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Shahjahanpur News: हादसे से नहीं लिया सबक, कोलाघाट पुल पर नहीं लगाए संकेतक
Wed, 17 Jan 2024 03:12 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
Updated Wed, 17 Jan 2024 03:12 AM IST
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कोलाघाट पक्के पुल के पत्थरों में नहीं लगे रिफ्लेक्टर। संवाद
मिर्जापुर। कोलाघाट के पक्के पुल से चारपहिया वाहनों को गुजरने से रोकने के लिए रखे गए पत्थर से टकराकर रविवार रात युवक की मौत के बावजूद लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों ने कोई सबक नहीं लिया। मंगलवार को भी न ही पक्के पुल पर कोई संकेतक या रिफ्लेक्टर पट्टी लगाई गई और न ही पैंटून पुल के पास कोई व्यवस्था की गई।
नदियों के आसपास सामान्य से ज्यादा कोहरा रहता है। ऐसे में वाहन चलाते समय संकेतक या रेफ्लेक्टर पट्टी के आधार पर चालक ध्यान देते हैं। कोलाघाट पर चारपहिया वाहनों के निकलने के लिए बनाए गए दो पैंटून पुल के दोनों ओर हाइटगेज लगाए गए हैं। यहां पर भी संकेतक लगाए जाने की जरूरत है। यहां रेफ्लेक्टर या रेडियम लाइन नहीं लगाई गई हैं। इससे घने कोहरे में पैंटून पुलों से निकलते समय वाहन के नदी में गिरने की आशंका है। वहीं कोलाघाट पक्के पुल से सिर्फ दोपहिया वाहनों के ही निकलने की अनुमति है। लोक निर्माण विभाग ने पक्के पुल से भारी वाहनों के आवागमन को रोकने के लिए पुल के दोनों ओर भारी पत्थर लगा दिए हैं। कोहरे में ये पत्थर दिखाई नहीं पड़ते। जरा-सी स्पीड ज्यादा होने पर हादसे की आशंका बनी रहती है। रविवार को घने कोहरे में रात करीब साढ़े नौ बजे कलान निवासी पप्पू के 20 वर्षीय बेटे विशाल की बाइक कोलाघाट पुल की शुरुआत में लगाए गए पत्थर से टकरा गई। हादसे में विशाल की मृत्यु हो गई जबकि उसके साथी मोहित की हालत गंभीर है। वह सैफई के मेडिकल काॅलेज में जिंदगी और मौत के बीच झूल रहा है। लोगों का मानना है कि यदि कोलाघाट पुल के दोनों ओर भारी वाहनों के आवागमन को रोकने के लिए लगाए गए पत्थरों में रिफ्लेक्टर पट्टी लगी होती तो यह हादसा नहीं होता।
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पिछले वर्ष कोहरे के समय कोलाघाट पुल पर लगे पत्थरों में रिफ्लेक्टर और पट्टी बनवाई गई थी। इसे आसपास के लोग उखाड़ ले गए। बुधवार को ही पैंटून पुलों और पक्के पुल पर लगे पत्थरों में व्यवस्था की जाएगी।
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ज्ञानेंद्र शर्मा, जेई पीडब्ल्यूडी
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नदियों के आसपास सामान्य से ज्यादा कोहरा रहता है। ऐसे में वाहन चलाते समय संकेतक या रेफ्लेक्टर पट्टी के आधार पर चालक ध्यान देते हैं। कोलाघाट पर चारपहिया वाहनों के निकलने के लिए बनाए गए दो पैंटून पुल के दोनों ओर हाइटगेज लगाए गए हैं। यहां पर भी संकेतक लगाए जाने की जरूरत है। यहां रेफ्लेक्टर या रेडियम लाइन नहीं लगाई गई हैं। इससे घने कोहरे में पैंटून पुलों से निकलते समय वाहन के नदी में गिरने की आशंका है। वहीं कोलाघाट पक्के पुल से सिर्फ दोपहिया वाहनों के ही निकलने की अनुमति है। लोक निर्माण विभाग ने पक्के पुल से भारी वाहनों के आवागमन को रोकने के लिए पुल के दोनों ओर भारी पत्थर लगा दिए हैं। कोहरे में ये पत्थर दिखाई नहीं पड़ते। जरा-सी स्पीड ज्यादा होने पर हादसे की आशंका बनी रहती है। रविवार को घने कोहरे में रात करीब साढ़े नौ बजे कलान निवासी पप्पू के 20 वर्षीय बेटे विशाल की बाइक कोलाघाट पुल की शुरुआत में लगाए गए पत्थर से टकरा गई। हादसे में विशाल की मृत्यु हो गई जबकि उसके साथी मोहित की हालत गंभीर है। वह सैफई के मेडिकल काॅलेज में जिंदगी और मौत के बीच झूल रहा है। लोगों का मानना है कि यदि कोलाघाट पुल के दोनों ओर भारी वाहनों के आवागमन को रोकने के लिए लगाए गए पत्थरों में रिफ्लेक्टर पट्टी लगी होती तो यह हादसा नहीं होता।
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पिछले वर्ष कोहरे के समय कोलाघाट पुल पर लगे पत्थरों में रिफ्लेक्टर और पट्टी बनवाई गई थी। इसे आसपास के लोग उखाड़ ले गए। बुधवार को ही पैंटून पुलों और पक्के पुल पर लगे पत्थरों में व्यवस्था की जाएगी।
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ज्ञानेंद्र शर्मा, जेई पीडब्ल्यूडी

कोलाघाट पक्के पुल के पत्थरों में नहीं लगे रिफ्लेक्टर। संवाद