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गैर इरादतन हत्या में पांच लोगों को उम्रकैद
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शाहजहांपुर। गैर इरादतन हत्या का दोषी करार देते हुए अपर सत्र न्यायाधीश सिद्धार्थ कुमार ने दो सगे भाइयों समेत पांच लोगों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। मुकदमा चलने के दौरान एक महिला आरोपी की मौत हो चुकी है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार यह घटना 12 सितंबर 2006 को हुई थी। घटना की रिपोर्ट निगोही थाने में रूपराम ने दर्ज कराई थी। रिपोर्ट के मुताबिक सास फूलमती रूपराम के पास रहती थीं। उनके घर के सामने की जमीन पर कब्जा करने को लेकर उनकी सास फूलमती से गांव के विजेंद्र व उसके भाई गुड्डू, शांति देवी, वेदराम व उसका भाई कालीचरण और श्यामलाल ने गालीगलौज की। इसका विरोध करने पर फूलमती को लाठी-डंडे से जमकर पीटा था। उनके सिर और शरीर के कई हिस्सों में गहरी चोटें आई थीं। इससे जिला अस्पताल में इलाज के दौरान 15 सितंबर 2006 को फूलमती की मौत हो गई थी। विवेचना के बाद पुलिस ने केवल श्यामलाल के विरुद्ध आरोप पत्र अदालत में दाखिल किया था। मुकदमा चलने के दौरान आरोपी विजेंद्र, गुड्डू, शांतीदेवी, वेदराम, कालीचरण को अदालत ने तलब किया था। मुकदमा चलने के दौरान गवाहों के बयान और सरकारी वकील उमेश चंद्र अग्निहोत्री के तर्कों को सुनने के बाद अपर सत्र न्यायाधीश ने विजेंद्र, गुड्डू, वेदराम, कालीचरण और श्यामलाल को दोषी पाते हुए आईपीसी की धारा 304 के अंतर्गत आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।
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अभियोजन पक्ष के अनुसार यह घटना 12 सितंबर 2006 को हुई थी। घटना की रिपोर्ट निगोही थाने में रूपराम ने दर्ज कराई थी। रिपोर्ट के मुताबिक सास फूलमती रूपराम के पास रहती थीं। उनके घर के सामने की जमीन पर कब्जा करने को लेकर उनकी सास फूलमती से गांव के विजेंद्र व उसके भाई गुड्डू, शांति देवी, वेदराम व उसका भाई कालीचरण और श्यामलाल ने गालीगलौज की। इसका विरोध करने पर फूलमती को लाठी-डंडे से जमकर पीटा था। उनके सिर और शरीर के कई हिस्सों में गहरी चोटें आई थीं। इससे जिला अस्पताल में इलाज के दौरान 15 सितंबर 2006 को फूलमती की मौत हो गई थी। विवेचना के बाद पुलिस ने केवल श्यामलाल के विरुद्ध आरोप पत्र अदालत में दाखिल किया था। मुकदमा चलने के दौरान आरोपी विजेंद्र, गुड्डू, शांतीदेवी, वेदराम, कालीचरण को अदालत ने तलब किया था। मुकदमा चलने के दौरान गवाहों के बयान और सरकारी वकील उमेश चंद्र अग्निहोत्री के तर्कों को सुनने के बाद अपर सत्र न्यायाधीश ने विजेंद्र, गुड्डू, वेदराम, कालीचरण और श्यामलाल को दोषी पाते हुए आईपीसी की धारा 304 के अंतर्गत आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।
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