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भ्रष्टाचार की वजह से गिरा था 14 साल पहले करोड़ों की लागत से बना कोलाघाट पुल

Tue, 27 Sep 2022 12:36 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Tue, 27 Sep 2022 12:36 AM IST
सार

हालांकि, उनमें से दस अधिकारी सेवानिवृत्त हो चुके हैं, लेकिन जवाबदेही के लिए शामिल किया गया है।इन अधिकारियों के खिलाफ चल रही है जांच मुख्य परियोजना प्रबंधक के अनुसार पुल ढहने के बारे में तत्कालीन प्रभारी मुख्य परियोजना प्रबंधक देशराज विद्यार्थी, तत्कालीन महाप्रबंधक यूसी अग्रवाल व डीएस अरोड़ा, उप परियोजना प्रबंधक अशेष श्रीवास्तव, सुभाष प्रताप बागड़ व विजय कुमार, सहायक अभियंता सुभाष बाबू, अवर अभियंता (सेतु निगम) एके वर्मा, राजकुमार श्रीवास्तव व अनिल व्यास, अवर अभियंता (पीडब्ल्यूडी) सर्वेश चतुर्वेदी व शरद कुमार और लेखा प्रभारी आरएन श्रीवास्तव के खिलाफ जांच जारी है। 43 करोड़ की लागत से तैयार हुए कोलाघाट पुल में मानकों की अनदेखी से अब तक मरम्मत पर करीब 7.5 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं। इसके बाद यदि केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान (सीआरआरआई) की जांच में क्रिटिकल पोजिशन (नाजुक स्थिति) में पाए गए पंद्रह पिलर में खामी पाई जाती है तो मरम्मत खर्च बढ़कर पुल की कुल निर्माण लागत के बराबर पहुंच सकता है।

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Kolaghat bridge fell due to corruption

विस्तार

शाहजहांपुर/जलालाबाद। वर्ष 2008 में 43 करोड़ की लागत से बने 1800 मीटर लंबे कोलाघाट पुल के निर्माण में मानकों की अनदेखी की गई थी। इसी वजह से पिछले साल 29 नवंबर को पिलर धंसने से पुल टूटकर तीन हिस्सों में बंट गया था। उप्र राज्य सेतु निगम के महाप्रबंधक व मुख्य परियोजना प्रबंधक संदीप गुप्ता ने सोमवार को पत्रकार वार्ता में स्वीकार किया कि कुछ चीजों की गुणवत्ता और मानकों का ध्यान नहीं रखने से पुल ढहा था। उन्होंने बताया कि प्रबंध निदेशक के आदेश पर उत्तरदायी पाए गए निगम के तत्कालीन महाप्रबंधक से लेकर विभिन्न विभागों के अवर अभियंता स्तर के 13 अधिकारियों के खिलाफ जांच शुरू कर दी गई है।
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सेतु निगम के महाप्रबंधक संदीप गुप्ता ने बताया कि इनमें लोनिवि के दो और 11 अधिकारी सेतु निगम के हैं। विभाग के संयुक्त प्रबंध निदेशक द्वारा की जा रही जांच अक्तूबर तक पूरी कर आख्या कार्रवाई के लिए शासन को सौंपी जाएगी। उन्होंने बताया कि प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि पुल निर्माण के दौरान तत्कालीन अधिकारियों द्वारा कई स्तर पर मानकों की अनदेखी की गई। इसके चलते एक पिलर धंसने से पुल क्षतिग्रस्त हो गया। मुख्य परियोजना प्रबंधक के अनुसार यह बात सामने आने के बाद तत्कालीन 13 अधिकारियों को चिह्नित कर उनके खिलाफ जांच हो रही है। हालांकि, उनमें से दस अधिकारी सेवानिवृत्त हो चुके हैं, लेकिन जवाबदेही के लिए शामिल किया गया है।
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इन अधिकारियों के खिलाफ चल रही है जांच
मुख्य परियोजना प्रबंधक के अनुसार पुल ढहने के बारे में तत्कालीन प्रभारी मुख्य परियोजना प्रबंधक देशराज विद्यार्थी, तत्कालीन महाप्रबंधक यूसी अग्रवाल व डीएस अरोड़ा, उप परियोजना प्रबंधक अशेष श्रीवास्तव, सुभाष प्रताप बागड़ व विजय कुमार, सहायक अभियंता सुभाष बाबू, अवर अभियंता (सेतु निगम) एके वर्मा, राजकुमार श्रीवास्तव व अनिल व्यास, अवर अभियंता (पीडब्ल्यूडी) सर्वेश चतुर्वेदी व शरद कुमार और लेखा प्रभारी आरएन श्रीवास्तव के खिलाफ जांच जारी है।
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पुल की कुल लागत का 50 फीसदी मरम्मत पर होगा खर्च
जलालाबाद। 43 करोड़ की लागत से तैयार हुए कोलाघाट पुल में मानकों की अनदेखी से अब तक मरम्मत पर करीब 7.5 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं। जांच एजेंसी द्वारा दी जा चुकी रिपोर्ट के आधार पर पुल में अभी जो कार्य होने हैं, उसमें 15 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च होने का अनुमान है। यानी पुल निर्माण की कुल लागत से आधा रुपया भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुका है। इसके बाद यदि केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान (सीआरआरआई) की जांच में क्रिटिकल पोजिशन (नाजुक स्थिति) में पाए गए पंद्रह पिलर में खामी पाई जाती है तो मरम्मत खर्च बढ़कर पुल की कुल निर्माण लागत के बराबर पहुंच सकता है। भ्रष्टाचार के चलते न केवल सरकार को भारी धनराशि खर्च करनी पड़ रही है, आवागमन को लेकर दस माह से लोगों को भारी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

कोलाघाट पुल ढहने के मामले में प्रबंध निदेशक स्तर से कराई जा रही जांच की पहली रिपोर्ट के अनुसार पुल के निर्माण में मानकों और निर्माण सामग्री की गुणवत्ता पर ध्यान नहीं रखा गया। उपयोग किए गर्डर में कोई कमी नहीं बताई गई, लेकिन वेल फाउंडेशन (पिलर की सतह) बनाने में इस्तेमाल हुए सरिया, सीमेंट की गुणवत्ता और पूर्व निर्धारित मानकों की अनदेखी हुई है। अभी जांच पूरी नहीं हुई है। अंतिम जांच रिपोर्ट आने के बाद ही शासन स्तर से संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई तय होगी। - संदीप गुप्ता, मुख्य परियोजना प्रबंधक, उप्र राज्य सेतु निगम
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