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जिले में रिटेल और होलसेल की 11 सौ दुकानों में लटके ताले

Tue, 30 May 2017 11:40 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, शाहजहांपुर
अमर उजाला ब्यूरो, शाहजहांपुर Updated Tue, 30 May 2017 11:40 PM IST
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Lock and lock locks in retail and wholesale shops in the district
हड़ताल - फोटो : शाहजहांपुर ब्यूरो
मेडिकल स्टोर पर पंजीकृत फार्मासिस्ट और ई-पोर्टल लागू करने के विरोध में प्रस्तावित राष्ट्रव्यापी हड़ताल का जिले में खासा असर रहा। मंगलवार को जिले के दवा व्यापारियों ने अपने प्रतिष्ठान बंद रखे और जुलूस के रूप में कलक्ट्रेट पहुंचकर मुख्यमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन डीएम को सौंपा। व्यापारियों ने इस मुद्दे पर आरपार की लड़ाई लड़ने का एलान किया। केमिस्ट एसोसिएशन का दावा है कि जिले में फुटकर और थोक विक्रेताओं की 11 सौ दुकानों पर ताले लटके रहे। इससे करीब एक करोड़ का कारोबार प्रभावित हुआ।
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सुबह लगभग दस बजे दवा व्यापारी जिला केमिस्ट एसोसिएशन के बैनर तले अलका गेस्ट हाउस पर इकट्ठा हुए। यहां से एसोसिएशन के चेयरमैन नरेशचंद्र गुप्ता के नेतृत्व में जुलूस की शक्ल में नारेबाजी करते हुए कलक्ट्रेट पहुंचे। कलक्ट्रेट में हुई सभा में व्यापारियों ने कहा कि फार्मेसी के संचालन के लिए पंजीकृत फार्मासिस्ट की अनिवार्यता का कोई विरोध नहीं है, लेकिन केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट के रूप में संचालित दवा दुकानों पर पंजीकृत फार्मासिस्ट की अनिवार्यता का वे विरोध करते हैं। केमिस्ट एवं ड्रगिस्ट फेडरेशन से संबंद्ध जिला केमिस्ट एसोसिएशन की ओर से मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन डीएम को सौंपा गया। ज्ञापन में कहा गया है कि पहले डॉक्टर के लिखे फार्मूले को निर्धारित विधि से पीसकर/मिलाकर खुराक तैयार करके मरीज की दी जाती थी। इस प्रक्रिया को कंपाउंडिंग और कंपाउंडिग करने वाले को कंपाउंडर कहा जाता था। मौजूदा समय में किसी भी मेडिकल स्टोर पर डॉक्टर के फार्मूले की कंपाउंडिग नहीं की जाती है, बल्कि डॉक्टर की लिखी ब्रांडेड अथवा जेनेरिक दवा को उसके लेबल पर कंपनी द्वारा अंकित नाम से मिलाकर मरीज या खरीदार को बेची जाती है। इस काम के लिए केवल हिंदी और अंग्रेजी का ज्ञान होना काफी है न कि कंपाउंडिग का ज्ञान। व्यापारियों ने कहा कि वे दुकानों पर पंजीकृत फार्मासिस्ट की अनिवार्यता का विरोध करते हैं।  
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ज्ञापन देने वालों में गोविंद मोहन, नरेशचंद्र गुप्ता, मो. कलीम खां, हरिओम अग्रवाल, पुरुषोत्तम गुप्ता, आलोक गुप्ता, संतोष वर्मा, प्रेम सेठी, प्रदीप जेटली, अशोक सक्सेना, मनीष धवन, मनोज खन्ना, प्रशांत मोहन, शैलेंद्र सक्सेना, नवीन गुप्ता, नवी अहमद, संजय अरोड़ा, संजय अरोड़ा, लक्ष्मण प्रसाद, जसवंत सिंह, धर्म सिंह, प्रवीण शुक्ला, अंबेश शुक्ला, नवी अहमद, नदीम खान, संचित वर्मा, संजीव मिश्र आदि शामिल रहे।
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व्यापारियों को ई-पोर्टल से ये हैं दिक्कतें 
पहले दवा व्यापारी को ई-पोर्टल का रजिस्ट्रेशन कराना होगा। इसके बाद थोक विक्रेता को फुटकर विक्रेता को दवा बेचने से पहले अपनी इनवाइस को ई-पोर्टल पर डालना होगा। इसके बाद ही वह दवा बिक्री कर सकता है। फुटकर विक्रेता भी डॉक्टर के पर्चे को पहले स्कैन करके ई-पोर्टल पर डालेगा, इसके बाद ही इनवाइस मान्य होगी। ई-पोर्टल पर 200 रुपये या इनवाइस का एक प्रतिशत सरकार को देना होगा। 

अपील का भी नहीं हुआ असर
दवा व्यापारियों की प्रस्तावित हड़ताल से मरीजों को होने वाली दिक्कतों को देखते हुए ग्रेट फार्मासिस्ट वेलफेयर सोसाइटी के प्रदेश अध्यक्ष अरविंद गौतम ने दवा विक्रेताओं से हड़ताल न करने की अपील की थी, लेकिन व्यापारियों पर इसका कोई असर नहीं हुआ। 

चेतावनी को दरकिनार कर बंद कराईं दुकानें
दवा व्यापारियों की हड़ताल पर ड्रग इंस्पेक्टर देशबंधु विमल ने चेताया था कि जिनकी दुकानें बंद मिलीं उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी, लेकिन ड्रग इंस्पेक्टर की इस चेतावनी का भी व्यापारियों पर कोई असर नहीं हुआ। केमिस्ट एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने शहर में घूमघूम कर दवा की दुकानें बंद कराईं। हालांकि ज्यादातर दवा व्यापारियों ने खुद ही दुकानें बंद कर रखीं थीं। 

दवा के लिए भटकते रहे मरीज
जिले में दवा व्यापार पूरी तरह ठप रहा। मरीजों को मामूली बीमारी के लिए भी दवा पाने को भटकना पड़ा, लेकिन उन्हें दवा नहीं मिली। शहर के मोहल्ला जलालनगर निवासी वाहिद अली कई दिनोें से बीमार हैं। मंगलवार को उन्हें दवा की जरूरत थी। वह दवा लेने के लिए शहर में भटकते रहे लेकिन उन्हें हर जगह दवा की दुकानें बंद मिलीं। थक हारकर वह स्टेशन रोड पर एक मेडिकल स्टोर के बंद शटर के पास ही बैठ गए।


नर्सिंग होम्स में खुली रहीं दवा की दुकानें
यूं तो पूरे जिले में दवा की दुकानें बंद रही, लेकिन व्यापारियों ने नर्सिंग होम के अंदर चल रहे मेडिकल स्टोर को अपनी हड़ताल में शामिल नहीं किया। इससे जरूरतमंद लोग वहां दवा तलाश करते देखे गए।
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