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दोहरे हत्याकांड में पिता-पुत्र समेत पांच दोषियों को आजीवन कारावास
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शाहजहांपुर। बंडा क्षेत्र के गांव सुंदरपुर में वर्ष 2000 में हुए दोहरे हत्याकांड में प्रथम फास्ट ट्रैक कोर्ट के अपर सत्र न्यायाधीश मोहम्मद कमर ने पिता-पुत्र समेत पांच दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। दोषियों पर 37-37 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। एक आरोपी सुखदेव सिंह की मुकदमे के दौरान मौत हो गई थी।
सरकारी वकील संजीव कुमार सिंह और उमेशचंद्र अग्निहोत्री ने बताया कि वादी लखविंदर कौर ने बंडा थाने में तहरीर दी थी। इसके मुताबिक 12 मार्च 2000 की रात करीब आठ बजे वह अपने घर की लिपाई कर रही थी। तभी पड़ोसी वीरा सिंह, गुरुदेव सिंह के साथ दो सरदार आए और कहा कि वे पंजाब के तिरसक्का के रहने वाले हैं। इस नाते वे उनके रिश्तेदार हैं। उनके पास जत्थेदार बाबा का लिखा पत्र था।
पत्र पढ़ने के बाद पति धीर सिंह ने कहा कि ठीक है। इसके बाद वीरा सिंह और गुरुदेव अपने घर चले गए। उन दोनों सरदारों ने उसके घर पर चाय पी। इसके बाद पति को थोड़ी दूर ले जाकर तमंचे से गोली मार दी। जब लखविंदर की मौसेरी सास जसवंती ने शोर मचाया तो उसको भी गोली मार दी। विरोध करने पर लखविंद के ऊपर भी गोली चलाई, लेकिन वह बच गई।
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लखविंदर के मुताबिक उसके पति का अमृतसर के गांव शाहपुरा तरनतारन में जमीन को लेकर झगड़ा चल रहा था। इसी वजह से हत्याकांड को अंजाम दिया गया। तहरीर के आधार पर पुलिस ने दो अज्ञात के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली। विवेचना के आधार पर पुलिस ने पाल सिंह निवासी मुगलचक, थाना तरनतारन, अमृतसर, हरदीप सिंह उर्फ इंद निवासी मुगलचक, थाना तरनतारन, सुखदेव सिंह निवासी रामकला थाना मजीठा, अमृतसर, दलवीर सिंह उर्फ वीरा निवासी सराली मंडी, थाना पट्टी, जिला अमृतसर, सुच्चा सिंह और उसके बेटे अवतार सिंह निवासी गांव सुंदरपुर, बंडा के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया।
अदालत में मुकदमा चलने के दौरान गवाहों के बयान और सरकारी वकील के तर्कों से सहमत होकर अपर सत्र न्यायाधीश ने सुच्चा सिंह, अवतार, पाल सिंह, हरदीप, दलवीर को दोषी पाया। सुखदेव सिंह की मुकदमे के दौरान मौत हो गई थी। पांचों दोषियों को आजीवन कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई।
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सरकारी वकील संजीव कुमार सिंह और उमेशचंद्र अग्निहोत्री ने बताया कि वादी लखविंदर कौर ने बंडा थाने में तहरीर दी थी। इसके मुताबिक 12 मार्च 2000 की रात करीब आठ बजे वह अपने घर की लिपाई कर रही थी। तभी पड़ोसी वीरा सिंह, गुरुदेव सिंह के साथ दो सरदार आए और कहा कि वे पंजाब के तिरसक्का के रहने वाले हैं। इस नाते वे उनके रिश्तेदार हैं। उनके पास जत्थेदार बाबा का लिखा पत्र था।
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पत्र पढ़ने के बाद पति धीर सिंह ने कहा कि ठीक है। इसके बाद वीरा सिंह और गुरुदेव अपने घर चले गए। उन दोनों सरदारों ने उसके घर पर चाय पी। इसके बाद पति को थोड़ी दूर ले जाकर तमंचे से गोली मार दी। जब लखविंदर की मौसेरी सास जसवंती ने शोर मचाया तो उसको भी गोली मार दी। विरोध करने पर लखविंद के ऊपर भी गोली चलाई, लेकिन वह बच गई।
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लखविंदर के मुताबिक उसके पति का अमृतसर के गांव शाहपुरा तरनतारन में जमीन को लेकर झगड़ा चल रहा था। इसी वजह से हत्याकांड को अंजाम दिया गया। तहरीर के आधार पर पुलिस ने दो अज्ञात के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली। विवेचना के आधार पर पुलिस ने पाल सिंह निवासी मुगलचक, थाना तरनतारन, अमृतसर, हरदीप सिंह उर्फ इंद निवासी मुगलचक, थाना तरनतारन, सुखदेव सिंह निवासी रामकला थाना मजीठा, अमृतसर, दलवीर सिंह उर्फ वीरा निवासी सराली मंडी, थाना पट्टी, जिला अमृतसर, सुच्चा सिंह और उसके बेटे अवतार सिंह निवासी गांव सुंदरपुर, बंडा के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया।
अदालत में मुकदमा चलने के दौरान गवाहों के बयान और सरकारी वकील के तर्कों से सहमत होकर अपर सत्र न्यायाधीश ने सुच्चा सिंह, अवतार, पाल सिंह, हरदीप, दलवीर को दोषी पाया। सुखदेव सिंह की मुकदमे के दौरान मौत हो गई थी। पांचों दोषियों को आजीवन कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई।