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Shahjahanpur News: सऊदी अरब के रास्ते कुवैत से आएंगे ग्रंथी समेत कई भारतीय
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निगोही के लोहरगवां में बेटे वसीम खां से बात जुबैर हुसैन। संवाद
पुवायां। कुवैत में फंसे पुवायां और बंडा क्षेत्र के लोग बस से सऊदी अरब भेजे गए हैं। सऊदी से निजी प्लेन से यात्री मुंबई आएंगे। अभी प्लेन के आने का समय निश्चित नहीं हुआ है।
पुवायां के गांव जंगलपुर के परमजीत सिंह, लखीमपुर के गांव रामपुर राजा के दलवीर सिंह, बंडा के गांव कूरा के साहब सिंह और विक्रमजीत सिंह ग्रंथी हैं। चारों लोग धर्म प्रचार के सिलसिले में इंग्लैंड जा रहे थे, लेकिन अमेरिका-ईरान के बीच युद्ध शुरू होने से उनके विमान को कुवैत में रोक दिया गया। इससे चारों लोग कुवैत में फंस गए थे। ईरान के पड़ोसी देशों पर भी मिसाइल दागने से परिजन चिंतित हो उठे थे।
परमजीत सिंह की अपने चाचा बलकार सिंह से बात हुई है। परमजीत ने चाचा को बताया है कि उनके सहित 107 यात्रियों को भारत भेजे जाने के लिए बस से सऊदी अरब भेजा गया है। सऊदी से निजी विमान से सभी को मुंबई तक पहुंचाया जाएगा। इसके बाद यात्री अपने गंतव्य के लिए रवाना होंगे। परमजीत के अनुसार, कुवैत में सभी भारतीय सुरक्षित जगहों पर थे और किसी को कोई समस्या नहीं हुई।
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युद्ध को लेकर वहां फंसे लोग चिंतित थे, लेकिन अब सऊदी भेजे जाने के बाद उनको उम्मीद है कि विमान से जल्द ही मुंबई पहुंच जाएंगे। अभी विमान के रवाना होने की तिथि और समय तय नहीं हुआ है।
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अबूधाबी से वसीम ने घरवालों को बताए युद्ध के भयावह हालात
निगोही। लोहरगवां गांंव से रोजी-रोटी कमाने की गरज से एक वर्ष पहले संयुक्त अरब अमीरात की राजधानी अबूधाबी में इलेक्ट्रीशियन का काम करने गए गए वसीम खां ने घर वालों को वीडियोकॉल करके वहां युद्ध के राेंगटे खड़े कर देने वाले भयावह हालात बताए। उनके अलावा गांव के तीन अन्य युवक भी खाड़ी के युद्धग्रस्त क्षेत्र में फंसे हुए हैं।
अबूधाबी के मुस्तफा सिटी के इंडस्ट्रियल एरिया में रह रहे वसीम ने अपने पिता जुबैर हसन को बताया कि घर की छतों के ऊपर से रोजाना अनगिनत मिसाइलें आसपास तेज आवाज के साथ फट रही हैं। इससे घरों के खिड़की और दरवाजे हिलने से ऐसा लगता है, मानो भूकंप आ गया हो।
अपनों से हजारों मील दूर बैठकर पिता से बात करते हुए वसीम भावुक हुए तो उनके पिता की आंंखें भी बह चलीं। हालांंकि, वसीम के यह बताने से उनके घरवालों को थोड़ी तसल्ली हुई कि हालात बहुत खराब है, लेकिन सरकार सभी नागरिकों को खाना बांट रही है और किसी को कोई दिक्कत नहीं होने दे रही है।
वसीम ने घरवालों को यह भी बताया कि वह आजकल अबूधाबी के सुल्तान के महल में बिजली फिटिंग का कार्य कर रहे हैं। इसके लिए उन्हें अपने आवास से करीब 65 किमी दूर जाना पड़ता है, रास्ते में हमेशा डर बना रहता है।
इसी गांव के सुहेल खां, आमिर खां, और तस्लीम खां भी खाड़ी के युद्धग्रस्त क्षेत्र में घिरे हुुए हैं। इसलिए उनके घर वाले भी अपने लाड़लों की सलामती और अमन के लिए दुआएं करने के साथ भारत सरकार से उनकी वतन सकुशल वापसी की गुहार लगा रहे हैं। संवाद
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पुवायां के गांव जंगलपुर के परमजीत सिंह, लखीमपुर के गांव रामपुर राजा के दलवीर सिंह, बंडा के गांव कूरा के साहब सिंह और विक्रमजीत सिंह ग्रंथी हैं। चारों लोग धर्म प्रचार के सिलसिले में इंग्लैंड जा रहे थे, लेकिन अमेरिका-ईरान के बीच युद्ध शुरू होने से उनके विमान को कुवैत में रोक दिया गया। इससे चारों लोग कुवैत में फंस गए थे। ईरान के पड़ोसी देशों पर भी मिसाइल दागने से परिजन चिंतित हो उठे थे।
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परमजीत सिंह की अपने चाचा बलकार सिंह से बात हुई है। परमजीत ने चाचा को बताया है कि उनके सहित 107 यात्रियों को भारत भेजे जाने के लिए बस से सऊदी अरब भेजा गया है। सऊदी से निजी विमान से सभी को मुंबई तक पहुंचाया जाएगा। इसके बाद यात्री अपने गंतव्य के लिए रवाना होंगे। परमजीत के अनुसार, कुवैत में सभी भारतीय सुरक्षित जगहों पर थे और किसी को कोई समस्या नहीं हुई।
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युद्ध को लेकर वहां फंसे लोग चिंतित थे, लेकिन अब सऊदी भेजे जाने के बाद उनको उम्मीद है कि विमान से जल्द ही मुंबई पहुंच जाएंगे। अभी विमान के रवाना होने की तिथि और समय तय नहीं हुआ है।
अबूधाबी से वसीम ने घरवालों को बताए युद्ध के भयावह हालात
निगोही। लोहरगवां गांंव से रोजी-रोटी कमाने की गरज से एक वर्ष पहले संयुक्त अरब अमीरात की राजधानी अबूधाबी में इलेक्ट्रीशियन का काम करने गए गए वसीम खां ने घर वालों को वीडियोकॉल करके वहां युद्ध के राेंगटे खड़े कर देने वाले भयावह हालात बताए। उनके अलावा गांव के तीन अन्य युवक भी खाड़ी के युद्धग्रस्त क्षेत्र में फंसे हुए हैं।
अबूधाबी के मुस्तफा सिटी के इंडस्ट्रियल एरिया में रह रहे वसीम ने अपने पिता जुबैर हसन को बताया कि घर की छतों के ऊपर से रोजाना अनगिनत मिसाइलें आसपास तेज आवाज के साथ फट रही हैं। इससे घरों के खिड़की और दरवाजे हिलने से ऐसा लगता है, मानो भूकंप आ गया हो।
अपनों से हजारों मील दूर बैठकर पिता से बात करते हुए वसीम भावुक हुए तो उनके पिता की आंंखें भी बह चलीं। हालांंकि, वसीम के यह बताने से उनके घरवालों को थोड़ी तसल्ली हुई कि हालात बहुत खराब है, लेकिन सरकार सभी नागरिकों को खाना बांट रही है और किसी को कोई दिक्कत नहीं होने दे रही है।
वसीम ने घरवालों को यह भी बताया कि वह आजकल अबूधाबी के सुल्तान के महल में बिजली फिटिंग का कार्य कर रहे हैं। इसके लिए उन्हें अपने आवास से करीब 65 किमी दूर जाना पड़ता है, रास्ते में हमेशा डर बना रहता है।
इसी गांव के सुहेल खां, आमिर खां, और तस्लीम खां भी खाड़ी के युद्धग्रस्त क्षेत्र में घिरे हुुए हैं। इसलिए उनके घर वाले भी अपने लाड़लों की सलामती और अमन के लिए दुआएं करने के साथ भारत सरकार से उनकी वतन सकुशल वापसी की गुहार लगा रहे हैं। संवाद