गांव अगौना और बेला के बीच स्थित बाबा मन कामेश्वर नाथ सबकी मनोकामना पूरी करते हैं। यही कारण है कि यहां वर्ष भर हवन, पूजन आदि के कार्यक्रम चलते रहते हैं। सावन में इस मंदिर पर भक्तों की भारी भीड़ होती है। किवदंती है कि काफी समय पहले मन कामेश्वरनाथ बाबा का स्थान घने जंगलों में गोमती नदी के किनारे था। बाबा यहां शिवलिंग के रूप में बिराजमान थे। यह शिवलिंग प्रत्येक व्यक्ति को अलग रंग में दिखाई देता था। शिवलिंग की हर दिन ब्रह्म मुहूर्त में पूजा हो जाती देख लोग हैरान रह जाते थे, कई बार लोगों ने रात में रुककर पूजा करने वाले को देखने का प्रयास किया, लेकिन उन्हें घंटे और शंखनाद के अलावा कुछ भी सुनाई, दिखाई नहीं दिया। कई वर्ष पूर्व ब्रह्मचारी प्रकाशानंद ने चमत्कारी शिवलिंग के बारे में अपने साथी सच्चिदानंद को जानकारी दी थी । इसके बाद दोनों ने शिवलिंग को बैलगाड़ी से जंगल से बाहर लाने का प्रयास किया, लेकिन सफल न हो सके। इसके बाद प्रकाशानंद ने शिवलिंग के पास बैठकर पूजा अर्चना की, प्रसन्न भगवान शंकर ने उन्हें शिवलिंग ले जाने की आज्ञा दे दी और कहा कि जो भी इस चमत्कारी शिवलिंग के दर्शन करेगा, उसकी मनोकामना पूरी होगी। प्रकाशानंद और सच्चिदानंद शिवलिंग को बहंगी में लेकर चल दिए। रात हो जाने और लालटेन में तेल समाप्त हो जाने पर उन्होंने गोमती नदी से जल लेकर लालटेन में भर लिया और फिर आगे चल दिए। दोनों ने गांव अगौना बुजुर्ग की चार एकड़ भूमि जो खाली पड़ी थी उसमें मन कामेश्वर नाथ की विधिवत स्थापना कर दी। तब से आज तक इस पावन स्थान पर मनोकामना पूर्ण होने के कारण दूरदराज से लोग आकर पूजन, हवन, अखंड पाठ आदि कराते हैं। अमावस्या और पूर्णिमा को यहां भारी भीड़ होती है।