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Shahjahanpur News: हर वर्ष मलेरिया बरपा रहा कहर, शोध संस्थान खोलने के नहीं हुए प्रयास

Thu, 25 Apr 2024 06:38 AM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर Updated Thu, 25 Apr 2024 06:38 AM IST
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Malaria is wreaking havoc every year, no efforts have been made to open research institutes.
शाहजहांपुर में मच्छरों की तलाश करती स्वास्थ्य विभाग की टीम। स्रोत: स्वास्थ्य विभाग।
शाहजहांपुर। मच्छरजनित मलेरिया रोग का इतिहास शाहजहांपुर में शताब्दियों पुराना है। वहीं, 1986 में खुला मलेरिया रिसर्च सेंटर 2007 में बंद हो चुका है। इसको खुलवाने के लिए दोबारा प्रयास नहीं किए गए।
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25 अप्रैल को विश्व मलेरिया दिवस है। एसएस कॉलेज के इतिहास विभाग के अध्यक्ष डॉ. विकास खुराना ने बताया कि शाहजहांपुर ब्रिटिशकाल से ही मलेरिया के अनुकूल स्थान रहा है। जिले के उत्तर-पूर्व के घने जंगलों तथा अवसादयुक्त नदियों के कारण यहां इस ज्वर की तीव्रता इतनी अधिक थी कि पूरे क्षेत्र को ही मृत्यु का इलाका कहा जाता था।
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डॉ. विकास खुराना ने बताया कि यहां बहने वाली एक नदी उली का नामकरण उल्ल से है। इसका स्थानीय भाषा में अर्थ है मच्छरों से फैलने वाला बुखार। जिले की अधिकांश नदियों की उत्पत्ति झीलों, तालाबों, वर्षा संचित क्षेत्र से हुई है। मानसून गुजर जाने के बाद ये जल धाराएं अवसाद के अतिरिक्त कुछ नहीं रहती। इनके कारण मलेरिया क्षेत्र को तीव्र प्रभाव में लेता रहा है।
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जनपद के ब्रिटिश गजेटियर का अध्ययन बताता है कि वर्ष 1881 से 1890 तक जनपद में हुई कुल मौतों में से तीन चौथाई के पीछे का कारण मलेरिया था। इस दशक में जिला अस्पताल में ही कुल 16082 केस दर्ज किए गए थे। 20वीं सदी के प्रारंभिक वर्षों तक कमोबेश स्थिति ऐसी ही भयावह बनी रही।

1984 में महामारी बना था मलेरिया
इस बीमारी की रोकथाम के लिए पहला सफल प्रयोग कुनैन के रूप में सामने आया। सन् 1956 से 1960 तक जिले में मलेरिया उन्मूलन के विशेष प्रयास किए गए। ब्रिटिश काल में मलेरिया की रोकथाम के लिए कुनैन (मलेरिया-ज्वर का दवा) का वितरण किया जाता था। 1984 को जिले में मलेरिया महामारी के रूप में सामने आया। इस वर्ष जिले में 114 गांवों में फैली इस बीमारी से छह सौ लोगों की मौत हो गई थी। पांच लाख के आसपास जनसंख्या प्रभावित हुई थी।



बंद हो गया मलेरिया रिसर्च सेंटर

सदर बाजार क्षेत्र में मैजेस्टिक सिनेमा के पास भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान परिषद द्वारा 1986 में मलेरिया रिसर्च सेंटर की स्थापना की गई थी। इसका कार्य मलेरिया की रोकथाम के लिए अध्ययन और सिफारिश करना, दवाओं का वितरण आदि था। 50 से ज्यादा अधिकारी-कर्मचारी कार्यरत थे। बताया जाता है कि फंड के अभाव में 2007 में इसे बंद कर दिया गया। हथौड़ा के पास इसके भवन के लिए 1988 में जमीन खरीदी गई थी। अब इस जमीन पर कब्जे भी होने लगे हैं। समय-समय पर इसे शुरू करने की मांग उठती रही लेकिन कवायद आगे नहीं बढ़ सकी।



मलेरिया शोध संस्थान को फिर से शुरू कराने की जरूरत है। इसके लिए शाहजहांपुर के जनप्रतिनिधियों को प्रयास करने चाहिए। मलेरिया महामारी की रोकथाम के लिए यह जरूरी है। इसके जरिए जिले का नाम भी दूरदराज तक होगा।

- डॉ. विकास खुराना, इतिहास विभागाध्यक्ष, एसएस कॉलेज


2591 आशाएं घर-घर दे रहीं दस्तक
संचारी रोग नियंत्रण के लिए दस्तक अभियान के तहत लोगों को मच्छरजनित राेगों से बचाव के लिए जागरूक किया जा रहा। संचारी रोगों से निपटने को 11 विभागों को जिम्मेदारी दी गई। टीमें घर-घर जाकर बुखार से पीड़ित रोगियों को तलाश रहीं हैं। 2591 आशाओं को जिम्मा सौंपा गया है। जिला मलेरिया अधिकारी राजीव मौर्या ने बताया कि मच्छर का लार्वा मिलने पर उसे नष्ट कराया जा रहा।
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