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बड़े भाग्य से प्राप्त होती है हरिकथा

Sun, 10 May 2015 11:02 PM IST
पुवायां।
पुवायां। Updated Sun, 10 May 2015 11:02 PM IST
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Large fortune is derived from divine
मानस मर्मज्ञ ब्रजेश शास्त्री ने कहा कि पुत्र, सेवक और धन सभी के पास हो सकता है, लेकिन सत्संगति और हरिकथा बड़े पुण्य से प्राप्त होती है।
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श्री शास्त्री गांव ढकिया के पंचवटी मंदिर पर श्रभ्राम महायज्ञ के समापन पर प्रवचन कर रहे थे। उन्होंने कहा कि बिना हरिकथा और सत्संग के भवसागर पार नहीं हुआ जा सकता। बिना सत्संग विवेक नहीं हो सकता और सत्संग बिना हरिकृपा के नहीं मिल सकता। इसी प्रकार गुरु के बिना मानव भवनिधि पार नहीं कर सकता। गुरु के बिना मनुष्य माया, मोह में पड़कर जीवन नष्ट कर लेता है।

गरुड़ जी के मोह की कथा सुनाते हुए श्री व्यास ने कहा कि भगवान विष्णु के वाहन गरुड़ जी को मोह होने पर शंकर जी ने उन्हें काकभुसुंडि जी के पास भेजा। क्योंकि खग ही खग की भाषा समझ सकता था। श्री व्यास ने कहा कि गुरु और शिष्य दोनों योग्य होने पर ही बेड़ा पार हो सकता है अन्यथा दोनों डूब जाते हैं। अयोघ्या के कलाकारों ने धनुष यज्ञ लीला का मंचन कर दर्शकों का मन मोह लिया। रविवार दोपहर  कन्या भोज और भंडारे के साथ यज्ञ का समापन किया गया।
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