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Shahjahanpur News: तेज हवा और गरज के साथ हुई बारिश से छह डिग्री लुढ़का पारा

Wed, 25 Jan 2023 06:30 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Wed, 25 Jan 2023 06:30 AM IST
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Mercury rolled six degrees due to strong wind and thunder
शाहजहांपुर। मौसम के बिगड़े मिजाज ने ठंड फिर बढ़ा दी है। सोमवार मध्य रात्रि से मंगलवार सुबह तक तेज हवा और गरज के साथ रुक-रुक कर बारिश होती रही। सुबह तक आठ मिमी बारिश होने और दिनभर सर्द हवा चलने से अधिकतम तापमान छह डिग्री घटकर 20 डिग्री सेल्सियस हो गया। बारिश के कारण सीवर लाइन के लिए खोदी गईं सड़कें दलदल में बदल गईं। इससे लोगों का पैदल निकलना तक दूभर हो गया।
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मौसम में बदलाव के संकेत सोमवार दोपहर बादल छाने से ही मिलने लगे थे। रात नौ बजे से बूंदाबांदी शुरू हो गई। दस बजे के बाद कुछ देर को बारिश थमी लेकिन आधी रात से तेज बारिश होने लगी। सुबह छह बजे तक रुक-रुक कर बारिश होती रही। सुबह लोगों को सर्द हवाओं का सामना करना पड़ा। बारिश से शहर में जगह-जगह जलभराव और कीचड़ होने से आवागमन प्रभावित होने लगा।
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इन दिनों लाल इमली चौराहा-ईदगाह मार्ग पर सीवर लाइन बिछाने का काम चल रहा है। जगह-जगह पाइप चैंबर बनाने के लिए खोदे गए गड्ढों में पानी भर गया। सड़क पर पड़ी मिट्टी दलदल में बदल गई। इस कारण दुपहिया वाहन चालक और पैदल राहगीर गिरते-फिसलते रहे। कई जगह जाम लगने की नौबत आ गई। बहादुरगंज गल्ला मंडी से लोहा मंडी होते हुए लकड़ी मंडी और घंटाघर की ओर जाने वाले खस्ताहाल मार्ग पर भी कई जगह पानी भर गया। गन्ना शोध परिषद के मौसम वैज्ञानिक डॉ. मनमोहन सिंह का कहना है कि सुबह से शाम तक वायुदाब सामान्य से कम होने के कारण बुधवार को भी बारिश और हल्की ओलावृष्टि होने की आशंका है।
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तेज हवा से खेतों में बिछी सरसों, गन्ना भी गिरा
देर रात से सुबह तक बारिश के साथ तेज हवा चलने से जैतीपुर, खुदागंज, निगोही आदि क्षेत्रों में फूल चुकी सरसों की फसल खेतों में बिछ गई। बारिश से अन्य फसलों को अभी कोई नुकसान नहीं हुआ है, लेकिन कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी अधिकारी एवं वरिष्ठ शष्य वैज्ञानिक डॉ. एनसी त्रिपाठी का कहना है कि यदि बारिश के साथ तेज हवा का क्रम जारी रहा तो खेतों में खड़ा गन्ना भी गिर जाएगा। जिन इलाकों में ज्यादा बारिश हुई है, वहां गन्ना गिर भी गया है। जिले में 98000 हेक्टेयर में गन्ना बोया गया है जबकि 2.07 लाख हेक्टेयर जमीन पर इस समय गेहूं, मटर, चना और सब्जी की फसलें है। कृषि वैज्ञानिक डॉ. त्रिपाठी के अनुसार 80 से 85 दिन में तैयार होने वाला अर्ली वैरायटी आलू खोदा जाने लगा है। देर से पकने वाली आलू के लिए बारिश नुकसानदेह है। ओलावृष्टि हुई तो सरसों, गेहूं और सब्जी वाली फसलों को व्यापक क्षति होगी।
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