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पैसे के अभाव में मीना-प्रीति की पढ़ाई ठप
जलालाबाद।
Updated Wed, 01 Jul 2015 09:19 PM IST
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बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने को सरकार समय समय पर तमाम योजनाएं चलाती रहती है, जबकि विभिन्न संगठन भी गोष्ठी आदि के जरिये लोगों के बीच जागरूकता लाने का प्रयास करते हैं, लेकिन इसके बाद भी इस महत्वपूर्ण कार्य में खासकर ग्रामीण इलाकों मेें अपेक्षित सफलता मिलती दिखाई नहीं दे रही। इसके पीछे विभिन्न अभावों के अलावा शिक्षा के पर्याप्त साधन मौजूद न होना बड़ा कारण माना जा रहा है। इसके चलते कई बालिकाओं को अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़ना मजबूरी बन जाती है।
गांव याकूबपुर के प्रमोद कुमार की बेटी प्रीति कक्षा आठ की पढ़ाई करने के बाद घर पर बैठ गई। हालांकि प्रीति आगे पढ़ना चाहती थी, लेकिन उसे अपनी इस इच्छा से इसलिए समझौता करना पड़ा क्योंकि घर की आर्थिक स्थिति ने इसकी इजाजत नहीं दी। बताया उसके पिता बीमारी के चलते बिस्तर पर हैं, घर में आमदनी का कोई जरिया नहीं है। गांव में प्राइमरी स्कूल था जहां से कक्षा पांच पास करने के बाद गांव नगरिया के सरकारी स्कूल से आठवां कर लिया। आगे की पढ़ाई के लिए उसके घरवालों के पास पैसा नहीं है। कुछ ऐसा ही हाल ठिलिया चलाकर अपने परिवार की गाड़ी खींच रहे इसी गांव के रामवीर का है। इनकी बेटी मीना ने गांव के स्कूल से कक्षा पांच पास करने के बाद पढ़ाई बंद कर दी। रामवीर ने बताया कि घर की माली हालत ठीक न होने के साथ ही गांव में आगे की पढ़ाई के लिये कोई व्यवस्था नहीं है।
महिला उत्थान समिति नाम के एनजीओ का संचालन कर रही आसमां सुल्ताना ने बताया कि वह अपने एनजीओ के माध्यम से महिलाओं के जीवन स्तर को बेहतर बनाने के अलावा बालिका शिक्षा के बारे में लोगों को जागरूक करने के लिए प्रचार प्रसार करते हैं, लेकिन इसके लिए जिन ठोस प्रयास किए जाने की जरूरत है, वह नहीं हो पा रहे है।
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साधनहीन छात्राएं पढ़ाई कैसे करें
तिलहर। सरकार कदम-कदम पर सब को शिक्षा का नारा बुलंद कर रही है, लेकिन अशिक्षित और साधनहीन अभिभावक अपनी बालिकाओं को भौगोलिक परिस्थितियों और साधनों की कमी के कारण आठवीं के बाद पढ़ाई जारी रखने में दिलचस्पी नहीं लेते। जूनियर की पढ़ाई के बाद निजी विद्यालयों की तो बाढ़ है, किंतु सरकारी विद्यालय के रूप में ढकिया रघा, समधाना और नौगाईं में राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय खोले गये हैं। आस पास के क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियों के कारण भी बथुईअक्का, बरुआर, पकड़िया, चकुलिया, त्रिलोकपुर, बिहारीपुर मुड़िया, हुसैनापुर, पुरायूं आदि क्षेत्र की बालिकाओं के अभिभावक आगे की शिक्षा के लिये विद्यालयों की दूरी सात आठ किमी होने के कारण टाल मटोल कर पढ़ाई के बजाय शादी करने में ज्यादा रुचि लेते हैं।
‘बॉ’ स्कूलों के उच्चीकरण, नवोदय
जैसे विद्यालयों की दरकार
ग्राम समधाना की प्रधान पुष्पा देवी का कहना है कि बॉ स्कूलों में नवोदय जैसी सुविधाएं पाकर अभिभावक उच्च स्तर पर भी ऐसी ही सुविधा की अपेक्षा रखते हैं। न मिलने पर लड़कियों का मुंह चौके चूल्हे की ओर मोड़ कर कम उम्र में शादी करते जिम्मेदारी से मुक्ति पाने की कोशिश करते हैं। प्रधान का कहना है कि आठवें के बाद बा स्कूल और नवोदय जैसी संस्थाओं को बढ़ावा मिलना चाहिये। जिससे बालिकायें संसाधनों के अभाव में पढ़ाई से विमुख न हो।
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गांव याकूबपुर के प्रमोद कुमार की बेटी प्रीति कक्षा आठ की पढ़ाई करने के बाद घर पर बैठ गई। हालांकि प्रीति आगे पढ़ना चाहती थी, लेकिन उसे अपनी इस इच्छा से इसलिए समझौता करना पड़ा क्योंकि घर की आर्थिक स्थिति ने इसकी इजाजत नहीं दी। बताया उसके पिता बीमारी के चलते बिस्तर पर हैं, घर में आमदनी का कोई जरिया नहीं है। गांव में प्राइमरी स्कूल था जहां से कक्षा पांच पास करने के बाद गांव नगरिया के सरकारी स्कूल से आठवां कर लिया। आगे की पढ़ाई के लिए उसके घरवालों के पास पैसा नहीं है। कुछ ऐसा ही हाल ठिलिया चलाकर अपने परिवार की गाड़ी खींच रहे इसी गांव के रामवीर का है। इनकी बेटी मीना ने गांव के स्कूल से कक्षा पांच पास करने के बाद पढ़ाई बंद कर दी। रामवीर ने बताया कि घर की माली हालत ठीक न होने के साथ ही गांव में आगे की पढ़ाई के लिये कोई व्यवस्था नहीं है।
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महिला उत्थान समिति नाम के एनजीओ का संचालन कर रही आसमां सुल्ताना ने बताया कि वह अपने एनजीओ के माध्यम से महिलाओं के जीवन स्तर को बेहतर बनाने के अलावा बालिका शिक्षा के बारे में लोगों को जागरूक करने के लिए प्रचार प्रसार करते हैं, लेकिन इसके लिए जिन ठोस प्रयास किए जाने की जरूरत है, वह नहीं हो पा रहे है।
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साधनहीन छात्राएं पढ़ाई कैसे करें
तिलहर। सरकार कदम-कदम पर सब को शिक्षा का नारा बुलंद कर रही है, लेकिन अशिक्षित और साधनहीन अभिभावक अपनी बालिकाओं को भौगोलिक परिस्थितियों और साधनों की कमी के कारण आठवीं के बाद पढ़ाई जारी रखने में दिलचस्पी नहीं लेते। जूनियर की पढ़ाई के बाद निजी विद्यालयों की तो बाढ़ है, किंतु सरकारी विद्यालय के रूप में ढकिया रघा, समधाना और नौगाईं में राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय खोले गये हैं। आस पास के क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियों के कारण भी बथुईअक्का, बरुआर, पकड़िया, चकुलिया, त्रिलोकपुर, बिहारीपुर मुड़िया, हुसैनापुर, पुरायूं आदि क्षेत्र की बालिकाओं के अभिभावक आगे की शिक्षा के लिये विद्यालयों की दूरी सात आठ किमी होने के कारण टाल मटोल कर पढ़ाई के बजाय शादी करने में ज्यादा रुचि लेते हैं।
‘बॉ’ स्कूलों के उच्चीकरण, नवोदय
जैसे विद्यालयों की दरकार
ग्राम समधाना की प्रधान पुष्पा देवी का कहना है कि बॉ स्कूलों में नवोदय जैसी सुविधाएं पाकर अभिभावक उच्च स्तर पर भी ऐसी ही सुविधा की अपेक्षा रखते हैं। न मिलने पर लड़कियों का मुंह चौके चूल्हे की ओर मोड़ कर कम उम्र में शादी करते जिम्मेदारी से मुक्ति पाने की कोशिश करते हैं। प्रधान का कहना है कि आठवें के बाद बा स्कूल और नवोदय जैसी संस्थाओं को बढ़ावा मिलना चाहिये। जिससे बालिकायें संसाधनों के अभाव में पढ़ाई से विमुख न हो।