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मां-बेटी की गला काटकर हत्या में दो दोषियों को आजीवन कारावास
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शाहजहांपुर। 11 साल पहले मां-बेटी की हत्या के अपराध में अपर सत्र न्यायाधीश कक्ष संख्या-42 पिंकू कुमार ने संजय उर्फ संजू और सतेंद्र यादव को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। दोनों ने संपत्ति के लालच में महिलाओं की हत्या की थी। अदालत ने दोनों दोषियों पर अर्थदंड से भी दंडित किया है।
जिला शासकीय अधिवक्ता श्रीपाल वर्मा के मुताबिक सात मार्च 2010 को गांव भंडेरी की प्रधान के पति अशफाक ने पुलिस को सूचना दी थी कि उसके गांव के पश्चिम नहर रोड पर दो महिलाओं की लाश पड़ी है। उनकी गर्दन कटी हुई है, मौके पर खून पड़ा है। शवों की शिनाख्त न होने पर पुलिस ने अज्ञात में रिपोर्ट दर्ज की थी। बाद में पुलिस को दो गुमशुदा महिलाओं के बारे में जानकारी हुई तो उसने लखीमपुर खीरी के फरधन थाना क्षेत्र के गांव सैदापुर के रहने वाले सतीश चंद्र मिश्रा को आठ मार्च को पोस्टमार्टम हाउस बुलाया था। सतीश ने शवों की शिनाख्त अपनी पत्नी मिथलेश और बेटी सुनीता के रूप में की थी। सतीश ने नौ मार्च को सिंधौली थाने में संजू उर्फ संजय और उसके साथी सतेंद्र के खिलाफ नामजद तहरीर दी। सतीश ने बताया कि संजू और सत्येंद्र छह मार्च को उसके घर पर गाड़ी लेकर आए थे। संजू ने कहा कि वह मिथलेश और बेटी सुनीता को नीमसार तीर्थ ले जाना चाहता है। उसने मना कर दिया और खेत पर चला गया। दोपहर करीब एक बजे संजय मिथलेश व सुनीता को लेकर वहां से चला गया। इसके बाद वे नहीं लौटीं।
सतीश ने बताया कि उसने अपनी बेटी सुनीता की शादी पीलीभीत के बिलसंडा क्षेत्र के गांव बमरौली निवासी कमलाशंकर से वारदात के दो साल पहले की थी। कमलाशंकर की पहली पत्नी सुधा के बच्चा न होने के कारण उसने दूसरी शादी सुनीता से की थी। कमलाशंकर के साथ उसका साला संजू भी रहता था। संजू को लगा कि कमलाशंकर की संपत्ति सुनीता के बच्चों को मिल जाएगी। इसीलिए उसने धोखे से ले जाकर सुनीता और उसकी मां मिथलेश की चाकू से गला काटकर हत्या कर दी। पुलिस ने संजू निवासी थाना निगोही ग्राम गुरगवां और उसके साथी सत्येंद्र यादव निवासी ग्राम मऊबासक थाना सदर बाजार को गिरफ्तार कर लिया। वारदात में इस्तेमाल चाकू और गाड़ी भी बरामद कर ली। पुलिस ने अभियुक्तों के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य पाते हुए आरोप पत्र न्यायालय भेजा। न्यायालय ने साक्ष्यों और सरकारी वकील श्रीपाल वर्मा के तर्कों से सहमत होते हुए दोनों दोषियों को आजीवन कारावास की सजा से दंडित किया है।
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जिला शासकीय अधिवक्ता श्रीपाल वर्मा के मुताबिक सात मार्च 2010 को गांव भंडेरी की प्रधान के पति अशफाक ने पुलिस को सूचना दी थी कि उसके गांव के पश्चिम नहर रोड पर दो महिलाओं की लाश पड़ी है। उनकी गर्दन कटी हुई है, मौके पर खून पड़ा है। शवों की शिनाख्त न होने पर पुलिस ने अज्ञात में रिपोर्ट दर्ज की थी। बाद में पुलिस को दो गुमशुदा महिलाओं के बारे में जानकारी हुई तो उसने लखीमपुर खीरी के फरधन थाना क्षेत्र के गांव सैदापुर के रहने वाले सतीश चंद्र मिश्रा को आठ मार्च को पोस्टमार्टम हाउस बुलाया था। सतीश ने शवों की शिनाख्त अपनी पत्नी मिथलेश और बेटी सुनीता के रूप में की थी। सतीश ने नौ मार्च को सिंधौली थाने में संजू उर्फ संजय और उसके साथी सतेंद्र के खिलाफ नामजद तहरीर दी। सतीश ने बताया कि संजू और सत्येंद्र छह मार्च को उसके घर पर गाड़ी लेकर आए थे। संजू ने कहा कि वह मिथलेश और बेटी सुनीता को नीमसार तीर्थ ले जाना चाहता है। उसने मना कर दिया और खेत पर चला गया। दोपहर करीब एक बजे संजय मिथलेश व सुनीता को लेकर वहां से चला गया। इसके बाद वे नहीं लौटीं।
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सतीश ने बताया कि उसने अपनी बेटी सुनीता की शादी पीलीभीत के बिलसंडा क्षेत्र के गांव बमरौली निवासी कमलाशंकर से वारदात के दो साल पहले की थी। कमलाशंकर की पहली पत्नी सुधा के बच्चा न होने के कारण उसने दूसरी शादी सुनीता से की थी। कमलाशंकर के साथ उसका साला संजू भी रहता था। संजू को लगा कि कमलाशंकर की संपत्ति सुनीता के बच्चों को मिल जाएगी। इसीलिए उसने धोखे से ले जाकर सुनीता और उसकी मां मिथलेश की चाकू से गला काटकर हत्या कर दी। पुलिस ने संजू निवासी थाना निगोही ग्राम गुरगवां और उसके साथी सत्येंद्र यादव निवासी ग्राम मऊबासक थाना सदर बाजार को गिरफ्तार कर लिया। वारदात में इस्तेमाल चाकू और गाड़ी भी बरामद कर ली। पुलिस ने अभियुक्तों के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य पाते हुए आरोप पत्र न्यायालय भेजा। न्यायालय ने साक्ष्यों और सरकारी वकील श्रीपाल वर्मा के तर्कों से सहमत होते हुए दोनों दोषियों को आजीवन कारावास की सजा से दंडित किया है।
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