखजीत वहां टैंकर चलाने लगे। वर्ष 2000 में सुखजीत ने डर्बी में रमनदीप कौर से शादी की थी। रमनदीप का परिवार मूलरूप से जालंधर का रहने वाला है लेकिन सभी लाेग डर्बी में काफी समय से रह रहे हैं।



मिट्ठू से दूर रहने को था कहा: सुखजीत ने रमनदीप कौर से अपनी मर्जी से शादी की थी। इसके बाद एक वर्ष तक दोनों बसंतापुर रहे और फिर डर्बी चले गए। शादी के बाद सुखजीत और मिट्ठू का याराना बढ़ा तो बहन-बहनोई ने सुखजीत को समझाकर मिट्ठू से दूर रहने के लिए कहा था।




माता-पिता ने रमनदीप से तोड़ लिया था नाता: डर्बी के एक मॉल में मैनेजर रमनदीप कौर ने सुखजीत से प्रेम विवाह किया था। इस वजह से उसके अपने पिता और मां से संबंध खत्म हो गए थे। रमनदीप जाट और सुखजीत कंबोज सिख थे। इस कारण रमनदीप के परिजन रिश्ते के खिलाफ थे। हालांकि, शादी के बाद रमनदीप के पिता और मां से संबंध सामान्य हो गए। रमनदीप के पहले पुत्र के जन्म पर दोनों बसंतापुर भी आए थे। सुखजीत हत्याकांड के समय दोनों भारत में ही थे। दो सितंबर को उनकी डर्बी के लिए फ्लाइट थी। कुलविंदर ने हत्या की जानकारी देकर उनसे रुकने के लिए कहा था, लेकिन दोनों डर्बी चले गए। हत्या में रमनदीप का नाम आने पर पिता और मां ने रमनदीप की मदद करने और शाहजहांपुर आने से इन्कार कर दिया था। उन्होंने कहा था कि रमनदीप ने बेहद गलत काम किया है, इस कारण वे उसके साथ नहीं हैं।
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