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कृपाल से पहले पत्रकार पर कार्तिक ने किया था हमला
ब्यूरो/शाहजहांपुर
Updated Wed, 30 Mar 2016 11:52 PM IST
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आसाराम (फाइल फोटो)
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शहर की बिटिया से दुराचार के मामले में शाहजहांपुर पुलिस की तफ्तीश तेज हो गई है। गुजरात एटीएस द्वारा गवाह कृपाल मर्डर केस में गिरफ्तार शूटर कार्तिक के बारे में कुछ अहम तथ्य पुष्ट हुए हैं। वह 10 जुलाई 2015 को कृपाल सिंह पर हमला करने से पहले वर्ष 2014 के सितंबर माह में भी शाहजहांपुर में आया था। तब उसने 17 सितंबर की रात को सदर बाजार क्षेत्र में एक पत्रकार पर हंसिए से हमला बोला था, लेकिन उसमें गंभीर रूप से घायल पत्रकार किसी प्रकार बच गया। सितंबर वाले हमले में बतौर हमलावर उसकी पहचान कर ली गई है।
आसाराम के दो विश्वस्त के खिलाफ वारंट जारी होने और गुजरात में कार्तिक से जारी पूूछताछ में मिली जानकारी के आधार पर शाजहांपुर पुलिस ने अपनी तफ्तीश को गति दी है। पता चला है कि हर बार हमले में विशेष प्रकार के कट्टे का इस्तेमाल करने वाले कार्तिक ने पत्रकार पर हमले के लिए हंसिए का चुनाव काफी सोच समझकर किया था। शहर के भीड़ वाले इलाके में फायर होने से पकड़े जाने के खतरा था, जबकि हंसिए से झटके में वार कर बाइक पर बैठकर भाग निकलने में विशेष जोखिम नहीं था। उसने वही किया था। पत्रकार के गर्दन पर हंसिया चलाया तो उसने अपने चेहरा झुका लिया जिससे हंसिया का करारी चोट ठोड़ी और आसपास में पड़ी और वह बच गया। हमले के बाद कार्तिक रेलवे स्टेशन के पास सूनसान वर्कशाप परिसर में जाकर अपने कपड़े बदले थे और रवानगी की तैयारी की थी।
पुलिस को जानकारी मिली है कि बिटिया के काफी करीबी होने के चलते पत्रकार आसाराम की आंखों में खटका और तब उन्होंने ठिकाने के लिए विश्वस्त को जिम्मा दिया। उसी क्रम में कार्तिक यहां आया था। इस समय जेल में बंद नारायण पांडेय व अन्य ने उस मामले में भी उसकी मदद की थी। कार्तिक को सुपारी के तौर पर मिली रकम का अभी खुलासा नहीं हुआ है।
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आसाराम प्रकरण में कार्तिक के शाहजहांपुर कनेक्शन को खंगाला जा रहा है। जांच टीम तफ्तीश में जुटी हुई है। गुजरात से वारंट पर कार्तिक को लाए जाने का इंतजार है। उसे यहां लाकर यहां से जुड़े मामलोें में उससे प्रामाणिक पुष्टि कराने के बाद ही अंतिम तौर पर कुछ कहा जा सकेगा
- राजेश कुमार, एसपी सिटी, शाहजहांपुर।
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आसाराम के दो विश्वस्त के खिलाफ वारंट जारी होने और गुजरात में कार्तिक से जारी पूूछताछ में मिली जानकारी के आधार पर शाजहांपुर पुलिस ने अपनी तफ्तीश को गति दी है। पता चला है कि हर बार हमले में विशेष प्रकार के कट्टे का इस्तेमाल करने वाले कार्तिक ने पत्रकार पर हमले के लिए हंसिए का चुनाव काफी सोच समझकर किया था। शहर के भीड़ वाले इलाके में फायर होने से पकड़े जाने के खतरा था, जबकि हंसिए से झटके में वार कर बाइक पर बैठकर भाग निकलने में विशेष जोखिम नहीं था। उसने वही किया था। पत्रकार के गर्दन पर हंसिया चलाया तो उसने अपने चेहरा झुका लिया जिससे हंसिया का करारी चोट ठोड़ी और आसपास में पड़ी और वह बच गया। हमले के बाद कार्तिक रेलवे स्टेशन के पास सूनसान वर्कशाप परिसर में जाकर अपने कपड़े बदले थे और रवानगी की तैयारी की थी।
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पुलिस को जानकारी मिली है कि बिटिया के काफी करीबी होने के चलते पत्रकार आसाराम की आंखों में खटका और तब उन्होंने ठिकाने के लिए विश्वस्त को जिम्मा दिया। उसी क्रम में कार्तिक यहां आया था। इस समय जेल में बंद नारायण पांडेय व अन्य ने उस मामले में भी उसकी मदद की थी। कार्तिक को सुपारी के तौर पर मिली रकम का अभी खुलासा नहीं हुआ है।
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आसाराम प्रकरण में कार्तिक के शाहजहांपुर कनेक्शन को खंगाला जा रहा है। जांच टीम तफ्तीश में जुटी हुई है। गुजरात से वारंट पर कार्तिक को लाए जाने का इंतजार है। उसे यहां लाकर यहां से जुड़े मामलोें में उससे प्रामाणिक पुष्टि कराने के बाद ही अंतिम तौर पर कुछ कहा जा सकेगा
- राजेश कुमार, एसपी सिटी, शाहजहांपुर।