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श्रम कानूनों में श्रमिक विरोधी संशोधन वापस ले केंद्र सरकार
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शाहजहांपुर में सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेट यूनियन के सम्मेलन को संबोधित करते सीटू के प्रदेश सचिव विमे?
- फोटो : SHAHJAHANPUR
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शाहजहांपुर। सेंट्रल इंडियन ट्रेड यूनियन (सीटू) की जिला कार्यसमिति की सोमवार को बहादुरगंज के एक मैरिज लॉन परिसर में हुई बैठक में वक्ताओं ने श्रम कानूनों में किए संशोधनों को श्रमिक विरोधी बताते हुए सरकार के खिलाफ हुंकार भरी। उन्होंने श्रम कानूनों में किए सभी संशोधन वापस लेने के साथ संगठित और असंगठित क्षेत्र के कामगारों के हितों की रक्षा करने के लिए उन्हें न्यूनतम वेतन की गारंटी दिए जाने की शासन से मांग की।
सीटू के जिलाध्यक्ष विजय मिश्रा की अध्यक्षता में हुई बैठक में लखनऊ से आए यूनियन के प्रदेश सचिव विमेश कुमार मिश्रा जी ने कहा कि सरकार श्रमिक हितों की आड़ उनका अहित करने पर तुली है। हाल ही में 44 श्रम कानूनों में किया संशोधन इसका प्रमाण है। इन श्रम कानूनों को चार वेज कोड बिल में तब्दील करने का सीटू इसीलिए विरोध कर रही है क्योंकि उसमें न तो न्यूनतम वेतन मिलने का प्राविधान शामिल है और न ही सेवा के स्थायित्व का आश्वासन दिया गया है। इसके विपरीत सरकार फिक्स टाइम एंप्लॉयमेंट एक्ट लागू करने जा रही है, जिसमें नियत समय के बाद नियोक्ता को कामगार की सेवाएं खत्म करने का अधिकार होगा।
प्रदेश सचिव के साथ आए सीटू की लखनऊ जिला कार्यसमिति के सदस्य सुरोजित मुखर्जी ने कहा कि पुराने श्रमिक नियमों को बहाल कराने के लिए सभी श्रमिक संगठनों को एकजुट होकर सरकार की नीतियों का विरोध करना होगा। उन्होंने बताया कि श्रम कानूनों में संशोधन के खिलाफ संघर्ष के लिए सीटू को मजबूत करने के उद्देश्य से सदस्यता अभियान शुरू किया गया है। महामंत्री पवन शर्मा ने असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों समेत रिक्शा यूनियन, ड्राइवर यूनियन और विभिन्न कारखानों की यूनियनों को सीटू से जोड़ने पर बल दिया। बैठक में मुरारी दीक्षित, विकास तिवारी, दुर्गेश शुक्ला, तौसीफ अंसारी, रमेश मौर्य, रामशरण, इरशाद हुसैन मंसूरी, राजीव श्रीवास्तव आदि शामिल रहे।
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सीटू के जिलाध्यक्ष विजय मिश्रा की अध्यक्षता में हुई बैठक में लखनऊ से आए यूनियन के प्रदेश सचिव विमेश कुमार मिश्रा जी ने कहा कि सरकार श्रमिक हितों की आड़ उनका अहित करने पर तुली है। हाल ही में 44 श्रम कानूनों में किया संशोधन इसका प्रमाण है। इन श्रम कानूनों को चार वेज कोड बिल में तब्दील करने का सीटू इसीलिए विरोध कर रही है क्योंकि उसमें न तो न्यूनतम वेतन मिलने का प्राविधान शामिल है और न ही सेवा के स्थायित्व का आश्वासन दिया गया है। इसके विपरीत सरकार फिक्स टाइम एंप्लॉयमेंट एक्ट लागू करने जा रही है, जिसमें नियत समय के बाद नियोक्ता को कामगार की सेवाएं खत्म करने का अधिकार होगा।
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प्रदेश सचिव के साथ आए सीटू की लखनऊ जिला कार्यसमिति के सदस्य सुरोजित मुखर्जी ने कहा कि पुराने श्रमिक नियमों को बहाल कराने के लिए सभी श्रमिक संगठनों को एकजुट होकर सरकार की नीतियों का विरोध करना होगा। उन्होंने बताया कि श्रम कानूनों में संशोधन के खिलाफ संघर्ष के लिए सीटू को मजबूत करने के उद्देश्य से सदस्यता अभियान शुरू किया गया है। महामंत्री पवन शर्मा ने असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों समेत रिक्शा यूनियन, ड्राइवर यूनियन और विभिन्न कारखानों की यूनियनों को सीटू से जोड़ने पर बल दिया। बैठक में मुरारी दीक्षित, विकास तिवारी, दुर्गेश शुक्ला, तौसीफ अंसारी, रमेश मौर्य, रामशरण, इरशाद हुसैन मंसूरी, राजीव श्रीवास्तव आदि शामिल रहे।
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