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Shahjahanpur News: यूरिया मिलाकर शराब बनाने के दोषी को आजीवन कारावास

Sat, 17 Oct 2026 01:34 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sat, 17 Oct 2026 01:34 AM IST
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Life imprisonment for person convicted of making liquor by adding urea
शाहजहांपुर। यूरिया मिलाकर शराब बनाने के दोषी को अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। उस पर 35 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। न्यायालय ने आदेश में कहा है कि आरोपी की ओर तैयार की जा रही कच्ची शराब मानव जीवन के लिए घातक थी और मामले के तथ्यों, परिस्थितियों एवं साक्ष्यों को देखते हुए उसे दंडित किया जाना न्यायोचित है।
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28 अगस्त 2010 को आबकारी निरीक्षक आरपी चौहान टीम के साथ क्षेत्र में गश्त कर रहे थे। सूचना मिली कि मोहल्ला ककराकुर्द निवासी अशफाक अपने घर पर कच्ची शराब की कसीदगी कर रहा है। टीम ने मौके पर पहुंचकर उसे पकड़ा। तलाशी में करीब 15 लीटर कच्ची शराब, लगभग 10 लीटर शराब तैयार करने वाला लहन, एल्युमिनियम का पतीला, कनस्तर, शराब निकालने की प्लास्टिक की नलकी और प्लास्टिक की पिपिया बरामद हुई।
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मौके से करीब 1.5 किलोग्राम यूरिया खाद भी मिली थी। बरामद लहन का नमूना लेकर विधि विज्ञान प्रयोगशाला भेजा गया। चौक कोतवाली में आबकारी अधिनियम की धारा 60(2) और आईपीसी की धारा 272 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया। विवेचना के बाद पुलिस ने अशफाक के खिलाफ आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल किया।
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सुनवाई के दौरान अभियोजन ने चार मौखिक और छह दस्तावेजी साक्ष्य पेश किए। बरामदगी के भौतिक साक्ष्य भी न्यायालय में प्रस्तुत किए गए। अपर सत्र न्यायाधीश नेहा आनंद ने अशफाक को दोनों धाराओं में दोषी करार देते हुए सजा सुनाई। आईपीसी की धारा 272 के तहत उसे आजीवन कारावास की सजा से दंडित किया गया है।
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पिटाई में युवक की मौत के मामले में दोषी को सात साल की कैद

शाहजहांपुर। सदर बाजार क्षेत्र में वर्ष 2012 में मनबहादुर की पिटाई और उसकी मौत होने के मामले में दोषी गोलू को सात साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई है। गोलू बरेली के इज्जतनगर थाना क्षेत्र के गोमती नगर का रहने वाला है।

वादी चंद्रबहादुर ने सदर पुलिस को दी तहरीर देकर बताया था कि उसका भाई मनबहादुर कॉलोनी के रहने वाले गोलू के संपर्क में था। गोलू नौकरी दिलाने के बहाने उसे शाहजहांपुर के आवास विकास की एक कोठी ले आया। कुछ समय बाद गोलू खुद बरेली चला गया, लेकिन मनबहादुर को वहीं छोड़ दिया। परिवार के लोगों ने जब उसके बारे में गोलू से जानकारी की तो वह हर बार यही बताता रहा कि मनबहादुर वहां नौकरी कर रहा है और ठीक है।

इसके बाद परिवार ने गोलू से कोठी का फोन नंबर लेकर वहां संपर्क किया। आरोप है कि फोन पर एक महिला ने गाली-गलौज करते हुए उन्हें भी जान से मारने की धमकी दी। इससे परिवार को मनबहादुर के साथ अनहोनी की आशंका हुई।




31 दिसंबर 2012 की रात गोलू अपने साथी के साथ मनबहादुर को बेहोशी की हालत में लेकर आया। उसके शरीर पर गंभीर चोटों के निशान थे। आरोप था कि उसे डंडों और धारदार हथियारों से बुरी तरह पीटा गया है। मनबहादुर ठीक से बात करने की स्थिति में नहीं था। वह बार-बार बता रहा था कि कोठी में उसे रोज पीटा जाता था, खाना नहीं दिया जाता था और जाने की बात कहने पर कमरे में बंद कर दिया जाता था। उससे बिना वेतन दिन-रात काम कराने का भी आरोप लगाया गया। बाद में उसकी इलाज के दौरान मौत हो गई।

एक जनवरी 2013 को सदर बाजार थाने में गोलू, एक महिला और अज्ञात के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई। विवेचना में पर्याप्त साक्ष्य मिलने पर गोलू के खिलाफ आरोपपत्र न्यायालय भेजा गया। त्वरित न्यायालय-प्रथम की न्यायाधीश प्रथम प्रियंका सिंह-प्रथम ने गोलू को दोषी करार दिया। उसे गैर इरादतन हत्या में सात वर्ष के कठोर कारावास और पांच हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई।
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